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Budaun News: ककराला बवाल के चार आरोपियों पर रासुका
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जलस्तर कम होने पर गंगा में नजर आते टापू।
गंगा किनारे की जमीनों पर कब्जे को लेकर बदायूं और कासगंज जिले के दबंगों में छिड़ी रहती है जंग
कब्जे से जुड़ी शिकायतों की फाइलों पर पुलिस की फिर से नजर, राजस्व विभाग भी सक्रिय
उझानी (बदायूं)। बरेली जिले के फरीदपुर क्षेत्र में कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर ट्रिपल मर्डर की घटना के बाद बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस का फोकस गंगा किनारे की जमीनों पर कब्जे की शिकायतों पर रहा। पुराने मामले में कब और क्या कार्रवाई हुई, इसकी हकीकत जानने के लिए रिकॉर्ड भी खंगाला गया। इसमें कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने कार्रवाई तो की है, लेकिन विवाद स्थलीय आधार पर बरकरार है।
करीब एक दशक के दौरान गंगा किनारे खाम और कटरी की जमीनों पर कब्जे के दर्जनों मामले सामने आए हैं। बहोरानगला, हुसैनपुर खेड़ा, चंदनपुर, पिपरौल पुख्ता समेत करीब आधा दर्जन ऐसे इलाके हैं, जहां के लोगों की जमीनों की हर साल पैमाइश होती रही है। जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले कछला के बहोरानगला और कासगंज जिले के गांव चंदवा के लोगों के बीच ऐसी ही जमीनों पर कब्जे को लेकर संघर्ष की नौबत आ गई थी।
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ब्रजेंद्र सिंह ने एक सौ से अधिक लोगों को मौके पर से गिरफ्तार कर उन्हें मुचलके पर पाबंद करा दिया था। इसके बाद भी बहोरानगला के आसपास खाम की जमीनों पर कब्जे को लेकर शिकायतें पुलिस और राजस्व विभाग के अफसरों के संज्ञान में आती रही हैं।
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यहां बता दें कि करीब डेढ़ दशक के दौरान जमीन के विवाद में तीन हत्याएं भी हो चुकी हैं। प्रत्येक पुराने मामले पर फोकस कर रही पुलिस ने ऐसे लोगों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जो कटरी की जमीनों पर कब्जे को लेकर विवाद की वजह बने हुए हैं। इन सभी के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी होगी। इसके बाद स्थलीय जांच के आधार पर मालिकाना हक तय होगा।
प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह का कहना है कि गंगा किनारे कटरी की जमीनों पर कब्जे का फिलहाल कोई नया मामला सामने नहीं आया है। पुराने मामलों की हकीकत पर गौर किया जा रहा है। जहां भी विवाद की आशंका है, उसे चिह्नित किया जा रहा है। विवादित जमीन सामने आती है तो उसकी नए सिरे से पैमाइश कराई जाएगी।
बाढ़ में बिगड़ जाता है गंगा और रामगंगा के किनारे का भूगोल
कटरी की जमीनों पर विवाद के मामले तो दातागंज, उसहैत और कादरचौक क्षेत्र में भी सामने आए हैं। उसहैत और कादरचौक गंगा से तो दातागंज और हजरतपुर इलाका रामगंगा की कटरी से जुड़ा हुआ है। गंगा किनारे की कटरी का कुछ इलाका फर्रुखाबाद से भी जुड़ा है। कटरी के लोगों के मुताबिक बाढ़ के दिनों में गंगा और रामगंगा किनारे का भूगोल बिगड़ जाता है। जलधारा जिस ओर बहे, उसी तरफ की जमीनें पानी में समां जाती हैं। अपनी जमीनों को खोजने की कोशिश के दौरान ही विवाद सामने आते हैं।
कटरी में पैमाइश हो तो खुल सकती है रसूखदारों की पोल
कछला में गंगा किनारे की जमीनों पर इन दिनों सर्वाधिक रकबा में सरसों की फसल लहलहा रही है। गन्ने की खेती भी बडे़ क्षेत्र में होती है। जमीनों पर कब्जे को लेकर जानकार बताते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास अभिलेखीय आधार पर 10-15 बीघा ही जमीन है, लेकिन कब्जा 40-50 बीघा में किए हुए हैं। ऐसे लोग राजनीतिक रसूखदार हैं। इनमें पड़ोसी जिला कासगंज के लोगों की संख्या भी कम नहीं है। कासगंज जिले के लोग दो-तीन बार गंगा पार आकर जमीनों पर कब्जे की कोशिश कर चुके हैं। अगर सही ढंग से पैमाइश हो जाए तो रसूखदारों की पोल भी खुल सकती है।
