कुपोषित बच्चों को रेड और येलो से दी जा रही पहचान
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जिले के बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए शासन से शुरू कराए गए प्रयासों का नतीजा है कि ऐसे बच्चों पर ध्यान दिया जाने लगा है। अतिकुपोषित बच्चों को रेड धारी में रखा गया है। इन्हें कुपोषित यानि येलो धारी में और कुपोषित को स्वस्थ यानि ग्रीन लाइन में लाने के लिए प्रयास किए जा रहा हैं। बाल विकास के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी इसमें लगाया गया है। ऐसे बच्चों को पोषाहार पर विशेष ध्यान दिया जाता है और अभिभावकों को नियमित सलाह भी दी जा रही है। पिछले महीने में करीब 40 बच्चों को रेड से येलो धारी में लाया गया था। अब इन्हें ग्रीन धारी में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
शासन के निर्देश पर प्रशासनिक अमला जिले के कुपोषित बच्चों को स्वस्थ श्रेणी में लाने के प्रयासों में जुट गया है। डीएम शंभूनाथ ने जगत ब्लाक का गांव पड़ौआ और दातागंज ब्लाक का भटौली गांव गोद लिया है। सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने म्याऊं ब्लाक के गांव चितौरा और दातागंज के सैजनी गांव को गोद लिया है। इस प्रकार जिला और तहसील स्तरीय अधिकारियों को मिलाकर 154 अधिकारियों ने ऐसे गांव गोद लिए हैं जिनमें कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक रही है। बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग इस पर विशेष ध्यान दे रहा है। बाकी गांवों में भी अधिकारियों के निर्देशन में कुपोषित बच्चों का कुपोषण दूर करने का प्रयास हो रहा है।
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अभी बड़ी संख्या में हैं रेड, येलो धारी के बच्चे
जिले में प्रशासनिक अमला कुपोषित बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के प्रयास में जुटा है। इसके बावजूद कुपोषण से लड़ना जिले को बड़ी चुनौती है। जिले में 2937 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 66980 बच्चे कुपोषित यानि येलो धारी में हैं और 1618 बच्चे अति कुपोषित अर्थात रेड धारी में शामिल हैं। सबसे अधिक 192 सालारपुर ब्लाक मे अति कुपोषित बच्चे हैं। इन बच्चों में पिछले दिनों कोई बच्चा येलो धारी में नहीं आया।
सार्थक प्रयास हुए तो आए परिणाम
जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे अभियान का नतीजा है कि कई गांवों में बच्चे रेड धारी से येलो धारी में आए हैं।
- ब्लाक इस्लामनगर
गांव कुंदावली- दो बच्चे
- ब्लाक दातागंज
गांव छछऊ और सैंजनी- आठ-आठ बच्चे
-ब्लाक म्याऊं के गांव - नौ बच्चे
- आसफपुर के गांव में - आठ बच्चे
- ब्लाक वजीरगंज
गांव रेहड़िया- एक बच्चा
- ब्लाक जगत
गांव पड़ौआ- दो बच्चे पीली
गांव नवादा सूलरा और कुलचौरा में- एक-एक बच्चा
कुपोषित बच्चों को रेड धारी से ग्रीन धारी में लाने का प्रयास चल रहा है। इन प्रयासों के तहत बाल विकास की आंगनबाड़ी कार्यकत्री और गांव की एएनएम की विशेष महत्ता है। अहम बात है कि जो प्रयास किए जा रहे हैं। उनमें विभाग को सफलता मिल रही है, इसमें गांव की एएनएम का विशेष योगदान है।
- निर्मल शर्मा, डीपीओ