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Budaun News: अब पति पन्नालाल की शक्ल भी नहीं देखना चाहतीं अनीता
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पन्नालाल की पत्नी अनीता।
बदायूं। पत्नी का पेट फाड़ने में आजीवन कारावास की सजा पाए पन्नालाल की पत्नी अनीता ने शुक्रवार को बड़ी बेबाकी के साथ दर्द को साझा किया। संतोष जताया कि न्याय मिला। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पति की अब सूरत भी देखना नहीं चाहती। जिसके साथ जिंदगी के सपने देखे और सात फेरे लिए थे, उसने ही उम्मीद का सितारा बनने वाले बेटे को पेट फाड़कर मार दिया था। वो दर्द अब तक वह भूल नहीं पाईं हैं।
अनीता ने कहा कि अगर पति थोड़ा सा धैर्य रखते और सिर्फ महीने भर इंतजार कर लेते तो पांच बेटियों को भाई, पति को बेटा और मुझे जीवन का सहारा मिलता। न पति को जेल जाना पड़ता। न आजीवन कारावास होता। एक हंसता खेलता बेटा भी आज चार साल का हो गया होता वह तो जिंदगी देख नहीं सका और मैं जिंदगी और मौत के बीच आठ महीने जूझी। बेटियों का भाग्य ऐसा था कि मरते-मरते बच गई। अब मैं अपने पति की सूरत भी नहीं देखना चाहती क्योंकि चार साल पहले की वह घटना अभी तक भूल नहीं पाई।
जब बृहस्पतिवार को अदालत ने पति पन्नालाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तब मैं कचहरी परिसर में ही थी। मुझे मेरे अधिवक्ता ने बताया कि पति को आजीवन कारावास की सजा हुई है। मैंने यही कहा कि वकील साहब...आज अदालत ने इंसाफ दिया। आपने पैरवी की आपका भी धन्यवाद करती हूं। लेकिन मैं चार साल से टूटी हुई हूं। पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी। बस जान बच पाई है। बेटियों का चेहरा देखकर जिंदा हूं। उनकी उम्मीद हूं और बेटियों को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाना चाहती हूं। सबसे बड़ी बेटी काजल की शादी हो गई है, उससे छोटी बेटी निर्जला जिसकी गवाही, सजा दिलाने में अहम साबित हुई, उसका सपना अधिवक्ता बनने का है। ऐसे ही उससे छोटी बेटियों में भावना, खुशबू और ऋषिका भी छोटी छोटी आंखों से बड़े बड़े सपने देख रहीं है। इनको सपनों को मुकाम तक पहुंचाने की तमन्ना दिल में है। सरकार और समाज के लोगों से सहयोग की उम्मीद है।
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पन्नालाल पर चल रहा है एक और मामला
बदायूं। आजीवन कारावास की सजा पाए पन्नालाल पर एक और मामला विचाराधीन है। इसमें पत्नी को जान से मारने की धमकी देने और मारपीट करने का आरोप है। इस मामले में सीजेएम की अदालत में सुनवाई के लिए 27 मई तारीख लगी है। पन्नालाल के साथ उसके पिता नंदराम भी आरोपी हैं। पुलिस ने 6 अप्रैल 2024 चार्जशीट दाखिल की थी। ब्यूरो
बेटी निर्जला बोली- मैं अधिवक्ता बनकर लोगों को न्याय दिलाने के लिए लड़ूंगी
बदायूं। बेटी निर्जला ने बताया कि जिस दिन पिता पन्नालाल ने कहा कि वह पेट फाड़कर देखेंगे कि बेटा या बेटी, तब वह घर पर थी। माता पिता में इसे लेकर खींचतान मची। मैंने मां से कहा कि तुम बाहर चली जाओ, मां घर से बाहर निकली तो पिता भी पीछे दौड़े और देखते देखते सबके सामने पिता ने मां के पेट पर हंसिया चला दिया। मां का पेट फट गया। आंतें बाहर आ गईं। खून ही खून दिख रहा था। इसके बाद पिता तो भाग गए लेकिन मेरे मामा और आसपास के लोग मां को लेकर अस्पताल की ओर दौड़े वो दिन है और आज का दिन है मैंने कभी अपने पिता से एक बार भी बात नहीं की जबकि वे मेरी मां की परचूनी की दुकान के सामने से निकलते थे। हमारी ओर देखते थे लेकिन हम उनकी सूरत नहीं देखना चाहते थे। वैसे भी डर था क्योंकि वे मां पर फैसले के लिए दबाव बना रहे थे लेकिन मां माफ नहीं करना चाहती थीं, जिंदगी के दर्द मंजूर हैं लेकिन अन्याय सहन नहीं है। मैंने अधिवक्ता बनकर लोगों के न्याय से लड़ने का निश्चय किया है।
