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दो लोगों की हत्या का मामलाः चाचा-भतीजे की रंजिश में मारा गया बेकसूर, दो बार कुचला शव
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चिचैटा गांव में विलाप करते रिटायर्ड फौजी के परिवार वाले। संवाद
- फोटो : BADAUN
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इस्लामनगर (बदायूं)। इस्लामनगर इलाके में बृहस्पतिवार रात पुरानी रंजिश में रिटायर्ड फौजी समेत दो लोगों की जान लेली गई। मरने वालों में 16 साल का गौरव भी था। जिससे किसी की रंजिश नहीं थी। वह तो रिटायर्ड फौजी की बाइक पर बैठकर अपनी किताबें लेने इस्लामनगर जा रहा था लेकिन हत्यारोपियों ने रिटायर्ड फौजी के साथ उसकी भी जान ले ली। बताते हैं कि शव को दो बार कुचला गया।
गौरव उर्फ भोला दो भाइयों में बड़ा था। वह 11 वीं का छात्र था। कुछ दिन पहले ही रिटायर्ड फौजी आर्येंद्र पाल सिंह ने उसका रुदायन के नेहरू इंटर कॉलेज में दाखिला कराया था। वह गांव के रिश्ते के चलते गौरव के चाचा लगते थे।
बृहस्पतिवार को आर्येंद्र पाल सिंह बाइक लेकर गांव पहुंचे थे। तभी गौरव उन्हें मिला था। उन्होंने गौरव से पूछा था कि उसने किताबें खरीद लीं या नहीं। उसने मना किया तो आर्येंद्र पाल सिंह ने कहा कि वह उनके साथ इस्लामनगर चले, वह उसे किताबें दिला देंगे। शाम को उनके ही मकान पर रुकना और सुबह गांव लौट जाना, लेकिन इस बीच उसकी और आर्येंद्र पाल की जान लेली गई।
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आर्येंद्र पाल सिंह के परिवार वालों के मुताबिक हत्यारोपियों ने इस घटना को पुरानी रंजिश में अंजाम दिया, लेकिन इसमें गौरव या उसके परिवार का कोई लेना-देना नहीं था। गौरव का परिवार आर्येंद्र पाल सिंह से अलग है। रंजिश आर्येंद्र पाल सिंह और उनके चाचा सुभाष और रामभान के बीच थी।
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तालाब कब्जाने को लेकर शुरू हुई थी मूंछ की लड़ाई
बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव चिचैटा में आर्येंद्र पाल सिंह और उनके चाचा सुभाष और रामभान के बीच रंजिश की वजह एक तालाब है। ये तालाब वर्षों से आर्येंद्र पाल सिंह या उनके बड़े भाई अजेंद्र के कब्जे में रहा। कुछ साल पहले यह तालाब सुभाष और उसके भाई रामभान के कब्जे में आ गया था। उस समय उनके बीच विवाद तो नहीं हुआ था लेकिन अंदर ही अंदर दुश्मनी की आग सुलग रही थी। दोनों पक्षों की आपस में बोलचाल नहीं थी। प्रधानी के चुनाव से लेकर हर चुनाव में उनके अलग-अलग ही दावेदार हुआ करते थे। पहले इनके दादा गांव के प्रधान हुआ करते थे। अनुसूचित जाति की सीट होने के नाते फिलहाल ठाकुर परिवार चुनाव नहीं लड़ सकता था। इस बार भी उन्होंने अलग-अलग उम्मीदवारों का चुनाव लड़ाया था। उसमें आर्येंद्र पाल सिंह के पक्ष का प्रधान और बीडीसी सदस्य जीत गया था। आरोपियों की दूसरी हार तब हुई जब आर्येंद्र पाल सिंह ने 27 मई को तालाब पर फिर कब्जा कर लिया। हालांकि यह कब्जा लिखापढ़ी में हुआ लेकिन यह सब आपसी दुश्मनी बढ़ाने के लिए काफी था। परिवारवालों का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
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फौज से ले लिया था वीआरएस, नेताओं से बना लिए संबंध