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कब्जे से जुड़ी शिकायतों की फाइलों पर पुलिस की फिर से नजर, राजस्व विभाग भी सक्रिय
उझानी (बदायूं)। बरेली जिले के फरीदपुर क्षेत्र में कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर ट्रिपल मर्डर की घटना के बाद बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस का फोकस गंगा किनारे की जमीनों पर कब्जे की शिकायतों पर रहा। पुराने मामले में कब और क्या कार्रवाई हुई, इसकी हकीकत जानने के लिए रिकॉर्ड भी खंगाला गया। इसमें कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने कार्रवाई तो की है, लेकिन विवाद स्थलीय आधार पर बरकरार है।
करीब एक दशक के दौरान गंगा किनारे खाम और कटरी की जमीनों पर कब्जे के दर्जनों मामले सामने आए हैं। बहोरानगला, हुसैनपुर खेड़ा, चंदनपुर, पिपरौल पुख्ता समेत करीब आधा दर्जन ऐसे इलाके हैं, जहां के लोगों की जमीनों की हर साल पैमाइश होती रही है। जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले कछला के बहोरानगला और कासगंज जिले के गांव चंदवा के लोगों के बीच ऐसी ही जमीनों पर कब्जे को लेकर संघर्ष की नौबत आ गई थी।
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तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ब्रजेंद्र सिंह ने एक सौ से अधिक लोगों को मौके पर से गिरफ्तार कर उन्हें मुचलके पर पाबंद करा दिया था। इसके बाद भी बहोरानगला के आसपास खाम की जमीनों पर कब्जे को लेकर शिकायतें पुलिस और राजस्व विभाग के अफसरों के संज्ञान में आती रही हैं।
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यहां बता दें कि करीब डेढ़ दशक के दौरान जमीन के विवाद में तीन हत्याएं भी हो चुकी हैं। प्रत्येक पुराने मामले पर फोकस कर रही पुलिस ने ऐसे लोगों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जो कटरी की जमीनों पर कब्जे को लेकर विवाद की वजह बने हुए हैं। इन सभी के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी होगी। इसके बाद स्थलीय जांच के आधार पर मालिकाना हक तय होगा।
प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह का कहना है कि गंगा किनारे कटरी की जमीनों पर कब्जे का फिलहाल कोई नया मामला सामने नहीं आया है। पुराने मामलों की हकीकत पर गौर किया जा रहा है। जहां भी विवाद की आशंका है, उसे चिह्नित किया जा रहा है। विवादित जमीन सामने आती है तो उसकी नए सिरे से पैमाइश कराई जाएगी।
बाढ़ में बिगड़ जाता है गंगा और रामगंगा के किनारे का भूगोल
कटरी की जमीनों पर विवाद के मामले तो दातागंज, उसहैत और कादरचौक क्षेत्र में भी सामने आए हैं। उसहैत और कादरचौक गंगा से तो दातागंज और हजरतपुर इलाका रामगंगा की कटरी से जुड़ा हुआ है। गंगा किनारे की कटरी का कुछ इलाका फर्रुखाबाद से भी जुड़ा है। कटरी के लोगों के मुताबिक बाढ़ के दिनों में गंगा और रामगंगा किनारे का भूगोल बिगड़ जाता है। जलधारा जिस ओर बहे, उसी तरफ की जमीनें पानी में समां जाती हैं। अपनी जमीनों को खोजने की कोशिश के दौरान ही विवाद सामने आते हैं।
कटरी में पैमाइश हो तो खुल सकती है रसूखदारों की पोल
कछला में गंगा किनारे की जमीनों पर इन दिनों सर्वाधिक रकबा में सरसों की फसल लहलहा रही है। गन्ने की खेती भी बडे़ क्षेत्र में होती है। जमीनों पर कब्जे को लेकर जानकार बताते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास अभिलेखीय आधार पर 10-15 बीघा ही जमीन है, लेकिन कब्जा 40-50 बीघा में किए हुए हैं। ऐसे लोग राजनीतिक रसूखदार हैं। इनमें पड़ोसी जिला कासगंज के लोगों की संख्या भी कम नहीं है। कासगंज जिले के लोग दो-तीन बार गंगा पार आकर जमीनों पर कब्जे की कोशिश कर चुके हैं। अगर सही ढंग से पैमाइश हो जाए तो रसूखदारों की पोल भी खुल सकती है।