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...अब ज्योतिषियों की शरण में प्रत्याशी
बदायूं
Updated Thu, 10 Dec 2015 11:13 PM IST
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पंचायत चुनाव में अपनी मूछ और पूछ के लिए जी जान से जुटकर मतगणना में अपने भाग्य जानने को प्रत्याशी अब ज्योतिषियों के चक्कर लगाने लगें हैं। कुछ दक्षिणा देकर उपाय पूछने में लगे हैं कि किस अनुष्ठान और जप से उनकी जीत सुनिश्चित हो सकेगी। ज्योतिषी भी उनके बात को समझ रहे हैं ओर निश्चित विजय के लिए तरह-तरह के उपाय बताकर धनार्जन में लग गए हैं।
पंचायत चुनाव के तीनों स्तरों में ग्राम पंचायत का चुनाव अत्याधिक महत्व का चुनाव माना जा रहा है। इसमें प्रधान पद के प्रत्याशी बेहद उतावले हैं। विजय हासिल करने को वह कोई अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहते। इसके लिए उन्होंने दारू मुर्गा से लेकर खान-पान और उपहारों पर जमकर धन लुटाया। मतदान तक साम-दाम-दंड सभी प्रकार के उपाय किए। अब जब मतगणना होने को है तो प्रत्याशी भाग्य का बदलने के लिए मठ-मंदिरों, थान-ज्यारतों के अलावा पीर-तांत्रिक और ज्योतिषियों के चक्कर लगाने लगे हैं।
त्रिस्तरीय चुनाव में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के अलावा ग्राम पंचायत का नंबर होता है। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के चुनाव हो जाने के बाद ग्राम पंचायत के चुनाव भी हो गए। अब मतगणना ही शेष है। वोट किसके पक्ष में कितने पड़े? अब मतपेटियों खुलने के बाद ही पता चल सकता है। प्रत्याशियों का विश्वास अभी ज्योतिष पर बाकी बचा है। उनका मानना है कि वोट खुलते पर कोई चमत्कार हो जाए। विरोधी के वोट अधिक कैंसिल हो जाएं या फिर गणना में कोई ऐसी चूक या चमत्कार हो जाए कि वे विजयी हो जाएं। ग्राम संसद के प्रधान बनने के लिए प्रत्याशी इस विश्वास पर अभी भी उम्मीदों के ताने-बाने बुन रहे हैं।
पंचायत चुनाव के तीनों स्तरों में ग्राम पंचायत का चुनाव अत्याधिक महत्व का चुनाव माना जा रहा है। इसमें प्रधान पद के प्रत्याशी बेहद उतावले हैं। विजय हासिल करने को वह कोई अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहते। इसके लिए उन्होंने दारू मुर्गा से लेकर खान-पान और उपहारों पर जमकर धन लुटाया। मतदान तक साम-दाम-दंड सभी प्रकार के उपाय किए। अब जब मतगणना होने को है तो प्रत्याशी भाग्य का बदलने के लिए मठ-मंदिरों, थान-ज्यारतों के अलावा पीर-तांत्रिक और ज्योतिषियों के चक्कर लगाने लगे हैं।
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त्रिस्तरीय चुनाव में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के अलावा ग्राम पंचायत का नंबर होता है। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के चुनाव हो जाने के बाद ग्राम पंचायत के चुनाव भी हो गए। अब मतगणना ही शेष है। वोट किसके पक्ष में कितने पड़े? अब मतपेटियों खुलने के बाद ही पता चल सकता है। प्रत्याशियों का विश्वास अभी ज्योतिष पर बाकी बचा है। उनका मानना है कि वोट खुलते पर कोई चमत्कार हो जाए। विरोधी के वोट अधिक कैंसिल हो जाएं या फिर गणना में कोई ऐसी चूक या चमत्कार हो जाए कि वे विजयी हो जाएं। ग्राम संसद के प्रधान बनने के लिए प्रत्याशी इस विश्वास पर अभी भी उम्मीदों के ताने-बाने बुन रहे हैं।
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