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घायल को रख दिया मोरचरी में, तोड़ दिया दम
बदायूं।
Updated Thu, 18 Feb 2016 11:06 PM IST
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घायल के इलाज में जिला अस्पताल स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। परिवार वालों का आरोप है कि डॉक्टरों ने उसे जिंदा हालत में ही मोरचरी भेज दिया। वहां उसकी सांसे थम गईं। परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन आरोपों को निराधार बता रहा है।
उघैती निवासी वाहिद (22) पुत्र जाहिर बुधवार रात बाइक से अपने घर लौट रहा था। रास्ते में बिल्सी-उघैती रोड पर गांव फतेह नगला के पास उसकी बाइक सामने से आ रही बाइक से टकरा गई। हादसे में वाहिद और दूसरी बाइक पर सवार इस्लामनगर थाने के गांव रुदायन निवासी बबलू गंभीर घायल हो गए। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया। यहां से दोनों को बरेली रेफर कर दिया गया। बबलू के परिवार वाले उसे बरेली ले गए। वाहिद के परिवार वाले एंबुलेंस तलाश कर रहे थे। आरोप है कि जब वह एंबुलेंस लेकर आए तो वाहिद इमरजेंसी में नहीं मिला।
परिवार वालों ने जब वाहिद के बारे में पता किया तो मालूम हुआ कि उसे मॉरचरी की ओर ले जाया गया है। जब वह वहां पहुंचे, तब तक वाहिद की मौत हो चुकी थी। पिता जाहिद और भाई सोएब ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही करने और जिंदा हालत में ही वाहिद को मॉरचरी भेजने का आरोप लगाया है।
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आरोप मनगढ़ंत हैं। वाहिद गंभीर घायल था, उसकी मौत हो चुकी थी। उसके बाद ही उसे मॉरचरी भेजा गया था। जिंदा हालत में किसी को कैसे मॉरचरी में रखा जा सकता है। ये कहना एकदम बात गलत है।
-डॉ. शशि कुमार अग्निहोत्री, सीएमएस
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उघैती निवासी वाहिद (22) पुत्र जाहिर बुधवार रात बाइक से अपने घर लौट रहा था। रास्ते में बिल्सी-उघैती रोड पर गांव फतेह नगला के पास उसकी बाइक सामने से आ रही बाइक से टकरा गई। हादसे में वाहिद और दूसरी बाइक पर सवार इस्लामनगर थाने के गांव रुदायन निवासी बबलू गंभीर घायल हो गए। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया। यहां से दोनों को बरेली रेफर कर दिया गया। बबलू के परिवार वाले उसे बरेली ले गए। वाहिद के परिवार वाले एंबुलेंस तलाश कर रहे थे। आरोप है कि जब वह एंबुलेंस लेकर आए तो वाहिद इमरजेंसी में नहीं मिला।
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परिवार वालों ने जब वाहिद के बारे में पता किया तो मालूम हुआ कि उसे मॉरचरी की ओर ले जाया गया है। जब वह वहां पहुंचे, तब तक वाहिद की मौत हो चुकी थी। पिता जाहिद और भाई सोएब ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही करने और जिंदा हालत में ही वाहिद को मॉरचरी भेजने का आरोप लगाया है।
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आरोप मनगढ़ंत हैं। वाहिद गंभीर घायल था, उसकी मौत हो चुकी थी। उसके बाद ही उसे मॉरचरी भेजा गया था। जिंदा हालत में किसी को कैसे मॉरचरी में रखा जा सकता है। ये कहना एकदम बात गलत है।
-डॉ. शशि कुमार अग्निहोत्री, सीएमएस