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महंगाई का असर, रावण का कदम 15 फुट कम हुआ
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रावण का पुतला बनाते कारीगर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। कोरोना की मार इस बार भी रामलीला महोत्सव पर भी है। दशहरा पर इस बार सिर्फ रावण का पुतला दहन किया जाएगा। मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले नहीं जलाए जाएंगे। गत वर्षों के मुकाबले रावण के पुतले की लंबाई भी इस बार 15 फुट कम रहेगी।
बदायूं का रामलीला महोत्सव डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुराना है, जबकि 70 सालों से आयोजन गांधी ग्राउंड पर हो रहा है। पिछले वर्ष कोरोना काल के कारण पहली बार रामलीला महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था। इस बार भी शुरुआत में आयोजन का लेकर गतिरोध रहा। बाद में प्रशासनिक मंजूरी मिली तो आयोजकों ने राहत की सांस ली। रामलीला महोत्सव के दौरान हर वर्ष दशहरा काफी धूमधाम से मनाया जाता है। यहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता है। हर वर्ष रावण के पुतले की लंबाई करीब 55 फुट हुआ करती थी, लेकिन इस बार कोरोना की मार ने इसे घटाकर करीब 35 फुट कर दिया है। इसके साथ ही अनुमति न मिलने से इस बार मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी नहीं किया जाएगा।
पिछले 10 साल से पुतला बनाने वाले आंवला (बरेली) के मोहल्ला बजरिया निवासी तालिब मसूदी का कहना है कि बदायूं के अलावा बरेली के रामलीला महोत्सव में भी वे पुतले बनाते रहे हैं। पिछले वर्ष उनको काम ही नहीं मिला, इस साल भी काफी कम काम है। इस बार बदायूं में रावण का पुतला बनाने पर करीब 35 हजार का खर्च आ रहा है सिर्फ एक ही पुतला बनाया जा रहा है।
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बढ़ने लगी रामलीला महोत्सव में रौनक
इस बार रामलीला महोत्सव देर से शुरू हुआ। यही वजह है कि अब तक पूरी तरह दुकानें नहीं लग सकी हैं तो झूले, खेल-तमाशे भी कम हैं। इसके अलावा इस बार श्रीराम बरात की अनुमति भी नहीं दी गई, पहले बरात के दौरान काफी भीड़ उमड़ती थी। लेकिन अब जैसे-जैसे आयोजन आगे बढ़ रहा है श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है।
श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के मंत्री अरविंद कांत का कहना है कि सिर्फ रावण का पुतला दहन की अनुमति मिली है, बावजूद इसके दशहरा पूरी भव्यता और धूमधाम से बनाया जाएगा। आतिशबाजी में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। संवाद
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बदायूं का रामलीला महोत्सव डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुराना है, जबकि 70 सालों से आयोजन गांधी ग्राउंड पर हो रहा है। पिछले वर्ष कोरोना काल के कारण पहली बार रामलीला महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था। इस बार भी शुरुआत में आयोजन का लेकर गतिरोध रहा। बाद में प्रशासनिक मंजूरी मिली तो आयोजकों ने राहत की सांस ली। रामलीला महोत्सव के दौरान हर वर्ष दशहरा काफी धूमधाम से मनाया जाता है। यहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता है। हर वर्ष रावण के पुतले की लंबाई करीब 55 फुट हुआ करती थी, लेकिन इस बार कोरोना की मार ने इसे घटाकर करीब 35 फुट कर दिया है। इसके साथ ही अनुमति न मिलने से इस बार मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी नहीं किया जाएगा।
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पिछले 10 साल से पुतला बनाने वाले आंवला (बरेली) के मोहल्ला बजरिया निवासी तालिब मसूदी का कहना है कि बदायूं के अलावा बरेली के रामलीला महोत्सव में भी वे पुतले बनाते रहे हैं। पिछले वर्ष उनको काम ही नहीं मिला, इस साल भी काफी कम काम है। इस बार बदायूं में रावण का पुतला बनाने पर करीब 35 हजार का खर्च आ रहा है सिर्फ एक ही पुतला बनाया जा रहा है।
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बढ़ने लगी रामलीला महोत्सव में रौनक
इस बार रामलीला महोत्सव देर से शुरू हुआ। यही वजह है कि अब तक पूरी तरह दुकानें नहीं लग सकी हैं तो झूले, खेल-तमाशे भी कम हैं। इसके अलावा इस बार श्रीराम बरात की अनुमति भी नहीं दी गई, पहले बरात के दौरान काफी भीड़ उमड़ती थी। लेकिन अब जैसे-जैसे आयोजन आगे बढ़ रहा है श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है।
श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के मंत्री अरविंद कांत का कहना है कि सिर्फ रावण का पुतला दहन की अनुमति मिली है, बावजूद इसके दशहरा पूरी भव्यता और धूमधाम से बनाया जाएगा। आतिशबाजी में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। संवाद