{"_id":"5a5376604f1c1b3e198b5894","slug":"road-to-become-pit-hole-free-from-manakpur-to-barayamkheda","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानकपुर से बरामयखेड़ा तक सड़क होगी गड्ढामुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानकपुर से बरामयखेड़ा तक सड़क होगी गड्ढामुक्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
Updated Mon, 08 Jan 2018 07:17 PM IST
विज्ञापन
Manakpur road
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानकपुर और बरामयखेड़ा तक गड्ढायुक्त सड़क के अच्छे दिन आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गड्ढामुक्त सड़क योजना के तहत इस सड़क को करीब 50 लाख रुपये की लागत से गड्ढामुक्त किया जाएगा। गड्ढे भरने के साथ ही सड़क पर डामरीकरण भी होगा। सब कुछ ठीक रहा तो प्रदेश सरकार ने 31 मार्च तक सड़क को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
बरेली-मथुरा हाइवे को बदायूं-बिजनौर राजमार्ग से जोड़ने वाली मानकपुर-बरायमखेड़ा सड़क बिल्सी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। बाईपास से मानकपुर के रास्ते बरायमखेड़ा तक की इस सड़क से करीब आधा दर्जन गांव ताल्लुक रखते हैं। मानकपुर, रौली, जमरौली, बरसुआ, लहुआ के ग्रामीणों को इसी सड़क से होकर सफर करना पड़ता है। एक दशक से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़क पर यूं तो बस से आवागमन की सुविधा नहीं है लेकिन ग्रामीणों के लिए निजी संसाधनों में ट्रैक्टर, डनलप, तांगा और टेंपो आदि का सहारा लेना पड़ता है। 14 किमी दूरी का सफर पूरा करने को एक घंटा से अधिक समय लगता है। पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश सरकार के गड्ढामुक्त सड़क अभियान में मानकपुर-बरायमखेड़ा रोड का चयन कर करीब 50 लाख रुपये की लागत से इस सड़क को 31 मार्च तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
कीचड़ भरे गड्डों में फंस जाते हैं छोटे वाहन
उझानी। मानकपुर-बरायमखेड़ा रोड पर गड्डों की वजह से लोगों को हो रही दिक्कत का एक नमूना सोमवार को देखने को मिला। बरसुआ की ओर से सवारियों को उझानी तक पहुंचाने के लिए निकला थ्री-व्हीलर मानकपुर गांव के पास सड़क पर कींचड़ में फंस गया। चालक नेमसिंह ने पूरी कोशिश की लेकिन ग्रामीणों के सहारे के बिना बाहर नहीं निकल पाया। घोड़ा-बुग्गी के जरिए सफर के दौरान ग्रामीण महिलाएं गिरकर घायल भी होती रही हैं।
विज्ञापन
यह कहते हैं इलाके के लोग
पैदल सफर भी हुआ मुश्किल
रौली के गांव नेकसू ने खस्ताहाल सड़क पर सफर के दौरान कई ऐसे अनुभव बताए जो किसी पीड़ा से कम नहीं थे। उन्होंने कहा कि रौली और उझानी की दूरी कोई खास नहीं है लेकिन पैदल निकलना हर बार ही किसी दुर्गम रास्ते पर सफर के जैसा रहा। ग्रामीणों ने जब भी आवाज उठाई, दबा दिया गया।
प्रभावित हो रहा है कृषि कामकाज
जमरौली गांव के शिशुपाल साइकिल से बाजार पहुंचे। उन्होंने कहा कि खेतों से अनाज और पूले आदि घर पहुंचाने के लिए जो मशक्कत करनी पड़ती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। कृषि कामकाज भी समय पर पूरा नहीं हो पाता। अनाज मंडी पहुंचाने वाहन मालिकों से बात करो तो वह सड़क खराब बता कर इंकार कर देते हैं।
अच्छा होगा जो सड़क बनवा दें अफसर
मानकपुर निवासी उमेश कुमार का कहना है कि सड़क की बात उठाने पर अफसर यही कहकर चले जाते हैं कि जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। उम्मीद के सहारे एक दशक गुजार दिया। अफसरों की बातों पर भरोसा कैसे किया जाए। अच्छा तो यही रहेगा कि इलाके की सड़क का निर्माण करा दिया जाए। इससे आसपास के लोगों का सफर आसान हो जाएगा।
बारिश के दिनों में होती है मुसीबत
मानकपुर से क्षेत्र पंचायत सदस्य शवाब आलम कहते हैं कि सड़क यूं तो बरामयखेड़ा तक जर्जर है लेकिन मानकपुर गांव के अंदर खस्ताहाल सड़क ने ग्रामीणों के लिए सालों से बुरे दिनों का अहसास कराया है। बरसात के दिनों में तो एक किलोमीटर इलाके में सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है।
