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अब गांवों तक पहुंचकर दूध खरीदेगी पराग डेयरी
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:57 PM IST
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22 बीएमसी और 235 डीपीएमसी खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा
एक-डेढ़ साल से बंद पड़ी पराग डेयरी को संचालित करने की कोशिश जारी है। इसी कड़ी में डेयरी की ओर से ज्यादा से ज्यादा दुग्ध की खरीद करने के लिए जिले के हर ब्लाक में 50 लीटर क्षमता वाले बल्क मिल्क कूलर यानी बीएमसी लगाए जाएंगे। वहीं, हर गांव में डेटा मिल्क प्रोसेसिंग सेंटर यानी डीपीएमसी स्थापित करने की भी योजना है। इनका संचालन दुग्ध समितियों के जरिए कराया जाएगा। अभी तक जनपद में सिर्फ आठ ही बीएमसी संचालित हो रहे हैं। इसमें तीन बीएमसी के जरिए दूध खरीदकर सीधे मेरठ को भेजा जा रहा है। जिले में 22 नए बीएमसी और 235 डीपीएमसी खोलने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। पराग डेयरी के प्रभारी दुग्ध उत्पादन पप्पू यादव ने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पराग डेयरी लगभग बीस किलोमीटर के अंतर पर बीएमसी यानी बल्क सेंटर संचालित करने की योजना है। जिले में अभी सिर्फ आठ बीएमसी हैं, जिनमें तीन ही चल रहे हैं। अलापुर, उसावां और म्याऊ के पास गिल्टैया गांव में संचालित बीएमसी से पांच सौ से एक हजार लीटर दूध एकत्र करके सीधे मेरठ भेजा रहा है। फिलहाल शासन से 22 बीएमसी की और मांग की गई है। अप्रैल से इनको संचालित किए जाने की उम्मीद है। एक बीएमसी का बजट लगभग 15 लाख रुपये है। इसमें एक दूध ठंडा करने का टैंकर, एक जनरेटर सेट, चिलिंग मशीन, फेट निकालने की मशीन और अन्य उपकरण शामिल होते हैं। इसी तरह 235 डीपीएमसी लगाने की तैयारी की जा रही है। एक डीपीएमसी का खर्चा लगभग एक लाख रुपए आ रहा है। इसमें एक कंप्युटर, एक प्रिंटर, फेट मशीन, कांटा और अन्य उपकरण शामिल होंगे। ये समिति पंजीकृत दुग्ध समितियों के द्वारा संचालित कराये जायेंगे।
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जो किसान बीएमसी या डीपीएमसी पर दूध बेचेंगे। उनको बैंक खाते से जोड़ा जाएगा। उनका पैसा सीधे आठ दिन के अंतराल पर खातों में भेजा जाएगा। इसके अलावा पराग डेयरी को चलाने के लिए भी शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
-पप्पू यादव, दुग्ध उत्पादन प्रभारी, पराग डेयरी
एक-डेढ़ साल से बंद पड़ी पराग डेयरी को संचालित करने की कोशिश जारी है। इसी कड़ी में डेयरी की ओर से ज्यादा से ज्यादा दुग्ध की खरीद करने के लिए जिले के हर ब्लाक में 50 लीटर क्षमता वाले बल्क मिल्क कूलर यानी बीएमसी लगाए जाएंगे। वहीं, हर गांव में डेटा मिल्क प्रोसेसिंग सेंटर यानी डीपीएमसी स्थापित करने की भी योजना है। इनका संचालन दुग्ध समितियों के जरिए कराया जाएगा। अभी तक जनपद में सिर्फ आठ ही बीएमसी संचालित हो रहे हैं। इसमें तीन बीएमसी के जरिए दूध खरीदकर सीधे मेरठ को भेजा जा रहा है। जिले में 22 नए बीएमसी और 235 डीपीएमसी खोलने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। पराग डेयरी के प्रभारी दुग्ध उत्पादन पप्पू यादव ने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पराग डेयरी लगभग बीस किलोमीटर के अंतर पर बीएमसी यानी बल्क सेंटर संचालित करने की योजना है। जिले में अभी सिर्फ आठ बीएमसी हैं, जिनमें तीन ही चल रहे हैं। अलापुर, उसावां और म्याऊ के पास गिल्टैया गांव में संचालित बीएमसी से पांच सौ से एक हजार लीटर दूध एकत्र करके सीधे मेरठ भेजा रहा है। फिलहाल शासन से 22 बीएमसी की और मांग की गई है। अप्रैल से इनको संचालित किए जाने की उम्मीद है। एक बीएमसी का बजट लगभग 15 लाख रुपये है। इसमें एक दूध ठंडा करने का टैंकर, एक जनरेटर सेट, चिलिंग मशीन, फेट निकालने की मशीन और अन्य उपकरण शामिल होते हैं। इसी तरह 235 डीपीएमसी लगाने की तैयारी की जा रही है। एक डीपीएमसी का खर्चा लगभग एक लाख रुपए आ रहा है। इसमें एक कंप्युटर, एक प्रिंटर, फेट मशीन, कांटा और अन्य उपकरण शामिल होंगे। ये समिति पंजीकृत दुग्ध समितियों के द्वारा संचालित कराये जायेंगे।
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जो किसान बीएमसी या डीपीएमसी पर दूध बेचेंगे। उनको बैंक खाते से जोड़ा जाएगा। उनका पैसा सीधे आठ दिन के अंतराल पर खातों में भेजा जाएगा। इसके अलावा पराग डेयरी को चलाने के लिए भी शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
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-पप्पू यादव, दुग्ध उत्पादन प्रभारी, पराग डेयरी