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बेहतर समाज के निर्माण के लिए हो अनुसंधान : धर्मपाल सिंह
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राजकीय डिग्री कॉलेज में हुई अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते अतिथि। संवाद
बदायूं। राजकीय स्नातक महाविद्यालय में वनस्पति व प्राणी विज्ञान विभाग की ओर से रिसेंट ट्रेंडस इन प्लांट एंड एनिमल साइंस (आरटीपीएएस-205) विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ ऑनलाइन हुआ। सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका, चीन, श्रीलंका, नेपाल सहित विभिन्न देशों और भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके अलावा करीब 500 शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने पंजीकरण कराया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशुधन व दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए अनुसंधान होना चाहिए। उच्च शिक्षा संयुक्त निदेशक डॉ. शशि कपूर ने नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व केंद्रित शोध करने पर बल दिया। सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने शोधार्थियों से कहा कि वे अपने शोध कार्य को आमजन की आवश्यकताओं से जोड़ें। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने इसे बदायूं की शैक्षणिक उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। पहले दिन एएमयू अलीगढ़ के प्रो. शम्शुल हयात और प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने नैनोटेक्नोलॉजिस्ट के जरिए फसल सुधार और पोषक तत्वों से भरपूर अनाज उत्पादन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। एमजेपीआरयू बरेली के प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने भारी धातुओं और प्रदूषकों के बायोडिग्रेडेशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। इससे पहले उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. प्रियंका सिंह और तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. गौरव कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर राजकीय स्नातक महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता, समन्वयक डॉ. सचिन कुमार राघव आदि मौजूद रहे।
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नैनो-बायोइंजीनियरिंग विषय पर दिया व्याख्यान
-रूस के प्रोफेसर विष्णु डी. राजपूत ने राइजोस्फेरिक प्रणाली की नैनो-बायोइंजीनियरिंग विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि राइजोस्फीयर बैक्टीरिया पौधों की जड़ों वाले मृदा क्षेत्र में सूक्ष्मजीवी गतिविधियों और पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करते हैं। जो पौधों की गुणवत्ता और पोषण में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम की प्रो. ख्याइन यू मार ने एशियन हाथियों के व्यवसायिक शोषण पर चिंता जताई और उनकी सुरक्षा व स्वतंत्रता के उपाय सुझाए।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशुधन व दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए अनुसंधान होना चाहिए। उच्च शिक्षा संयुक्त निदेशक डॉ. शशि कपूर ने नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व केंद्रित शोध करने पर बल दिया। सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने शोधार्थियों से कहा कि वे अपने शोध कार्य को आमजन की आवश्यकताओं से जोड़ें। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने इसे बदायूं की शैक्षणिक उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। पहले दिन एएमयू अलीगढ़ के प्रो. शम्शुल हयात और प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने नैनोटेक्नोलॉजिस्ट के जरिए फसल सुधार और पोषक तत्वों से भरपूर अनाज उत्पादन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। एमजेपीआरयू बरेली के प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने भारी धातुओं और प्रदूषकों के बायोडिग्रेडेशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। इससे पहले उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. प्रियंका सिंह और तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. गौरव कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर राजकीय स्नातक महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता, समन्वयक डॉ. सचिन कुमार राघव आदि मौजूद रहे।
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नैनो-बायोइंजीनियरिंग विषय पर दिया व्याख्यान
-रूस के प्रोफेसर विष्णु डी. राजपूत ने राइजोस्फेरिक प्रणाली की नैनो-बायोइंजीनियरिंग विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि राइजोस्फीयर बैक्टीरिया पौधों की जड़ों वाले मृदा क्षेत्र में सूक्ष्मजीवी गतिविधियों और पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करते हैं। जो पौधों की गुणवत्ता और पोषण में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम की प्रो. ख्याइन यू मार ने एशियन हाथियों के व्यवसायिक शोषण पर चिंता जताई और उनकी सुरक्षा व स्वतंत्रता के उपाय सुझाए।
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