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सगे भाई निकले इशरत के हत्यारे, संपत्ति बेचने के डर से मार डाला

Sat, 30 Apr 2022 02:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 02:03 AM IST
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Real brothers turned out to be Ishrat's killers, killed for fear of selling property
ुलिस लाइन सभागार में इशरत हत्याकांड का खुलासा करते एसएसपी। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। बिसौली के इशरत की हत्या कर शव को बोरी में बंदकर फैजगंज बेहटा इलाके में फेंकने वाले और कोई नहीं बल्कि सगे भाई ही निकले। पुलिस ने उसके दो सगे भाइयों समेत चार हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया है। संपत्ति की खातिर भाइयों ने घर में ही इशरत की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। शव को फैजगंज बेहटा इलाके में फेंक दिया था। पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेजा है।
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एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि 23 अप्रैल को फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के गांव सैंडोला के नजदीक भानुप्रकाश के मक्का के खेत में बोरी में बंद एक लाश मिली थी। दूसरे दिन बिसौली के वार्ड नंबर 22 निवासी अजमत फैजगंज थाने पहुंचा और मृतक की पहचान अपने भाई इशरत के रूप में की। बताया था कि उसका भाई इशरत 20 अप्रैल से लापता था। पोस्टमार्टम में उसकी गला घोंटकर हत्या बताई गई थी। 25 अप्रैल को इशरत की मां नासरी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने इशरत के भाई हिकमत और इमरान से पूछताछ की तो उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया। बताया कि इशरत की हत्या सिसरका निवासी फैैजी और पिपरिया निवासी मुंत्याज के साथ मिलकर थी। कॉल करके दोनों आरोपियों को घर बुलाया फिर इशरत की हत्या अपने घर में ही कर दी। फिर फैजी और मुंत्याज इशरत के शव को बोरी में बंद करके ले गए और फैजगंज बेहटा इलाके में फेंक आए। खुलासे के दौरान एसपी देहात सिद्घार्थ वर्मा, एसपी सिटी प्रवीन सिंह चौहान मौजूद रहे।
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जमीन बेचना चाहता था इशरत, इसलिए रास्ते से हटाया
- हिकमत और इमरान ने बताया कि इशरत स्मैक के नशे का आदी था। वह नशा करने के लिए चोरी करने लगा था। वह अपने हिस्से की जमीन भी बेचना चाहता था। वह मां से मारपीट करता था। उसकी हरकतों से वह परेशान हो गए थे। वह कहीं जमीन न बेच दे, इसलिए उन्होंने इशरत को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और उसकी हत्या कर दी।
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भाई की हत्या कराने को दिए 17 हजार रुपये
- हत्यारोपी हिकमत और इमरान ने इशरत की हत्या कराने को दोनों सहयोगियों को 17 हजार रुपये दिए थे। दोनों सहयोगी आरोपी फैज और मुंत्याज उनके घर पहले से आते-जाते थे। जब उन्होंने इशरत की हत्या करने को कहा तो उन्होंने इसके लिए 17 हजार रुपये मांगे। इस पर उन्होंने दोनों आरोपियों को 17 हजार रुपये दे दिए। हत्या चारों लोगों ने मिलकर की थी लेकिन शव फैज और मुंत्याज फेंक कर आए थे।
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