बदायूं में मरीज ने दी जान: ताऊ राम-राम... हम तो चले, यह कहकर मेडिकल कॉलेज की चौथी मंजिल से कूदा
बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मरीज की जान चली गई। बृहस्पतिवार की रात जब युवक की हालत ज्यादा बिगड़ी तो पिता ने डॉक्टरों से उसे रेफर करने की बात कही, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। सुबह बीमार बेटे ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी।
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बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज के टीबी वार्ड में भर्ती हुए सुभाष ने शुक्रवार की सुबह अपने पड़ोस के बेड पर बैठे हुए बुजुर्ग से कहा कि ताऊ राम-राम, हम तो चले...। सुभाष के यह शब्द अंतिम थे। इसके बाद उसने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। सुभाष को बुजुर्ग तीमारदार ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वह छलांग लगा चुके थे। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पूरी रात सांस लेने में हो रही दिक्कत से जुनावई थाना क्षेत्र के गांव हथियावली निवासी सुभाष (30) पुत्र किशनलाल काफी परेशान हो चुके थे। पूरी रात वह वार्ड में चिल्लाते रहे। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने एक न सुनी। वह अपनी बीमारी से थक चुके थे और दर्द बर्दाश्त से बाहर था।
काउंटर से दवा लेने गए थे पिता
शुक्रवार की सुबह वार्ड में पहुंचे दूसरे डॉक्टर ने सुभाष को देखने के बाद दवा लिखी व पिता को दवा लेने के लिए भेज दिया। इसी दौरान सुभाष बेड से उठ गए। कुछ देर डॉक्टर से बात की। बराबर के बेड पर मौजूद मरीज के साथ बुजुर्ग तीमारदार को ताऊ कहते हुए राम-राम की। इसके बाद कहा कि ताऊ हम तो चले। बुजुर्ग ने कहा- बेटे कहां जा रहा है। तेरी तबीयत ज्यादा खराब है, लेट जा...।
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दोनों के बीच बातचीत चल ही रही थी सुभाष खिड़की के पास पहुंचा। तीमारदार उसे रोकने के लिए दौड़े, लेकिन उससे पहले ही उसने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद डॉक्टर व स्टाफ खिड़की की तरफ भागे। अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। सिर में चोट लगने से सुभाष की मौके पर ही मौत हो गई।
पत्नी की थी तेहरवीं, 13 दिन में घर में दो मौतें
सुभाष की पत्नी पुष्पा की 13 दिन पहले बीमारी से मौत हो गई थी। शुक्रवार को पत्नी की तेहरवीं थी। पत्नी की तेहरवीं वाले दिन सुभाष ने भी राजकीय मेडिकल कॉलेज की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी। 13 दिन के अंदर दो साल के बेटे और एक साल की बेटी के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।
डॉक्टरों ने नहीं सुनी
बृहस्पतिवार की रात 11 बजे सुभाष की हालत ज्यादा बिगड़नी शुरू हो गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। युवक के पिता किशनलाल ने डॉक्टर से कहा कि इसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आप कोई दवाई दे दीजिए, लेकिन किसी ने एक न सुनी। फिर से युवक के पिता ने कहा कि दवा न हो तो वह बाहर से ले आएंगे। उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
बेटे की हालत बिगड़ते देख पिता परेशान हो चुके थे। रात 12 बजे के बाद उन्होंने बेटे को रेफर कराने का मन बना लिया। रेफर करने की बात डॉक्टरों से कही तो कहा जवाब मिला कि इस समय कहा लेकर जाओगे। युवक के पिता ने कहा कि बेटे की तबीयत ज्यादा खराब है वह चिल्ला रहा है। देखने के बजाय डॉक्टर ने कहा कि सारे मरीज ऐसे ही हरकत करते हैं।
रात 11 बजे पहुंचे डॉक्टर, चार बजे कहा- मैं सोने जा रहा हूं
टीबी वार्ड की विभागाध्यक्ष डॉ. कोमल हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि उनके वार्ड में जो भी मरीज भर्ती हैं, उनकी अच्छे से देखभाल की जाए। वार्ड में जिस डॉक्टर की ड्यूटी थी वह बृहस्पतिवार की रात 11 बजे वार्ड में पहुंचे। चार बजे स्टाफ से कहा कि तुम लोग देख लेना अब मैं सोने के लिए जा रहा हूं।
स्टाफ बोला- मशीन खराब करोगे
सुभाष की हालत लगातार बिगड़ रही थी और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। यह देख पिता ने ऑक्सीजन तेज कर दी। इससे सुभाष को सांस लेने में आसानी हुई। पिता को लगा कि अब बेटे की हालत में सुधार होने लगा है। इसी बीच वार्ड में मौजूद स्टॉफ ने जब ऑक्सीजन को तेज होते देखा तो उन्होंने फिर ऑक्सीजन कम कर दी। युवक का पिता बोला कि ऑक्सीजन तेज रहने दीजिए तो स्टाफ ने कहा कि मशीन खराब हो जाएगी।
सीओ सीटी संजीव कुमार ने कहा कि युवक ने छलांग लगाकर आत्महत्या की है। शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया है। अभी तक तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।