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शहर में रुक नहीं पा रही,...गांवों में एबीसी केबल लगाकर रोंकेंगे बिजली चोरी
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बदायूं। बिजली चोरी रोकने के लिए पावर कारपोरेशन द्वारा देहात क्षेत्र में एबीसी केबल लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके पीछे विभाग का मानना है कि बिजली चोरी रुकेगी, तो विभाग को राजस्व का फायदा होगा। निर्देश मिलने के बाद गांवों में एबीसी केबल लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है, लेकिन सवाल यह उठता है कि अभी तो शहर में ही पूरी तरह से बिजली चोरी नहीं रुक पायी है, तो फिर सिर्फ एबीसी केबल डालकर देहात में विभाग किस तरह बिजली चोरी रोक सकेगा।
पावर कारपोरेशन की तरफ से सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि वह अपने यहां जनपद में उन गांवों का चयन करें, जिन गांवों की आबादी एक हजार से ज्यादा है। साथ ही उन गांवों में विद्युत तारों की क्या स्थिति है। अगर उन गांवों में तारों की स्थिति खराब हो, तो वहां पुराने तारों को हटाकर एबीसी केबल डाला जाए। लखनऊ स्तर से निर्देश मिलने के बाद में जिला स्तर पर काम शुरू किया गया। विभाग द्वारा 718 गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में 1185 किलोमीटर तार का बदलाव किया जाएगा। विभाग के अनुसार इन गांवों में एबीसी केबल डालने के बाद में वहां के करीब दो लाख 25 हजार परिवारों को शेड्यूल के मुताबिक बिजली मुहैया हो पाएगी। इसके पीछे विभाग की मंशा है कि गांवों में जो बिजली चोरी हो रही है, उस पर लगाम लग सके। पर, इस कवायद के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब शहर में पावर कॉरपोरेशन पूरी तरह से बिजली चोरी नहीं रोक पाया है, तो देहात क्षेत्र में वह किसी तरह से बिजली चोरी रोकेगा
- बिजली चोरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में वर्ष 2019 में 664 लोगों पर बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज की गई। यह तो वह मामले थे जो पकड़ में आ गए और विभाग ने कार्रवाई कर दी, जबकि न जाने ऐसे कितने मामले हैं जो विभाग की पकड़ में ही नहीं आते और बिजली चोरी होती रहती है। जनवरी से लेकर दिसंबर-19 तक पावर कारपोरेशन द्वारा धारा 135 और धारा 138 बी के तहत 664 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। ऐसे में केवल एबीसी केबल डालकर देहात में बिजली चोरी रोकने का विभाग का तर्क भी समझ से परे है।
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-पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली चोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। उनके द्वारा बिजली चोरों को पकड़कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती है। अमूमन देखने को मिला है कि थानों में व्यस्तता के चलते बिजली चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। ऐसे में पावर कारपोरेशन ने सभी जिलों में बिजली से संबंधित एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के लिए अलग से थाना खोलने के निर्देश दिए। इसके बाद में बदायूं जिला मुख्यालय पर बिजली थाना करीब चार माह पहले खोल दिया, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से यहां चार माह बाद भी एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।
विभाग के द्वारा 718 मझरो का चयन किया जा गया हैं।, जहां पर पुराने तारों को हटाकर एबीसी केबल डाली जाएगी। इससे पुराने तार टूटने का झंझट भी खत्म हो जाएगा, साथ ही चोरी की घटनाएं भी कम हो जाएंगी।
-राजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता
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पावर कारपोरेशन की तरफ से सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि वह अपने यहां जनपद में उन गांवों का चयन करें, जिन गांवों की आबादी एक हजार से ज्यादा है। साथ ही उन गांवों में विद्युत तारों की क्या स्थिति है। अगर उन गांवों में तारों की स्थिति खराब हो, तो वहां पुराने तारों को हटाकर एबीसी केबल डाला जाए। लखनऊ स्तर से निर्देश मिलने के बाद में जिला स्तर पर काम शुरू किया गया। विभाग द्वारा 718 गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में 1185 किलोमीटर तार का बदलाव किया जाएगा। विभाग के अनुसार इन गांवों में एबीसी केबल डालने के बाद में वहां के करीब दो लाख 25 हजार परिवारों को शेड्यूल के मुताबिक बिजली मुहैया हो पाएगी। इसके पीछे विभाग की मंशा है कि गांवों में जो बिजली चोरी हो रही है, उस पर लगाम लग सके। पर, इस कवायद के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब शहर में पावर कॉरपोरेशन पूरी तरह से बिजली चोरी नहीं रोक पाया है, तो देहात क्षेत्र में वह किसी तरह से बिजली चोरी रोकेगा
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- बिजली चोरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में वर्ष 2019 में 664 लोगों पर बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज की गई। यह तो वह मामले थे जो पकड़ में आ गए और विभाग ने कार्रवाई कर दी, जबकि न जाने ऐसे कितने मामले हैं जो विभाग की पकड़ में ही नहीं आते और बिजली चोरी होती रहती है। जनवरी से लेकर दिसंबर-19 तक पावर कारपोरेशन द्वारा धारा 135 और धारा 138 बी के तहत 664 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। ऐसे में केवल एबीसी केबल डालकर देहात में बिजली चोरी रोकने का विभाग का तर्क भी समझ से परे है।
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-पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली चोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। उनके द्वारा बिजली चोरों को पकड़कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती है। अमूमन देखने को मिला है कि थानों में व्यस्तता के चलते बिजली चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। ऐसे में पावर कारपोरेशन ने सभी जिलों में बिजली से संबंधित एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के लिए अलग से थाना खोलने के निर्देश दिए। इसके बाद में बदायूं जिला मुख्यालय पर बिजली थाना करीब चार माह पहले खोल दिया, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से यहां चार माह बाद भी एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।
विभाग के द्वारा 718 मझरो का चयन किया जा गया हैं।, जहां पर पुराने तारों को हटाकर एबीसी केबल डाली जाएगी। इससे पुराने तार टूटने का झंझट भी खत्म हो जाएगा, साथ ही चोरी की घटनाएं भी कम हो जाएंगी।
-राजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता