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Budaun News: जंगलकांड के बाद उघैती थाने की बीट पुलिसिंग पर उठे सवाल
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बदायूं। उघैती थाना क्षेत्र के शरह बरौलिया गांव के जंगल में 17 सितंबर को प्रेमी-युगल के साथ हुई घटना के मामले में अब थाने की बीट पुलिसिंग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद सात दिन तक पुलिस को भनक तक नहीं लग सकी। आठवें दिन घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और तीन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कर जेल भेजा, जबकि एक नामजद जीतेश और अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस अब तक नहीं कर सकी। इससे थाना स्तर पर गांवों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी के लिए जिम्मेदार बीट पुलिसिंग की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर की घटना के आठ दिन बाद 24 सितंबर को युवती के साथ बर्बरता का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस को घटना की जानकारी हुई। एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी, एसएसपी अंकिता शर्मा ने घटना स्थल का निरीक्षण किया था। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर सात-आठ लोगों के एकत्र होने और प्रेमी-युगल के साथ घटना हुई थी, वहां की गतिविधियों की जानकारी स्थानीय स्तर पर पुलिस को नहीं मिल सकी।
बीट पुलिस कर्मियों की जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के गांवों में पुलिस और ग्रामीणों के बीच संपर्क बनाए रखने, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने और संवेदनशील स्थानों पर नजर रखने की होती है। ऐसे में घटना के बाद कई दिनों तक जानकारी नहीं मिलना बीट व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना के बाद सात दिनों तक स्थानीय स्तर पर पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी।
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नामजद और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। - अंकिता शर्मा, एसएसपी
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पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर की घटना के आठ दिन बाद 24 सितंबर को युवती के साथ बर्बरता का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस को घटना की जानकारी हुई। एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी, एसएसपी अंकिता शर्मा ने घटना स्थल का निरीक्षण किया था। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर सात-आठ लोगों के एकत्र होने और प्रेमी-युगल के साथ घटना हुई थी, वहां की गतिविधियों की जानकारी स्थानीय स्तर पर पुलिस को नहीं मिल सकी।
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बीट पुलिस कर्मियों की जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के गांवों में पुलिस और ग्रामीणों के बीच संपर्क बनाए रखने, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने और संवेदनशील स्थानों पर नजर रखने की होती है। ऐसे में घटना के बाद कई दिनों तक जानकारी नहीं मिलना बीट व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना के बाद सात दिनों तक स्थानीय स्तर पर पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी।
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नामजद और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। - अंकिता शर्मा, एसएसपी