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ये लो! ....ओडीएफ हो गया जिला, तो 14 हजार परिवार कहां से निकल आए शौचालय विहीन
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बदायूं। 15 नवंबर 2018 को जिला पंचायती राज विभाग की ओर से जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया, साथ ही दावा किया गया कि जिले में सभी पात्र व्यक्तियों को सरकारी योजना का पूर्णता लाभ मिल चुका है। जिला ओडीएफ होने के बाद में शासन ने फिर से सर्वे करने के विभाग को निर्देश दिए तो इस सर्वे (एलओबी-2) में 10 हजार से अधिक परिवार शौचालय विहीन निकल आए, जिसने विभाग के जिले को ओडीएफ करने के दावे को हवा-हवाई कर दिया। इसके बाद अभी फिर से कराए जा रहे तीसरे सर्वे (यूनिवर्सल सैनिटेशन) में चार हजार से अधिक परिवार फिर निकल आए। ऐसे में अब सवाल उठा रहा है कि अगर विभाग द्वारा जिला ओडीएफ घोषित किया जा चुका था तो ये 14 हजार परिवार आखिर आए तो आए कहां से। साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं या तो विभाग से चूक हुई या फिर जिले को ओडीएफ घोषित करने की जल्दी में पहले फर्जी आंकड़े शासन को बता दिए गए।
शासन के साफ निर्देश है कि कोई भी गरीब व्यक्ति रुपये के अभाव में शौचालय विहीन जीवन यापन न करे और प्रदेश खुले में शौच मुक्त हो। ऐसे में सरकार ने बेस लाइन सर्वे 2011 को आधार मानते हुए पात्र लोगों का चयन कराया। सूची के अनुसार जिले मेें करीब तीन लाख परिवार ऐसे थे। इनके शौचालय बनवाए गए। इसके बाद में शासन ने विभाग को निर्देशित किया कि वह 2011 की बेस लाइन की सूची से अलग लोगों का सर्वे कराए, जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। विभाग की ओर से अगस्त 2018 में हुए सर्वे (एलओबी-1) में 66 हजार 885 परिवार ऐसे मिले, जिनके पास शौचालय नहीं थे और ये सभी परिवार पात्रता की श्रेणी में आ रहे थे। इन परिवारों की रिपोर्ट विभाग की ओर से शासन को भेज दी। वहां से मिले निर्देशों के बाद में इन परिवार को शौचालय की प्रथम किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये दे दिया, साथ ही कुछ परिवार को दूसरी किस्त भी मुहैया करा दी। इसके बाद विभाग ने शासन को 15 नवंबर 2018 भेजी रिपोर्ट में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया।
रिपोर्ट मिलने के बाद में शासन ने अप्रैल 2019 में फिर से सर्वे कराया। इस सर्वे (एलओबी-2) में 10072 परिवार ऐसे मिले, जो गरीब थे और पात्रता की श्रेणी में आ रहे थे। शासन ने फिर इनके शौचालय बनाने के निर्देश दिए। अगस्त में शासन से निर्देश मिले कि दो अक्तूबर 2019 को पूरा देश ओडीएफ घोषित किया जाएगा। अगर कोई पात्र व्यक्ति रह गया है, इसका सर्वे कराकर भेजें। इसके बाद अब विभाग की ओर से सर्वे (यूनिवर्सल सैनिटेशन) के नाम से किया जा रहा है। अभी तक इसमें चार हजार से अधिक परिवार शौचालय विहीन मिले हैं, जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। सर्वे अभी चल रहा है, ऐसे में यह संख्या और बढ़ भी सकती है। सवाल ये उठता है कि जिला ओडीएफ होने के बाद में लगभग 14 हजार परिवार और ऐसे कहां से निकल आए जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में पहले जिला किस आधार पर ओडीएफ घोषित कर दिया गया।
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जो सर्वे हुआ था, उसी रिपोर्ट के मुताबिक सभी को शौचालय बनाने के लिए किस्त जारी कर दी गई। उसके बाद में शौचालयों का निर्माण हो गया। इसके बाद में जिला ओडीएफ घोषित किया गया। बाद में शासन ने निर्देश दिए कि एलओबी फेस-2 के तहत दोबारा सर्वे कराया जाए। जो किन्हीं कारण से रह गए हैं, उनका नाम सूची मेें जोड़ा जाए। ये परिवार उसी सूची के हैं।
- डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ
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शासन के साफ निर्देश है कि कोई भी गरीब व्यक्ति रुपये के अभाव में शौचालय विहीन जीवन यापन न करे और प्रदेश खुले में शौच मुक्त हो। ऐसे में सरकार ने बेस लाइन सर्वे 2011 को आधार मानते हुए पात्र लोगों का चयन कराया। सूची के अनुसार जिले मेें करीब तीन लाख परिवार ऐसे थे। इनके शौचालय बनवाए गए। इसके बाद में शासन ने विभाग को निर्देशित किया कि वह 2011 की बेस लाइन की सूची से अलग लोगों का सर्वे कराए, जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। विभाग की ओर से अगस्त 2018 में हुए सर्वे (एलओबी-1) में 66 हजार 885 परिवार ऐसे मिले, जिनके पास शौचालय नहीं थे और ये सभी परिवार पात्रता की श्रेणी में आ रहे थे। इन परिवारों की रिपोर्ट विभाग की ओर से शासन को भेज दी। वहां से मिले निर्देशों के बाद में इन परिवार को शौचालय की प्रथम किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये दे दिया, साथ ही कुछ परिवार को दूसरी किस्त भी मुहैया करा दी। इसके बाद विभाग ने शासन को 15 नवंबर 2018 भेजी रिपोर्ट में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया।
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रिपोर्ट मिलने के बाद में शासन ने अप्रैल 2019 में फिर से सर्वे कराया। इस सर्वे (एलओबी-2) में 10072 परिवार ऐसे मिले, जो गरीब थे और पात्रता की श्रेणी में आ रहे थे। शासन ने फिर इनके शौचालय बनाने के निर्देश दिए। अगस्त में शासन से निर्देश मिले कि दो अक्तूबर 2019 को पूरा देश ओडीएफ घोषित किया जाएगा। अगर कोई पात्र व्यक्ति रह गया है, इसका सर्वे कराकर भेजें। इसके बाद अब विभाग की ओर से सर्वे (यूनिवर्सल सैनिटेशन) के नाम से किया जा रहा है। अभी तक इसमें चार हजार से अधिक परिवार शौचालय विहीन मिले हैं, जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। सर्वे अभी चल रहा है, ऐसे में यह संख्या और बढ़ भी सकती है। सवाल ये उठता है कि जिला ओडीएफ होने के बाद में लगभग 14 हजार परिवार और ऐसे कहां से निकल आए जो पात्रता की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में पहले जिला किस आधार पर ओडीएफ घोषित कर दिया गया।
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जो सर्वे हुआ था, उसी रिपोर्ट के मुताबिक सभी को शौचालय बनाने के लिए किस्त जारी कर दी गई। उसके बाद में शौचालयों का निर्माण हो गया। इसके बाद में जिला ओडीएफ घोषित किया गया। बाद में शासन ने निर्देश दिए कि एलओबी फेस-2 के तहत दोबारा सर्वे कराया जाए। जो किन्हीं कारण से रह गए हैं, उनका नाम सूची मेें जोड़ा जाए। ये परिवार उसी सूची के हैं।
- डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