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कादरचौक में तालाबों पर कब्जे, प्रशासन मौन
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कादरचौक इलाके में तालाब पाटकर बनाए मकान। संवाद
- फोटो : BADAUN
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कादरचौक (बदायूं)। अवैध कब्जों के मामलों में बुलडोजर चला रहे प्रशासन को गौरामई और आसपास के गांवों में तालाबों पर निर्माण दिखाई नहीं दे रहा। यहां तालाबों का पटान कर पक्के मकान तक बना लिए गए हैं। यहां जांच कर निष्पक्षता से कार्रवाई कराई जाए तो कई जिम्मेदार भी कब्जा कराने के दोषी मिल सकते हैं।
योगी सरकार सरकारी जमीन व तालाबों से अवैध कब्जा हटवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग इस मामले में पूरी तरह उदासीन है। गौरामई में सात तालाब हैं। इनमें पांच तालाबों पर अवैध अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए हैं। तालाबों की ओर धीरे-धीरे कूड़ा मिट्टी डालकर समतल कर उन पर कब्जा कर लिया है। बिचौला में भी तालाब पर अवैध तरीके से मकान बना लिए हैं।
इस मामले में जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो उनके खिलाफ 120 बी की कार्रवाई भी की गई। अवैध निर्माण से तालाबों को मुक्त नहीं कराया गया। भमुइया में भी तालाब को जाने वाली पानी नहर को पाटकर मकान बना लिए हैं। जबकि जल प्रवाह या जलाशय को नियम के अनुसार किसी भी दशा में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। कार्रवाई के नाम पर केवल चिह्नांकन ही होकर रह जाता है।
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योगी सरकार सरकारी जमीन व तालाबों से अवैध कब्जा हटवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग इस मामले में पूरी तरह उदासीन है। गौरामई में सात तालाब हैं। इनमें पांच तालाबों पर अवैध अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए हैं। तालाबों की ओर धीरे-धीरे कूड़ा मिट्टी डालकर समतल कर उन पर कब्जा कर लिया है। बिचौला में भी तालाब पर अवैध तरीके से मकान बना लिए हैं।
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इस मामले में जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो उनके खिलाफ 120 बी की कार्रवाई भी की गई। अवैध निर्माण से तालाबों को मुक्त नहीं कराया गया। भमुइया में भी तालाब को जाने वाली पानी नहर को पाटकर मकान बना लिए हैं। जबकि जल प्रवाह या जलाशय को नियम के अनुसार किसी भी दशा में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। कार्रवाई के नाम पर केवल चिह्नांकन ही होकर रह जाता है।
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