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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Over 1,400 dengue cases across 11 blocks; only 89 patients recorded by the department.

Budaun News: 11 ब्लॉकों में 1400 से डेंगू पीड़ित, विभाग में महज 89 मरीज ही दर्ज

Fri, 09 Oct 2026 01:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:25 AM IST
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Over 1,400 dengue cases across 11 blocks; only 89 patients recorded by the department.
श्योराज सिंह - फोटो : 1
बदायूं। जिले में डेंगू व बुखार का प्रकोप बढ़ने के बीच मरीजों की संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग और निजी लैब की रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है।
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निजी लैब की जांच रिपोर्टों के आधार पर 11 ब्लॉकों में 1400 लोगों के डेंगू पॉजिटिव होने का दावा किया जा रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में महज 89 मरीज दर्ज हैं। इनमें किट से पॉजिटिव मिले मरीज भी शामिल हैं। वहीं, एलाइजा जांच में केवल 62 मरीजों की पुष्टि हुई है। आंकड़ों में इस बड़े अंतर के चलते जिले में डेंगू के वास्तविक प्रसार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगातार बुखार के मरीज सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में जांच कराने को मजबूर हैं। निजी लैब की रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या 1400 बताई जा रही है, लेकिन सरकारी आंकड़ा इसके मुकाबले काफी कम है।
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अब सवाल यह है कि निजी लैब में सामने आ रहे मरीजों का पूरा ब्योरा स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच रहा है या नहीं। डेंगू से मौतों के दावे भी सामने आने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि कई मरीजों की डेंगू की वजह से हालत बिगड़ने के बाद मौत हुई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग इन सभी मौतों की डेंगू से मौत नहीं मान रहा है।
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किट और एलाइजा जांच के आंकड़ों में अंतर
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 89 डेंगू मरीज दर्ज हैं, जबकि एलाइजा जांच में 62 मरीजों की पुष्टि हुई है। विभाग के अनुसार, डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच के आधार पर ही होती है।



ब्लाॅक किट से पॉजिटिव प्राइवेट लैब में पॉजिटिव
जगत- 45-400
बदायूं-14-100
अंबियापुर-7-100

उझानी-6-100
दहगवां-5-50
उसावां-3-100

वजीरगंज-2-200
कादरचौक-2-50

समरेर-1-50
आसफपुर1-50
म्याऊं-1-200
(ग्रामीणों के अनुसार प्राइवेट लैब की जांच में पॉजिटिव )





टीम लगातार गांव में शिविर कर रही है। लोगों की जांच हो रही है। दवाएं बांटी जा रही हैं। एलाइजा की रिपोर्ट आने के बाद ही डेंगू की पुष्टि मानी जा रही है। निजी लैब की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं आती है। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ

जगत पिपरी गांव में गंदगी का आलम
इस्लामनगर। जगत पिपरी गांव में गंदगी का आलम है। गांव में घुसते ही जगह-जगह जलभराव देखने को मिलता है। गुड़िया, सायरा, भूरि का कहना है कि पिछले लगभग चार-पांच दिन में जिस किसी ने भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जांच कराई, उनमें अधिकांश की रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं प्राइवेट लैब में जांच कराने पर लोग पॉजिटिव आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम हर बीमारी के लिए एक ही दवा दे रही है, जिसका कोई असर मरीज पर नहीं दिखाई दे रहा है। संवाद


गांव जगत पिपरी में हुईं 60 जांचें

इस्लामनगर। जगत पिपरी गांव में स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर में शिविर लगाकर 1053 मरीजों की जांच की। इसमें एंटीजन किट से की गई जांच में महज 20 ही डेंगू पॉजिटिव पाए गए। दो दिन में तीन डेंगू पीड़ितों की मौत हो चुकी है। गांव के 100 से अधिक लोगों ने प्राइवेट लैब में जांच कराई है, उनमें डेंगू के लक्षण बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बृहस्पतिवार को 60 ग्रामीणों की जांच की, जिसमें कोई भी डेंगू-मलेरिया पॉजिटिव नहीं निकला।

ये लोग हैं बुखार से पीड़ित
जगत पिपरी गांव में जहूर अहमद सहित इसी घर के जुनेद, मीना बेगम, गुड़िया, सायरा, भूरि का पूरा घर बीमार है। वहीं जाहिद, शाहिद, वाजिद, साजिद, मोहम्मद उमर पांच सगे भाइयों के घर में लगभग 48 लोग बीमार हैं। ये सभी डेंगू से पीड़ित बताए जा रहे हैं। वहीं, मृतक कस्तूरी देवी के घर में हिमांशु, सलोनी, रश्मि, नेमवती बीमार हैं। सलोनी का इलाज चंदौसी के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

सरकारी में रिपोर्ट निगेटिव, प्राइवेट में डेंगू पॉजिटिव

जगत पिपरी गांव निवासी किशनवीर ने बताया कि उन्हें बहुत तेज ठंड लगकर बुखार आया था। दो रजाई ओढ़ने के बाद भी ठंड से राहत नहीं मिली। इसके बाद सरकारी अस्पताल गए। वहां जांच कराई तो डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव आई। बाद में प्राइवेट लैब में जांच कराई, तो वह पॉजिटिव आई। मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल से डेंगू की दवा ली।





ग्रामीणों को केवल पैरासिटामोल देने का लगाया आरोप

जगत पिपरी गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर लगाए हैं। इसमें बुखार और डेंगू पीड़ित आदि को दवाएं दी जा रही है। शाहिद, वाजिद, साजिद, मोहम्मद उमर समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि टीम की ओर से केवल पैरासिटामोल की गोलियां दी जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया या सीजन बुखार है। सभी में केवल पैरासिटामोल टैबलेट दी जा रही है, जो इन बीमारियों के लिए नाकाफी है।


ग्रामीण बोले-स्वास्थ्य विभाग कर रहा खानापूरी
गांव में डेंगू फैल चुका है। स्थिति अब कंट्रोल से बाहर है। स्वास्थ्य विभाग केवल खानापूर्ति में लगा हुआ है, जितना काम कागजों में कर अधिकारियों को भेजा जाता है। अगर उसका 50 प्रतिशत भी धरातल पर कर लें, तो काफी बेहतर होगा। -श्योराज सिंह,
स्वास्थ्य विभाग केवल अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करने में लगा है। गांव में कौन मर रहा है। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं। केवल उसकी पुष्टि डेंगू से न निकले, यह साबित करने में पूरी ताकत लगा रहे हैं। - रणवीर


गांव में लगातार शिविर लगाया जा रहा है। लोगों की जांच कर, उनकी बीमारी के अनुसार दवा का वितरण किया जा रहा है। बुखार के लिए पैरासिटामोल ही सबसे अच्छी दवा है। ग्रामीणों को किसी भ्रम में नहीं आना चाहिए। -रोहित कुमार, एमओआईसी

श्योराज सिंह

श्योराज सिंह- फोटो : 1

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