{"_id":"597b42e04f1c1b9b6b8b4c7d","slug":"patients-on-rise-but-hospitals-left-with-less-medicines","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवाओं की किल्लत के बीच अस्पताल में उमड़ रही भीड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवाओं की किल्लत के बीच अस्पताल में उमड़ रही भीड़
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Fri, 28 Jul 2017 07:27 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से रोगियों की तादाद में इजाफा होने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 1500 के पार हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी रोज 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा रोगी वायरल, टाइफाइड और सर्दी-जुकाम के आ रहे हैं। इस बीच जिले के कई अस्पतालों में दवाओं की किल्लत भी बनी हुई है। पिछले कई दिन से मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है। कभी बारिश तो कभी तेज धूप तो कभी रात के तापमान में गिरावट के चलते बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ गया है। स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मौसम के बार-बार बदलते मिजाज की वजह से वायरल, सर्दी-जुकाम और टाइफाइड के रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आमतौर पर जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से 700 मरीज रोज पहुंचते हैं अब इनकी संख्या 1500 के पार हो गई है। इधर देहात के कई अस्पतालों में लोगों को दवाओं की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
गांवों में गंदगी और जलभराव से संक्रामक रोगों का खतरा
जिले के कई गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। गंदगी और जलभराव के चलते संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। ग्राम पंचायतों की स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियों को साफ-सफाई और मच्छर नाशक दवाओं के छिड़काव को बजट दिया जाता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को 10-10 हजार रुपये के बजट का प्रावधान है। इसके बाद भी गांवों में मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा है। ऐसे में कई गांवों में तो संक्रामक रोग दस्तक तक दे चुके हैं।
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गांवों में गंदगी और जलभराव से संक्रामक रोगों का खतरा
जिले के कई गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। गंदगी और जलभराव के चलते संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। ग्राम पंचायतों की स्वास्थ्य और स्वच्छता समितियों को साफ-सफाई और मच्छर नाशक दवाओं के छिड़काव को बजट दिया जाता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को 10-10 हजार रुपये के बजट का प्रावधान है। इसके बाद भी गांवों में मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा है। ऐसे में कई गांवों में तो संक्रामक रोग दस्तक तक दे चुके हैं।
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