मानकपुर-बरायमखेड़ा तक खस्ताहाल सड़क के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव तो पहले भी दो बार भेजा गया था लेकिन उस समय मंजूरी नहीं मिल पाई थी। चूंकि गड्ढामुक्त सड़क के लिए अभियान चल रहा है, सो इसका भी जीर्णोद्धार होगा। सर्दी कम होते ही काम भी शुरू कर दिया जाएगा। - सूबे सिंह, जेई, पीडब्ल्यूडी।
विज्ञापन
बरेली-मथुरा हाइवे को बदायूं-बिजनौर राजमार्ग से जोड़ने वाली मानकपुर-बरायमखेड़ा सड़क बिल्सी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। बाईपास से मानकपुर के रास्ते बरायमखेड़ा तक की इस सड़क से करीब आधा दर्जन गांव ताल्लुक रखते हैं। मानकपुर, रौली, जमरौली, बरसुआ, लहुआ के ग्रामीणों को इसी सड़क से होकर सफर करना पड़ता है। एक दशक से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़क पर यूं तो बस से आवागमन की सुविधा नहीं है लेकिन ग्रामीणों के लिए निजी संसाधनों में ट्रैक्टर, डनलप, तांगा और टेंपो आदि का सहारा लेना पड़ता है। 14 किमी दूरी का सफर पूरा करने को एक घंटा से अधिक समय लगता है। पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश सरकार के गड्ढामुक्त सड़क अभियान में मानकपुर-बरायमखेड़ा रोड का चयन कर करीब 50 लाख रुपये की लागत से इस सड़क को 31 मार्च तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
विज्ञापन
कीचड़ भरे गड्डों में फंस जाते हैं छोटे वाहन
उझानी। मानकपुर-बरायमखेड़ा रोड पर गड्डों की वजह से लोगों को हो रही दिक्कत का एक नमूना सोमवार को देखने को मिला। बरसुआ की ओर से सवारियों को उझानी तक पहुंचाने के लिए निकला थ्री-व्हीलर मानकपुर गांव के पास सड़क पर कींचड़ में फंस गया। चालक नेमसिंह ने पूरी कोशिश की लेकिन ग्रामीणों के सहारे के बिना बाहर नहीं निकल पाया। घोड़ा-बुग्गी के जरिए सफर के दौरान ग्रामीण महिलाएं गिरकर घायल भी होती रही हैं।
विज्ञापन
यह कहते हैं इलाके के लोग
पैदल सफर भी हुआ मुश्किल
रौली के गांव नेकसू ने खस्ताहाल सड़क पर सफर के दौरान कई ऐसे अनुभव बताए जो किसी पीड़ा से कम नहीं थे। उन्होंने कहा कि रौली और उझानी की दूरी कोई खास नहीं है लेकिन पैदल निकलना हर बार ही किसी दुर्गम रास्ते पर सफर के जैसा रहा। ग्रामीणों ने जब भी आवाज उठाई, दबा दिया गया।
प्रभावित हो रहा है कृषि कामकाज
जमरौली गांव के शिशुपाल साइकिल से बाजार पहुंचे। उन्होंने कहा कि खेतों से अनाज और पूले आदि घर पहुंचाने के लिए जो मशक्कत करनी पड़ती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। कृषि कामकाज भी समय पर पूरा नहीं हो पाता। अनाज मंडी पहुंचाने वाहन मालिकों से बात करो तो वह सड़क खराब बता कर इंकार कर देते हैं।
अच्छा होगा जो सड़क बनवा दें अफसर
मानकपुर निवासी उमेश कुमार का कहना है कि सड़क की बात उठाने पर अफसर यही कहकर चले जाते हैं कि जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। उम्मीद के सहारे एक दशक गुजार दिया। अफसरों की बातों पर भरोसा कैसे किया जाए। अच्छा तो यही रहेगा कि इलाके की सड़क का निर्माण करा दिया जाए। इससे आसपास के लोगों का सफर आसान हो जाएगा।
बारिश के दिनों में होती है मुसीबत
मानकपुर से क्षेत्र पंचायत सदस्य शवाब आलम कहते हैं कि सड़क यूं तो बरामयखेड़ा तक जर्जर है लेकिन मानकपुर गांव के अंदर खस्ताहाल सड़क ने ग्रामीणों के लिए सालों से बुरे दिनों का अहसास कराया है। बरसात के दिनों में तो एक किलोमीटर इलाके में सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है।
मानकपुर-बरायमखेड़ा तक खस्ताहाल सड़क के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव तो पहले भी दो बार भेजा गया था लेकिन उस समय मंजूरी नहीं मिल पाई थी। चूंकि गड्ढामुक्त सड़क के लिए अभियान चल रहा है, सो इसका भी जीर्णोद्धार होगा। सर्दी कम होते ही काम भी शुरू कर दिया जाएगा। - सूबे सिंह, जेई, पीडब्ल्यूडी।