{"_id":"66c28434479a9146cc0657f4","slug":"rakshabandhan-was-celebrated-on-sunday-in-14-villages-of-kadar-chowk-badaun-news-c-123-1-sbly1001-124364-2024-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: कादरचौक के 14 गांव में रविवार को मनाया गया रक्षाबंधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: कादरचौक के 14 गांव में रविवार को मनाया गया रक्षाबंधन
विज्ञापन
कादरचौक में भाई को राखी बांधती बहन। संवाद
कादरचौक। रक्षाबंधन रविवार को क्षेत्र के 14 गांव में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों के हाथों पर रक्षा कवच राखी बांधी। साथ ही उनको मिठाई खिलाई। भाइयों ने बहनों को गिफ्ट दिए।
तहसील सदर के ब्लॉक कादरचौक में वैसे तो 170 गांव आते हैं, लेकिन इनमें से 14 गांव ऐसे हैं जहां हर साल रक्षाबंधन एक दिन पहले मनाया जाता है। रविवार सुबह से ही बहनों का अपने भाइयों के घरों पर पहुंचना शुरू हो गया। रक्षाबंधन की वजह से कस्बे में दुकानों पर काफी भीड़ रही। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदी। इसके बाद कादरचौक, लभारी, चौडेरा, मामूरगंज, गढिया, ततारपुर, कचौरा, देवी नगला, सिसौरा, गनेश नगला, कलुआ नगला, किशूपरा, कैथुलिया, कैथोला में रक्षाबंधन मनाया गया। शाम को सावन के गीतों के साथ भुजरियों को सिराने की रस्म निभाई।
बताया जाता है कि यहां 1182 ईसवीं में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था। तब यह क्षेत्र महोबा में शामिल था। उस समय महोबा पर चंदेल शासक परमाल का राज था। उनकी रानी चंद्रबली ने मुंहबोले भाई आल्हा से अपनी व राज्य की सुरक्षा की मांग की। लड़ाई रक्षाबंधन वाले दिन होनी तय थी। ऐसे में आल्हा ने अपने अधीन आने वाले 14 गांवों में एक दिन पहले ही रक्षाबंधन मनाने की घोषणा कर दी और अगले दिन युद्ध में शामिल होने चले गए। तभी से इन 14 गांवों में हर साल रक्षाबंधन एक दिन पहले मनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तहसील सदर के ब्लॉक कादरचौक में वैसे तो 170 गांव आते हैं, लेकिन इनमें से 14 गांव ऐसे हैं जहां हर साल रक्षाबंधन एक दिन पहले मनाया जाता है। रविवार सुबह से ही बहनों का अपने भाइयों के घरों पर पहुंचना शुरू हो गया। रक्षाबंधन की वजह से कस्बे में दुकानों पर काफी भीड़ रही। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदी। इसके बाद कादरचौक, लभारी, चौडेरा, मामूरगंज, गढिया, ततारपुर, कचौरा, देवी नगला, सिसौरा, गनेश नगला, कलुआ नगला, किशूपरा, कैथुलिया, कैथोला में रक्षाबंधन मनाया गया। शाम को सावन के गीतों के साथ भुजरियों को सिराने की रस्म निभाई।
विज्ञापन
बताया जाता है कि यहां 1182 ईसवीं में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था। तब यह क्षेत्र महोबा में शामिल था। उस समय महोबा पर चंदेल शासक परमाल का राज था। उनकी रानी चंद्रबली ने मुंहबोले भाई आल्हा से अपनी व राज्य की सुरक्षा की मांग की। लड़ाई रक्षाबंधन वाले दिन होनी तय थी। ऐसे में आल्हा ने अपने अधीन आने वाले 14 गांवों में एक दिन पहले ही रक्षाबंधन मनाने की घोषणा कर दी और अगले दिन युद्ध में शामिल होने चले गए। तभी से इन 14 गांवों में हर साल रक्षाबंधन एक दिन पहले मनाया जाता है।

कादरचौक में भाई को राखी बांधती बहन। संवाद

कादरचौक में भाई को राखी बांधती बहन। संवाद
विज्ञापन