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अन्नदाता परेशान, सेंटरों पर नहीं हो रही मक्का खरीद

Tue, 24 Nov 2020 11:51 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 24 Nov 2020 11:51 PM IST
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no purchasing on centre of corn
बदायूं। जिले में चार केंद्रों पर मक्का खरीद होनी है, लेकिन इन केंद्रों पर अपेक्षाकृत खरीद नहीं हो रही है। इसकी वजह ये है कि केंद्रों पर तैनात स्टाफ किसानों से सीधे बात करना पसंद नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों ने केंद्रों की ओर जाना छोड़ दिया है। इसके अलावा कई समस्याओं का सामना भी इन केंद्रों पर करना पड़ रहा है। इसके कारण किसान बाजार में व्यापारियों के यहां मक्का को बेच रहे हैं। यहां सबसे बड़ा फायदा किसानों को यह है कि उन्हें हाथ के हाथ पैसा भी मिल जाता है।
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शासन की ओर से जनपद को 12 हजार क्विंटल मक्का खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए जनपद में चार जगहों का चिन्हीकरण किया गया। इसमें म्याऊं, लभारी, बिल्सी और कुंवरगांव शामिल हैं। म्याऊं, लभारी और बिल्सी में तो समय से मक्का खरीद सेंटर खुल गए, लेकिन कुंवरगांव में कुछ दिनों पहले ही मक्का खरीद केंद्र खुला है। इन केंद्रों पर मक्का की अपेक्षाकृत खरीद नहीं हो पा रही है। इसकी वजह ये है कि जनपद में इन केंद्रों पर किसानों की बात ही नहीं सुनी जा रही है। वहां पर दलालों सक्रिय हैं। ऐसे में किसान वहां पर मक्का नहीं बेच पा रहे हैं। इस कारण वह खुले बाजार में अपनी फसल को बेचने पर मजबूर हो रहे हैं। जहां पर उन्हें सरकार की ओर से घोषित समर्थन मूल्य तो नहीं मिल पा रहा है, लेकिन नकद भुगतान जरूर मिल जा रहा है। ऐसे में किसान नकद भुगतान की आस में नुकसान भी उठाने को तैयार हैं।
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क्या बोले किसान
- मक्का क्रय केंद्र के हालात धान क्रय केंद्र से भी बेकार है क्योंकि क्रय केंद्र पर किसानों से सीधे खरीद नहीं की जाती है। उसमें कोई न कोई कमी निकाल दी जाती है और मक्का लेने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में बाजार में अपनी फसल बेचनी पड़ती है।
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-उदयपाल, किसान
-क्रय केंद्रों पर जाने से कोई फायदा नहीं होता है। यहां पर पहले कागजी कार्रवाई पूरी हो। उसके बाद अपनी फसल बेचें, फिर अपने पैसे के आने का इंतजार करें और इनके चक्कर काटते रहे रहे। इससे अच्छा है कि दुकान पर जाकर सीधे फसल बेचें और तुरंत रुपये ले लें।
-परमानंद, किसान
-बाजार में थोड़े कम दाम किसान अपनी फसल बेचता है, लेकिन उसको वहां पर बेचने पर संतुष्टि मिलती है। क्योंकि जैसे ही उसकी फसल की तौल हुई, वैसे ही उसे नकद धनराशि मिल जाती है, जिसकी सबको जरूरत होती है। आज के हालात के हिसाब से नकद भुगतान जरूरी है।
-सत्तार, किसान
-चाहे धान हो या मक्का क्रय केंद्र, सभी पर दलाल हावी हैं। यही वजह है कि किसानों की केंद्रों पर नहीं सुनी जाती है। कभी केंद्र बंद होना, तो कभी कोई अन्य समस्या वहां पर गिना दी जाती है। अगर वह खरीद भी लें, तो पता नहीं कब पैसे मिलें। इसलिए बाजार में अपनी फसल बेच दी है।

-दिगंबर सिंह, किसान
केंद्र प्रभारी को साफ निर्देश दिए हैं कि वह किसानों की मक्का को खरीदें, साथ ही माफिया केंद्रों पर नहीं आने चाहिए। इन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि यथा स्थिति के बारे में पता चल सके। अगर कहीं पर कमी मिलेगी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-प्रकाश नारायण, जिला विपणन अधिकारी
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