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बदायूं के एक मंदिर में होती है शिवभक्त रावण की भी पूजा
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मोहल्ला साहूकारा के मंदिर में स्थित रावण की प्रतिमा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। दशहरा पर देश भर में जहां एक ओर रावण का पुतला दहन किया जाता है वहीं शहर के मोहल्ला साहूकारा के एक मंदिर में स्थापित शिवभक्त रावण की प्रतिमा की पूजा भी की जाती है। मंदिर को ‘रावण का मंदिर’ नाम से ही जाना जाता है।
शहर के मोहल्ला साहूकारा में यह मंदिर सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। मंदिर में रावण के अलावा शिव दरबार, भगवान विष्णु, हनुमान जी, माता काली और माता दुर्गा की प्रतिमाओं के अलावा शिवलिंग भी स्थापित है।
दशहरा पर हर साल मंदिर में प्रकांड विद्वान और शिवभक्त होने के नाते रावण की पूरे विधिविधान के साथ पूजा होती है। मंदिर की देखभाल रविंद्र शर्मा और उनकी पत्नी रश्मि शर्मा करते हैं। उनका कहना है कि रावण शिव भक्त था। मंदिर रावण का नहीं है बल्कि यहां रावण की प्रतिमा शिवलिंग के पास स्थापित है। दशहरा पर काफी लोग रावण की विद्वता और शिवभक्त होने के कारण पूजा करने आते हैं। मंदिर में रावण के अवगुणों की नहीं बल्कि सद्गुणों की पूजा की जाती है।
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उन्होंने कहा कि मंदिर के कपाट प्रतिदिन समय से खुलते हैं। अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने लोग रोजाना पहुंचते हैं, लेकिन दशहरा के दिन काफी संख्या में लोग रावण की पूजा करने आते हैं। संवाद
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शहर के मोहल्ला साहूकारा में यह मंदिर सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। मंदिर में रावण के अलावा शिव दरबार, भगवान विष्णु, हनुमान जी, माता काली और माता दुर्गा की प्रतिमाओं के अलावा शिवलिंग भी स्थापित है।
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दशहरा पर हर साल मंदिर में प्रकांड विद्वान और शिवभक्त होने के नाते रावण की पूरे विधिविधान के साथ पूजा होती है। मंदिर की देखभाल रविंद्र शर्मा और उनकी पत्नी रश्मि शर्मा करते हैं। उनका कहना है कि रावण शिव भक्त था। मंदिर रावण का नहीं है बल्कि यहां रावण की प्रतिमा शिवलिंग के पास स्थापित है। दशहरा पर काफी लोग रावण की विद्वता और शिवभक्त होने के कारण पूजा करने आते हैं। मंदिर में रावण के अवगुणों की नहीं बल्कि सद्गुणों की पूजा की जाती है।
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उन्होंने कहा कि मंदिर के कपाट प्रतिदिन समय से खुलते हैं। अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने लोग रोजाना पहुंचते हैं, लेकिन दशहरा के दिन काफी संख्या में लोग रावण की पूजा करने आते हैं। संवाद