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चित्त सदा चंचल, यहां क्षण भर को ठहरता है ज्ञान: फुलसंदे
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बदायूं। बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि चित्त सदा चंचल है इसमें बहुत से विकार आते रहते हैं। इसमें ज्ञान क्षण भर को ठहरता है, इसलिए इसमें ज्ञान ज्योति को रोककर रखना कठिन है और इसका निवारण करना भी दुष्कर है। ऐसे चित्त को ज्ञानी पुरुष उसी प्रकार सीधा करता है जैसे बाण बनाने वाला लोहार यत्न पूर्वक बाण को आग में तपाकर अनेक प्रयास करके उसे ठीक करता है।
स्वरूपपुर में हुए सत्संग में मंगलवार को बाबा ने कहा कि जिसका मन अस्थिर है, जो धर्म आचरण को नहीं जानता, जिसकी श्रद्धा अस्थिर है उसकी बुद्धि भी पूर्ण नहीं हो सकती और न ही उसे सुख प्राप्त हो सकता है। मनुष्य क्रोध में बहुत कुछ अनर्थ कर डालता है। अगर वह धैर्य रखे तो बहुत से संकट और आपदा अपने आप ही टल जाती हैं। अंत में उन्होंने कहा कि मेरे राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक आत्मा से तपस्वी और शरीर से एक मजबूत सैनिक बने जो अपने धर्म की, अपने राष्ट्र की सेवा और रक्षा कर सके।
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स्वरूपपुर में हुए सत्संग में मंगलवार को बाबा ने कहा कि जिसका मन अस्थिर है, जो धर्म आचरण को नहीं जानता, जिसकी श्रद्धा अस्थिर है उसकी बुद्धि भी पूर्ण नहीं हो सकती और न ही उसे सुख प्राप्त हो सकता है। मनुष्य क्रोध में बहुत कुछ अनर्थ कर डालता है। अगर वह धैर्य रखे तो बहुत से संकट और आपदा अपने आप ही टल जाती हैं। अंत में उन्होंने कहा कि मेरे राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक आत्मा से तपस्वी और शरीर से एक मजबूत सैनिक बने जो अपने धर्म की, अपने राष्ट्र की सेवा और रक्षा कर सके।
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