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Budaun News: सांसों में घुल रहा जहर... जिम्मेदार लापरवाह, जनता को भी फिक्र नहीं

Sat, 02 Dec 2023 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:24 AM IST
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Poison is dissolving in breath, responsible are careless, even public is not concerned
बदायूं। वायु प्रदूषण को लेकर शासन-प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है। पुराने वाहनों का संचालन बंद करने का आदेश है, ताकि वायु प्रदूषण रोका जा सके, लेकिन परिवहन विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है। अप्रैल से लेकर अब तक केवल 28 वाहनों का ही प्रदूषण के चलते चालान किया गया, जबकि सैकड़ों वाहन रोजाना सड़कों पर काला जहरीला धुआं छोड़ते हुए फर्राटा भर रहे हैं।
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पुराने वाहनों के स्क्रैप के लिए कोई सेंटर भी यहां नहीं बन सका है। बढ़ते प्रदूषण के लिए सिर्फ विभाग ही नहीं हम भी जिम्मेदार हैं, जो लंबे समय तक अपनी गाड़ी का प्रदूषण चेक कराना तक उचित नहीं समझते, जबकि यह जानते हैं कि यह लापरवाही हमारे ही फेफड़ों को बीमार बना रही है।
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परिवहन विभाग की ओर से पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन निरस्त कराए जा रहे हैं लेकिन उनका संचालन बंद कराना और उन्हें स्क्रैप कराना उतना ही मुश्किल है, जबकि शासन स्तर से लगातार वायु प्रदूषण को लेकर अलर्ट जारी हो रहे हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में पुराने वाहनों का संचालन बंद कर दिया गया है।
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दूसरे प्रांतों के पुराने वाहनों के प्रवेश पर भी रोक है, लेकिन बदायूं में न तो प्रदूषण की रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं और न ही प्रदूषण फैलाने वालों को रोका जा रहा है। एआरटीओ प्रवर्तन अंबरीश कुमार ने बताया कि प्रदूषण के मामले में भी चालान किए जा रहे हैं। वाहन स्वामियों को भी प्रदूषण चेक कराते रहने के प्रति सचेत रहना चाहिए।
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जिले में हैं 14 प्रदूषण जांच केंद्र
जिले में विभिन्न जगहों पर 14 प्रदूषण जांच केंद्र बने हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर बंद रहते हैं। इन पर न तो प्रदूषण की जांच हो पा रही है और न ही वाहन जांच कराने पहुंच रहे हैं। जो वाहन पहुंचते भी हैं, उनकी भी जांच नहीं हो पाती। इन प्रदूषण जांच केंद्रों पर बाइक का प्रदूषण जांच कराने पर 55 रुपये शुल्क निर्धारित है। पेट्रोल से चलित कार या अन्य वाहन पर 75 रुपये और डीजल चलित कार या अन्य वाहन पर 105 रुपये का शुल्क निर्धारित है। ऑनलाइन प्रदूषण की जांच कराने पर प्रमाण पत्र भी मिलता है लेकिन तमाम लोग प्रदूषण चेक कराना उचित नहीं समझते।

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लोग भी समझें अपनी जिम्मेदारी
वाहनों के धुएं से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैसें मानव स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। खासकर दमा, फेफड़ों से संबंधित रोगों को जन्म देती हैं। जो लोग प्रदूषण चेक कराए बिना फर्राटा भरते हैं, उन्हें ये भी सोचना चाहिए कि वे अपने और दूसरों के लिए सांस लेना दूभर कर रहे हैं।
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