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जीएसटी कोड न मिलने से फंसी दवाओं की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:53 PM IST
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gst
- फोटो : सोशल मीडिया
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एक महीने से नहीं हुई दवा की खरीद
जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत होने लगी है। संक्रामक बीमारियों के मौसम में वायरल, खांसी-जुकाम, मलेरिया और टायफाइड बुखार के मरीजों की तादाद में इजाफा के बीच दवाओं की किल्लत साफ दिख रही है। जीएसटी लागू होने के बाद करीब एक महीने से स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की खरीद नहीं की है। अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में ही रोज 1200 से 1500 मरीज पहुंच रहे हैं।
जीएसटी को लागू हुए करीब एक महीना बीत चुका है। इसके तहत अगर साल में कोई भी 20 लाख रुपये से ज्यादा की खरीद-फरोख्त करता है तो उसे जीएसटी पंजीकरण कराना होगा। स्वास्थ्य विभाग साल में इससे कहीं ज्यादा की दवाएं खरीदता है। जीएसटी के तहत सरकारी विभागों को भी पंजीकरण करना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग को अब तक जीएसटी कोड नहीं मिल सका है। ऐसे में दवाओं की खरीद भी फंसी हुई है। जिले में 12 जीएचसी, पांच पीएचसी, 43 न्यू पीएचसी समेत जिला और जिला महिला अस्पतालों के साथ सखानू, सैदपुर और इस्लामनगर में महिला अस्पताल भी हैं। जिला और जिला महिला अस्पताल को छोड़कर बाकी के सभी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई मुख्यालय से की जाती है। एक महीने से दवा खरीद न होने और संक्रामक बीमारियों के सीजन में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की वजह से दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। इससे अस्पतालों में दवाओं की किल्लत देखने को मिल रही है।
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जीएसटी कोड मिलने के बाद ही दवाओं की खरीद हो सकेगी। करीब एक महीने से दवा खरीद न होने की वजह से कुछ दवाओं का अभाव भी हो गया है। उम्मीद है कि जीएसटी कोड जल्द मिल जाएगी।
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-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत होने लगी है। संक्रामक बीमारियों के मौसम में वायरल, खांसी-जुकाम, मलेरिया और टायफाइड बुखार के मरीजों की तादाद में इजाफा के बीच दवाओं की किल्लत साफ दिख रही है। जीएसटी लागू होने के बाद करीब एक महीने से स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की खरीद नहीं की है। अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में ही रोज 1200 से 1500 मरीज पहुंच रहे हैं।
जीएसटी को लागू हुए करीब एक महीना बीत चुका है। इसके तहत अगर साल में कोई भी 20 लाख रुपये से ज्यादा की खरीद-फरोख्त करता है तो उसे जीएसटी पंजीकरण कराना होगा। स्वास्थ्य विभाग साल में इससे कहीं ज्यादा की दवाएं खरीदता है। जीएसटी के तहत सरकारी विभागों को भी पंजीकरण करना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग को अब तक जीएसटी कोड नहीं मिल सका है। ऐसे में दवाओं की खरीद भी फंसी हुई है। जिले में 12 जीएचसी, पांच पीएचसी, 43 न्यू पीएचसी समेत जिला और जिला महिला अस्पतालों के साथ सखानू, सैदपुर और इस्लामनगर में महिला अस्पताल भी हैं। जिला और जिला महिला अस्पताल को छोड़कर बाकी के सभी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई मुख्यालय से की जाती है। एक महीने से दवा खरीद न होने और संक्रामक बीमारियों के सीजन में मरीजों की संख्या में इजाफा होने की वजह से दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। इससे अस्पतालों में दवाओं की किल्लत देखने को मिल रही है।
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जीएसटी कोड मिलने के बाद ही दवाओं की खरीद हो सकेगी। करीब एक महीने से दवा खरीद न होने की वजह से कुछ दवाओं का अभाव भी हो गया है। उम्मीद है कि जीएसटी कोड जल्द मिल जाएगी।
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-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