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अनीता ने कहा कि अगर पति थोड़ा सा धैर्य रखते और सिर्फ महीने भर इंतजार कर लेते तो पांच बेटियों को भाई, पति को बेटा और मुझे जीवन का सहारा मिलता। न पति को जेल जाना पड़ता। न आजीवन कारावास होता। एक हंसता खेलता बेटा भी आज चार साल का हो गया होता वह तो जिंदगी देख नहीं सका और मैं जिंदगी और मौत के बीच आठ महीने जूझी। बेटियों का भाग्य ऐसा था कि मरते-मरते बच गई। अब मैं अपने पति की सूरत भी नहीं देखना चाहती क्योंकि चार साल पहले की वह घटना अभी तक भूल नहीं पाई।
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जब बृहस्पतिवार को अदालत ने पति पन्नालाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तब मैं कचहरी परिसर में ही थी। मुझे मेरे अधिवक्ता ने बताया कि पति को आजीवन कारावास की सजा हुई है। मैंने यही कहा कि वकील साहब...आज अदालत ने इंसाफ दिया। आपने पैरवी की आपका भी धन्यवाद करती हूं। लेकिन मैं चार साल से टूटी हुई हूं। पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी। बस जान बच पाई है। बेटियों का चेहरा देखकर जिंदा हूं। उनकी उम्मीद हूं और बेटियों को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाना चाहती हूं। सबसे बड़ी बेटी काजल की शादी हो गई है, उससे छोटी बेटी निर्जला जिसकी गवाही, सजा दिलाने में अहम साबित हुई, उसका सपना अधिवक्ता बनने का है। ऐसे ही उससे छोटी बेटियों में भावना, खुशबू और ऋषिका भी छोटी छोटी आंखों से बड़े बड़े सपने देख रहीं है। इनको सपनों को मुकाम तक पहुंचाने की तमन्ना दिल में है। सरकार और समाज के लोगों से सहयोग की उम्मीद है।
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पन्नालाल पर चल रहा है एक और मामला
बदायूं। आजीवन कारावास की सजा पाए पन्नालाल पर एक और मामला विचाराधीन है। इसमें पत्नी को जान से मारने की धमकी देने और मारपीट करने का आरोप है। इस मामले में सीजेएम की अदालत में सुनवाई के लिए 27 मई तारीख लगी है। पन्नालाल के साथ उसके पिता नंदराम भी आरोपी हैं। पुलिस ने 6 अप्रैल 2024 चार्जशीट दाखिल की थी। ब्यूरो
बेटी निर्जला बोली- मैं अधिवक्ता बनकर लोगों को न्याय दिलाने के लिए लड़ूंगी
बदायूं। बेटी निर्जला ने बताया कि जिस दिन पिता पन्नालाल ने कहा कि वह पेट फाड़कर देखेंगे कि बेटा या बेटी, तब वह घर पर थी। माता पिता में इसे लेकर खींचतान मची। मैंने मां से कहा कि तुम बाहर चली जाओ, मां घर से बाहर निकली तो पिता भी पीछे दौड़े और देखते देखते सबके सामने पिता ने मां के पेट पर हंसिया चला दिया। मां का पेट फट गया। आंतें बाहर आ गईं। खून ही खून दिख रहा था। इसके बाद पिता तो भाग गए लेकिन मेरे मामा और आसपास के लोग मां को लेकर अस्पताल की ओर दौड़े वो दिन है और आज का दिन है मैंने कभी अपने पिता से एक बार भी बात नहीं की जबकि वे मेरी मां की परचूनी की दुकान के सामने से निकलते थे। हमारी ओर देखते थे लेकिन हम उनकी सूरत नहीं देखना चाहते थे। वैसे भी डर था क्योंकि वे मां पर फैसले के लिए दबाव बना रहे थे लेकिन मां माफ नहीं करना चाहती थीं, जिंदगी के दर्द मंजूर हैं लेकिन अन्याय सहन नहीं है। मैंने अधिवक्ता बनकर लोगों के न्याय से लड़ने का निश्चय किया है।