{"_id":"6165dfa98ebc3e05e6219de4","slug":"ramleela-badaun-news-bly462718526","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामलीला : श्रीराम ने तोड़ा शंकर का धनुष, सीता ने पहनाई वरमाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलीला : श्रीराम ने तोड़ा शंकर का धनुष, सीता ने पहनाई वरमाला
विज्ञापन
रामलीला का करते कलाकार। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। गांधी ग्राउंड पर चल रहे रामलीला महोत्सव में मंगलवार को सीता स्वयंवर की लीला का मंचन किया गया। बिहार के कलाकारों ने धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, श्री लक्ष्मण-भगवान परशुराम संवाद का मंचन का दर्शकों का मनमोह लिया। इस दौरान काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
मंचन में कलाकारों ने दिखाया के राजा जनक पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। जिसमें हिस्सा लेने के लिए कई देशों से राजकुमार और राजा पहुंचते हैं। राजा जनक कहते हैं कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा उसी के गले में सीता वरमाला डालेंगी। स्वयंवर में कई वीर धनुष तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। अंत में भगवान श्रीराम गुरु विश्वमित्र की आज्ञा पाकर धनुष तोड़ देते हैं और सीताजी उनके गले में वरमाला डाल देतीं हैं। धनुष टूटते ही क्रोध से तमतमाते हुए भगवान परशुराम वहां पहुंचते है। इसके बाद लक्ष्मण और भगवान परशुराम के बीच संवाद होता है। श्रीराम-सीता विवाह होने के बाद पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठता है।
------------
रामबरात की नहीं मिली अनुमति
राम बरात का आयोजन 14 अक्तूबर बुधवार को किया जाना था। इसके लिए श्री रामलीला महोत्सव कमेटी को अलग से प्रशासनिक अनुमति लेनी थी। इसके लिए कई दिन पहले प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी लेकिन मंगलवार शाम तक रामबरात के आयोजन की अनुमति न मिलने के कारण आयोजन निरस्त कर दिया गया। कमेटी के मंत्री अरविंद कांत ने इस आशय की जानकारी दी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
मंचन में कलाकारों ने दिखाया के राजा जनक पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। जिसमें हिस्सा लेने के लिए कई देशों से राजकुमार और राजा पहुंचते हैं। राजा जनक कहते हैं कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा उसी के गले में सीता वरमाला डालेंगी। स्वयंवर में कई वीर धनुष तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। अंत में भगवान श्रीराम गुरु विश्वमित्र की आज्ञा पाकर धनुष तोड़ देते हैं और सीताजी उनके गले में वरमाला डाल देतीं हैं। धनुष टूटते ही क्रोध से तमतमाते हुए भगवान परशुराम वहां पहुंचते है। इसके बाद लक्ष्मण और भगवान परशुराम के बीच संवाद होता है। श्रीराम-सीता विवाह होने के बाद पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठता है।
विज्ञापन
------------
रामबरात की नहीं मिली अनुमति
राम बरात का आयोजन 14 अक्तूबर बुधवार को किया जाना था। इसके लिए श्री रामलीला महोत्सव कमेटी को अलग से प्रशासनिक अनुमति लेनी थी। इसके लिए कई दिन पहले प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी लेकिन मंगलवार शाम तक रामबरात के आयोजन की अनुमति न मिलने के कारण आयोजन निरस्त कर दिया गया। कमेटी के मंत्री अरविंद कांत ने इस आशय की जानकारी दी। संवाद
विज्ञापन