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पिछली बार थे मैदान में, इस बार पर्दे के पीछे से चाल चलेंगे छह पूर्व विधायक

Sun, 30 Jan 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 12:45 AM IST
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बदायूं। लोकसभा से लेकर पंचायत चुनावों तक दखल रखने वाले छह पूर्व विधायक इस विधानसभा चुनाव में पर्दे के पीछे से ही सियासी चालें चलेंगे। कमोवेश इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर अभी से दिखने लगा है। 10 फरवरी को मतदान से पहले सियासी गलियारों में उठापटक भी हो सकती है। यह छह विधायक 2012 के विधानसभा चुनाव में मैदान में थे। इस बार चार पूर्व विधायकों का टिकट कट गया। एक के बेटे को टिकट नहीं मिला और एक पूर्व विधायक अपने बेटे को विरासत सौंपने में कामयाब हो गए।
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भाजपा से चार और उमा भारती की जनशक्ति पार्टी से एक बार बिनावर विधानसभा सीट से विधायक रहे राम सेवक सिंह पटेल बिनावर विधानसभा सीट खत्म होने के बाद 2012 का चुनाव शहर सीट से बसपा के टिकट पर लड़े थे। 2017 में उन्होंने शिवसेना से चुनाव लड़ा था। इस बार भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन उनको टिकट नहीं मिल सका।
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2007 और 2012 में दातागंज विधानसभा से बसपा के टिकट पर विधायक चुने जाने वाले सिनोद कुमार शाक्य भी इस बार चुनाव मैदान में नहीं है। पंचायत चुनाव के दौरान वह सपा में शामिल हुए थे। पार्टी के निर्देश पर पत्नी सुनीता को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया जो हार गईं। दातागंज विधानसभा से टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन यहां सपा ने कैप्टन अर्जुन सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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शहर विधानसभा सीट से विधायक रहे आबिद रजा भी इस बार मैदान नहीं हैं। 2012 में सपा के टिकट पर विधायक बने आबिद रजा ने 2017 का चुनाव भी सपा से लड़ा, लेकिन शिकस्त मिली। इस बार भी सपा से टिकट के दावेदार थे। टिकट न मिलने के बाद वह बगावती तेवर भी अपना चुके हैं। शहर सीट पर 2002 में बसपा से विधायक चुने गए विमल कृष्ण अग्रवाल ने 2007 का चुनाव सपा से लड़ा। 2017 में उन्होंने सपा से बिल्सी सीट से चुनाव लड़ा। इस बार भी बिल्सी सीट से सपा के टिकट के दावेदार थे। उनको भी टिकट नहीं मिल सका।
1996 और 2002 में सपा से दो बार दातागंज सीट से विधायक चुने गए प्रेमपाल सिंह यादव ने 2012 और 2017 में भी दातागंज से चुनाव लड़ा पर हार गए। इस बार वह अपने बेटे अवनीश यादव को टिकट की पैरोकारी कर रहे थे, लेकिन उनको टिकट नहीं मिला। अवनीश ने निर्दलीय पर्चा भरा है।
2012 में शेखूपुर सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए आशीष यादव 2017 का चुनाव भी सपा से लड़े। इस बार उनके बेटे हिमांशु यादव सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। आशीष यादव को राजनीति अपने पिता बनवारी सिंह यादव से विरासत में मिली थी। उन्होंने भी राजनीतिक विरासत अपने बेटे को सौंप दी है।

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पूर्व राज्यमंत्री ने भी बेटे को सौंपी विरासत
सहसवान सीट से मौजूदा सपा विधायक और पूर्व पंचायती राज राज्यमंत्री ओमकार सिंह यादव ने इस बार अपनी राजनीतिक विरासत बेटे ब्रजेश यादव को सौंप दी है। ओमकार सिंह सहसवान सीट से 1991, 2002, 2012, 2017 में सहसवान से विधायक चुने गए थे। 1996 में सहसवान से मुलायम सिंह यादव विधायक चुने गए। ओमकार सिंह ने मुलायम सिंह यादव को चुनाव लड़ाया। इस बार ओमकार सिंह ने अपनी राजनीतिक विरासत बेटे को सौंप दी है। संवाद
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