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दातागंजः लड़ाई भाजपा-सपा में, हार-जीत कम वोटों में
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बदायूं। दातागंज सीट को लेकर भी जिले भर में कयास लगाए जा रहे हैं, यहां मुख्य मुकाबला भाजपा व सपा के बीच है।
दातागंज विधानसभा सीट से विधायक लगातार दो बार जीतते रहे हैं। स्व. संतोष कुमारी पाठक, वयोवृद्ध भाजपा नेता अवनीश सिंह व सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल यादव के साथ ऐसी स्थिति रही। यहां तक कि वर्ष 2007 व 2012 का चुनाव बसपा के सिनोद शाक्य लगातार जीते थे। उनसे 2017 में भाजपा के राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भैया ने सीट छीन ली। पुराने इतिहास के लिहाज से माना जा रहा है कि बब्बू परंपरा कायम रख सकते हैं। वह खुद अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। वह कहते हैं कि भाजपा के साथ ही बसपा व अन्य दलों के खाते का वोट भी फूल पर गया है तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता।
इधर, सपा ने जिपं की राजनीति से जुड़े चौधरी राजेश्वर सिंह के परिवार पर भरोसा जताया था। कैप्टन अर्जुन सिंह को यहां से टिकट मिला और वह जबर्दस्त लड़े भी हैं। उनके पिता चौधरी नरेश प्रताप सिंह कहते हैं कि कैप्टन रिकॉर्ड वोटों से जीत रहे हैं।
बसपा के रचित वैश्य अपनी जीत के प्रति आश्वस्त लगते हैं। वह कहते हैं कि दूसरे प्रत्याशियों की तरह शोर नहीं मचाते हैं। बसपा के वोट बैंक के साथ ही उनके साथ निजी रूप से जुड़ा वोट के साथ पिता की किसान नेता की पृष्ठभूमि उन्हें जिता रही है। कांग्रेस के प्रत्याशी आतिफ खां किसान नेता रहे हैं। शुरू में उन्हें काफी दमदार प्रत्याशी माना जा रहा था पर मौजूदा दौर में लग रही शर्तों व आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस जिले में दूसरी सीटों के मुकाबले यहां भी पिछड़ रही है। तमाम लोग कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देना चाहते थे पर दो दलों के आमने सामने के मुकाबले में उन्होंने एक पाला चुना है। संवाद
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दातागंज विधानसभा सीट से विधायक लगातार दो बार जीतते रहे हैं। स्व. संतोष कुमारी पाठक, वयोवृद्ध भाजपा नेता अवनीश सिंह व सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल यादव के साथ ऐसी स्थिति रही। यहां तक कि वर्ष 2007 व 2012 का चुनाव बसपा के सिनोद शाक्य लगातार जीते थे। उनसे 2017 में भाजपा के राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भैया ने सीट छीन ली। पुराने इतिहास के लिहाज से माना जा रहा है कि बब्बू परंपरा कायम रख सकते हैं। वह खुद अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। वह कहते हैं कि भाजपा के साथ ही बसपा व अन्य दलों के खाते का वोट भी फूल पर गया है तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता।
इधर, सपा ने जिपं की राजनीति से जुड़े चौधरी राजेश्वर सिंह के परिवार पर भरोसा जताया था। कैप्टन अर्जुन सिंह को यहां से टिकट मिला और वह जबर्दस्त लड़े भी हैं। उनके पिता चौधरी नरेश प्रताप सिंह कहते हैं कि कैप्टन रिकॉर्ड वोटों से जीत रहे हैं।
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बसपा के रचित वैश्य अपनी जीत के प्रति आश्वस्त लगते हैं। वह कहते हैं कि दूसरे प्रत्याशियों की तरह शोर नहीं मचाते हैं। बसपा के वोट बैंक के साथ ही उनके साथ निजी रूप से जुड़ा वोट के साथ पिता की किसान नेता की पृष्ठभूमि उन्हें जिता रही है। कांग्रेस के प्रत्याशी आतिफ खां किसान नेता रहे हैं। शुरू में उन्हें काफी दमदार प्रत्याशी माना जा रहा था पर मौजूदा दौर में लग रही शर्तों व आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस जिले में दूसरी सीटों के मुकाबले यहां भी पिछड़ रही है। तमाम लोग कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देना चाहते थे पर दो दलों के आमने सामने के मुकाबले में उन्होंने एक पाला चुना है। संवाद
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