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Budaun News: निजी अस्पताल में ताला डालकर खिसका संचालक, डिप्टी सीएमओ करेंगे जांच
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मुजरिया में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला
सीएमओ ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी (बदायूं)। कछला निवासी प्रसूता और उसकी नवजात बच्ची की मुजरिया के निजी अस्पताल में मौत के मामले में सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच के लिए टीम हालांकि दूसरे दिन भी मौके पर नहीं पहुंची, लेकिन अफसर के आने का शोर मचने पर संचालक निजी अस्पताल में ताला डालकर खिसक गया। तीन-चार घंटे तक वह लौटकर नहीं आया।
प्रसूता श्रीवती को उसके परिजनों ने तीन दिन पहले मुजरिया चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के दौरान उसने बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई थी। परिजन नवजात का अंतिम संस्कार करके अस्पताल लौटते, उससे पहले ही सोमवार शाम श्रीवती ने भी दमतोड़ दिया था। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाया तो पैरोकारों के जरिये दोनों पक्ष में समझौता भी हो गया था। समझौता के बाद मृतका श्रीवती का कछला गंगाघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। बताते हैं कि इलाके के लोगों के जरिये मामला बुधवार दोपहर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के संज्ञान में पहुंच गया था। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम बनाकर पूरे मामले की जांच सौंपी है। टीम में सहसवान के चिकित्साधीक्षक को भी शामिल किया गया है। उधर, बुधवार दोपहर मुजरिया में स्वास्थ्य विभाग के अफसर के पहुंचने का शोर मचते ही संचालक निजी क्लीनिक बंद करके खिसक गया। बताते हैं कि शाम करीब पांच बजे फिर से अस्पताल खोल लिया गया। संचालक ने अस्पताल के मुख्य द्वार के पास लिखा अपना और अपने परिजन का नाम भी पुतवा दिया है।
निजी अस्पताल पंजीकरण को लेकर पसोपेश
मुजरिया चौराहे के पास पिछले काफी समय से संचालित निजी अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है या नहीं, इस पर सवाल के बीच सहसवान के चिकित्साधीक्षक प्रशांत कुमार त्यागी ने जानकारी होने से इंकार कर दिया। जांच में इसे लेकर भी गौर किए जाने के आसार हैं। यही नहीं, उझानी कस्बे में भी दो-तीन अस्पतालों के पंजीकरण पर पहले से ही सवाल उठता रहा है। पिछले साल आंबेडकर चौराहे के पास एक निजी अस्पताल खुला तो आशाओं को गिफ्ट बांटे जाने पर सुर्खियों में आ गया था। अफसरों ने जांच की तो वह अवैध पाया गया। बाद में उसे सील कर दिया गया था।
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मुजरिया के निजी अस्पताल के मामले में डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम जांच करेगी। मौके पर जाकर हकीकत का पता भी किया जाएगा। टीम में सहसवान के चिकित्साधीक्षक को भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान मृतका के परिजनों से बात करेंगे।- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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सीएमओ ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी (बदायूं)। कछला निवासी प्रसूता और उसकी नवजात बच्ची की मुजरिया के निजी अस्पताल में मौत के मामले में सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच के लिए टीम हालांकि दूसरे दिन भी मौके पर नहीं पहुंची, लेकिन अफसर के आने का शोर मचने पर संचालक निजी अस्पताल में ताला डालकर खिसक गया। तीन-चार घंटे तक वह लौटकर नहीं आया।
प्रसूता श्रीवती को उसके परिजनों ने तीन दिन पहले मुजरिया चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के दौरान उसने बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई थी। परिजन नवजात का अंतिम संस्कार करके अस्पताल लौटते, उससे पहले ही सोमवार शाम श्रीवती ने भी दमतोड़ दिया था। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाया तो पैरोकारों के जरिये दोनों पक्ष में समझौता भी हो गया था। समझौता के बाद मृतका श्रीवती का कछला गंगाघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। बताते हैं कि इलाके के लोगों के जरिये मामला बुधवार दोपहर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के संज्ञान में पहुंच गया था। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम बनाकर पूरे मामले की जांच सौंपी है। टीम में सहसवान के चिकित्साधीक्षक को भी शामिल किया गया है। उधर, बुधवार दोपहर मुजरिया में स्वास्थ्य विभाग के अफसर के पहुंचने का शोर मचते ही संचालक निजी क्लीनिक बंद करके खिसक गया। बताते हैं कि शाम करीब पांच बजे फिर से अस्पताल खोल लिया गया। संचालक ने अस्पताल के मुख्य द्वार के पास लिखा अपना और अपने परिजन का नाम भी पुतवा दिया है।
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निजी अस्पताल पंजीकरण को लेकर पसोपेश
मुजरिया चौराहे के पास पिछले काफी समय से संचालित निजी अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है या नहीं, इस पर सवाल के बीच सहसवान के चिकित्साधीक्षक प्रशांत कुमार त्यागी ने जानकारी होने से इंकार कर दिया। जांच में इसे लेकर भी गौर किए जाने के आसार हैं। यही नहीं, उझानी कस्बे में भी दो-तीन अस्पतालों के पंजीकरण पर पहले से ही सवाल उठता रहा है। पिछले साल आंबेडकर चौराहे के पास एक निजी अस्पताल खुला तो आशाओं को गिफ्ट बांटे जाने पर सुर्खियों में आ गया था। अफसरों ने जांच की तो वह अवैध पाया गया। बाद में उसे सील कर दिया गया था।
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मुजरिया के निजी अस्पताल के मामले में डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम जांच करेगी। मौके पर जाकर हकीकत का पता भी किया जाएगा। टीम में सहसवान के चिकित्साधीक्षक को भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान मृतका के परिजनों से बात करेंगे।- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