{"_id":"6abaca3e710c83694d02286c","slug":"20-villages-in-the-hazratpur-and-nagaria-khanu-areas-are-surrounded-by-water-badaun-news-c-123-1-bdn1010-174218-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: हजरतपुर और नगरिया खनू क्षेत्र के 20 गांव पानी से घिरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: हजरतपुर और नगरिया खनू क्षेत्र के 20 गांव पानी से घिरे
विज्ञापन
रामगंगा से घिरे सकतपुर गांव में भरा पानी। संवाद
दातागंज। रामगंगा में जलस्तर बढ़ते ही बाढ़ चौकी हजरतपुर और नगरिया खनू के करीब 20 गांव पानी से घिर गए हैं। सकतपुर गांव के अंदर घरों में पानी प्रवेश कर गया। इसी गांव में जलभराव और बरसात की वजह से 12 से अधिक मकान भी गिर गए हैं।
हजरतपुर, गढ़िया रंगीन, नगरिया खनू के अलावा कुनिया बक्सेना, हरे नगला, गढ़िया, शाहपुर आदि मार्गों पर जलभराव की वजह से आवागमन ठप है। सर्वाधिक संवेदनशील गांव सकतपुर है, जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। आने-जाने का एकमात्र रास्ता नाव ही है। नाव तक जाने और उतरकर मुख्य मार्ग तक आने में करीब 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
रविवार को एडीएम महेंद्र श्रीवास्तव और एसडीएम विनोद कुमार सिंह ने सुरक्षा की दृष्टि से सकतपुर गांव के लोगों को हजरतपुर राहत कैंप में लाने को कहा था, लेकिन फिलहाल दो दिनों तक ये लोग गांव में ही रहेंगे।
विज्ञापन
बाढ़ का पानी इस गांव में घरों तक घुस आया है। संतराम, ऋषिपाल, जयपाल, नेतराम, रामप्रकाश, रामबहादुर, रामबरन, मानसिंह, मुन्नालाल और हिंदपाल के घरों के अंदर अथवा दरवाजे तक पानी पहुंच गया है। जलभराव और अतिवृष्टि से मानसिंह, रामबरन, शिवपाल, रामभजन, रघुवीर, बाबूराम, रविंद्र, चरण सिंह, जय सिंह, जयवीर और ध्यानपाल के मकान ढह चुके हैं।
हजरतपुर से गढ़िया रंगीन जाने वाले लोग वापस हो रहे हैं। आपात स्थिति में लोग दातागंज से होकर बेलाडांडी पुल से होते हुए गढ़िया रंगीन जा रहे हैं। हजरतपुर से सीधे गढ़िया रंगीन जाने के लिए मात्र 12 किलोमीटर जाना पड़ेगा, लेकिन बेलाडांडी पुल से घूमकर जाने में 55 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
--
रपटा पुलों के ऊपर चार से पांच फुट तक बह रहा पानी
बक्सेना गांव के पास और हरे नगला गढ़िया शाहपुर के बीच में बने रपटा पुलों के ऊपर चार से पांच फुट तक पानी बह रहा है। जो लोग तैरना जानते हैं, इन रास्तों से आ-जा रहे हैं। इन दोनों पुलों पर करीब 50 गांव के लोगों का आवागमन रहता था।
-- -
रामगंगा के वेग में बह गई प्रशासन की एक नाव
दातागंज सकतपुर गांव के लोगों को सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने दो नावें लगा दी थीं। दो दिन पूर्व एक नाव रामगंगा की तेजधार में बह गई। गांव वालों ने दूसरी नाव से कई किलोमीटर तक इस नाव को खोजा, लेकिन नाव नहीं मिली। अब एक निजी और एक प्रशासन की नाव से ही आवागमन हो रहा है।
विज्ञापन
हजरतपुर, गढ़िया रंगीन, नगरिया खनू के अलावा कुनिया बक्सेना, हरे नगला, गढ़िया, शाहपुर आदि मार्गों पर जलभराव की वजह से आवागमन ठप है। सर्वाधिक संवेदनशील गांव सकतपुर है, जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। आने-जाने का एकमात्र रास्ता नाव ही है। नाव तक जाने और उतरकर मुख्य मार्ग तक आने में करीब 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
विज्ञापन
रविवार को एडीएम महेंद्र श्रीवास्तव और एसडीएम विनोद कुमार सिंह ने सुरक्षा की दृष्टि से सकतपुर गांव के लोगों को हजरतपुर राहत कैंप में लाने को कहा था, लेकिन फिलहाल दो दिनों तक ये लोग गांव में ही रहेंगे।
विज्ञापन
बाढ़ का पानी इस गांव में घरों तक घुस आया है। संतराम, ऋषिपाल, जयपाल, नेतराम, रामप्रकाश, रामबहादुर, रामबरन, मानसिंह, मुन्नालाल और हिंदपाल के घरों के अंदर अथवा दरवाजे तक पानी पहुंच गया है। जलभराव और अतिवृष्टि से मानसिंह, रामबरन, शिवपाल, रामभजन, रघुवीर, बाबूराम, रविंद्र, चरण सिंह, जय सिंह, जयवीर और ध्यानपाल के मकान ढह चुके हैं।
हजरतपुर से गढ़िया रंगीन जाने वाले लोग वापस हो रहे हैं। आपात स्थिति में लोग दातागंज से होकर बेलाडांडी पुल से होते हुए गढ़िया रंगीन जा रहे हैं। हजरतपुर से सीधे गढ़िया रंगीन जाने के लिए मात्र 12 किलोमीटर जाना पड़ेगा, लेकिन बेलाडांडी पुल से घूमकर जाने में 55 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
रपटा पुलों के ऊपर चार से पांच फुट तक बह रहा पानी
बक्सेना गांव के पास और हरे नगला गढ़िया शाहपुर के बीच में बने रपटा पुलों के ऊपर चार से पांच फुट तक पानी बह रहा है। जो लोग तैरना जानते हैं, इन रास्तों से आ-जा रहे हैं। इन दोनों पुलों पर करीब 50 गांव के लोगों का आवागमन रहता था।
रामगंगा के वेग में बह गई प्रशासन की एक नाव
दातागंज सकतपुर गांव के लोगों को सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने दो नावें लगा दी थीं। दो दिन पूर्व एक नाव रामगंगा की तेजधार में बह गई। गांव वालों ने दूसरी नाव से कई किलोमीटर तक इस नाव को खोजा, लेकिन नाव नहीं मिली। अब एक निजी और एक प्रशासन की नाव से ही आवागमन हो रहा है।

रामगंगा से घिरे सकतपुर गांव में भरा पानी। संवाद