आर्येंद्र पाल सिंह वर्ष 1997 में सेना में भर्ती हुए थे। भाई अजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 के दिसंबर माह में भाई ने सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और गांव आकर खेतीबाड़ी देखने लगे। वह संपन्न काश्तकार थे। इसके साथ ही वह राजनीति से जुड़े और भाजपा के जनप्रतिनिधियों से करीबी बना ली। बाद में पार्टी के सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़कर मंडल अध्यक्ष बन गए। सांसद संघमित्रा से लेकर सभी विधायकों व पार्टी नेताओं के साथ आर्येंद्र की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।
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पंद्रह साल पहले प्रधान की हत्या कर गाड़ी से घसीटा था शव
- तब आरोपियों को आकाओं ने बचा लिया, मृतक की पत्नी बोली- अब सजा मिलेगी तो चैन पड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
इस्लामनगर (बदायूं)। गाड़ी से कुचलकर हत्या करने वाले आरोपी कानून को हथेली पर रखकर चलते हैं। वह पहले अपने प्रत्याशी के मुकाबले जीतने वाले प्रधान की इसी तरह हत्या कर चुके हैं। तब शव को तीन किमी तक गाड़ी में बांधकर घसीटा गया था। उस मामले में तब रिपोर्ट हुई तब राजनीतिक आकाओं ने कोई कार्रवाई नहीं होने दी तो उनके हौसले बुलंद हो गए और उसी तरीके से इस घटना को अंजाम दे दिया।
इस बात की जानकारी देते हुए मृतक प्रधान की पत्नी कुसुमा देवी का कहना है कि भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती, अब आरोपियों को सजा मिलेगी तो उन्हें भी सुकून होगा।
यहां बता दें कि वर्ष 2005 में चिचैटा गांव के मदनलाल प्रधान का चुनाव जीते थे। वह आर्येंद्र पाल सिंह पक्ष के थे। इससे आरोपी सुभाष और उसके भाई रामभान को बहुत बुरा लगा था। उन्हें मदनलाल का प्रधान बनना हजम नहीं हो रहा था। इससे वह उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगे। मदनलाल को प्रधान बने मात्र चार माह हुए थे। 11 नवंबर 2005 को आरोपी उन्हें रास्ते से हटाने में कामयाब हो गए। उस दिन मदनलाल साइकिल लेकर इस्लामनगर से गांव लौट रहे थे। रास्ते में उनकी डीसीएम से कुचलकर हत्या कर दी गई। उनके शव को डीसीएम से जंजीर बांधकर करीब तीन किलोमीटर तक घसीटा गया था। उस समय प्रदेश में सपा सरकार थी। बताते हैं कि जिले के एक बड़े नेता का हाथ आरोपी पक्ष पर था। ग्राम प्रधान की हत्या में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पांच दिन बाद इसका खुलासा हुआ तो पुलिस ने सुभाष और उसके भाई रामभान के खिलाफ हत्या का मामला तरमीम कर दिया। यह मामला काफी चर्चा में रहा। आरोपियों के नेताओं से संबंधों के दम पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और कुछ दिन बाद मामला रफादफा कर दिया गया।
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रिटायर्ड फौजी का एक हाथ भी कटा मिला
इस्लामनगर (बदायूं)। रिटायर्ड फौजी की हत्या के मामले में बड़े भाई अजेंद्र पाल सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने पहले उनके भाई को गाड़ी से कुचला था। बाद में धारदार हथियार से हमला किया। फिर उन्होंने भाई के एक हाथ को भी काट दिया। जब तक परिवार वाले मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे।
अजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि आरोपियों ने इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। जैसे ही आर्येंद्र पाल सिंह गांव से इस्लामनगर को निकले कि आरोपी भी उनके पीछे लग गए। रास्ते में कंधरपुर और लभारी के बीच उन्होंने सुनसान सड़क देखकर पहले उन्हें वाहन से टक्कर मारी। जैसे ही वह सड़क पर गिर गए, तभी उन्हें कुचल दिया। बाद में कार से उतरकर आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोपियों ने उनका सीधा हाथ भी काट दिया। घटना के बाद जब पुलिस पहुंची तो आरोपियों के दरवाजे पर ताला लगा मिला। शुक्रवार दोपहर बाद रिटायर्ड फौजी और गौरव के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फौजी के शरीर पर एक्सीडेंटल और धारदार हथियार से कटने के जख्म मिले हैं।
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पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में हुए अंतिम संस्कार
इस्लामनगर के चिचैटा गांव में शुक्रवार देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान इस्लामनगर, उघैती, फैजगंज बेहटा पुलिस मौजूद रही। गांव में पीएसी को भी तैनात किया गया है। रिटायर्ड फौजी के अंतिम संस्कार के दौरान सीओ बिल्सी अनिरुद्ध सिंह भी पहुंच गए थे। उन्होंने गांव में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। संवाद
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गौरव उर्फ भोला दो भाइयों में बड़ा था। वह 11 वीं का छात्र था। कुछ दिन पहले ही रिटायर्ड फौजी आर्येंद्र पाल सिंह ने उसका रुदायन के नेहरू इंटर कॉलेज में दाखिला कराया था। वह गांव के रिश्ते के चलते गौरव के चाचा लगते थे।
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बृहस्पतिवार को आर्येंद्र पाल सिंह बाइक लेकर गांव पहुंचे थे। तभी गौरव उन्हें मिला था। उन्होंने गौरव से पूछा था कि उसने किताबें खरीद लीं या नहीं। उसने मना किया तो आर्येंद्र पाल सिंह ने कहा कि वह उनके साथ इस्लामनगर चले, वह उसे किताबें दिला देंगे। शाम को उनके ही मकान पर रुकना और सुबह गांव लौट जाना, लेकिन इस बीच उसकी और आर्येंद्र पाल की जान लेली गई।
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आर्येंद्र पाल सिंह के परिवार वालों के मुताबिक हत्यारोपियों ने इस घटना को पुरानी रंजिश में अंजाम दिया, लेकिन इसमें गौरव या उसके परिवार का कोई लेना-देना नहीं था। गौरव का परिवार आर्येंद्र पाल सिंह से अलग है। रंजिश आर्येंद्र पाल सिंह और उनके चाचा सुभाष और रामभान के बीच थी।
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तालाब कब्जाने को लेकर शुरू हुई थी मूंछ की लड़ाई
बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव चिचैटा में आर्येंद्र पाल सिंह और उनके चाचा सुभाष और रामभान के बीच रंजिश की वजह एक तालाब है। ये तालाब वर्षों से आर्येंद्र पाल सिंह या उनके बड़े भाई अजेंद्र के कब्जे में रहा। कुछ साल पहले यह तालाब सुभाष और उसके भाई रामभान के कब्जे में आ गया था। उस समय उनके बीच विवाद तो नहीं हुआ था लेकिन अंदर ही अंदर दुश्मनी की आग सुलग रही थी। दोनों पक्षों की आपस में बोलचाल नहीं थी। प्रधानी के चुनाव से लेकर हर चुनाव में उनके अलग-अलग ही दावेदार हुआ करते थे। पहले इनके दादा गांव के प्रधान हुआ करते थे। अनुसूचित जाति की सीट होने के नाते फिलहाल ठाकुर परिवार चुनाव नहीं लड़ सकता था। इस बार भी उन्होंने अलग-अलग उम्मीदवारों का चुनाव लड़ाया था। उसमें आर्येंद्र पाल सिंह के पक्ष का प्रधान और बीडीसी सदस्य जीत गया था। आरोपियों की दूसरी हार तब हुई जब आर्येंद्र पाल सिंह ने 27 मई को तालाब पर फिर कब्जा कर लिया। हालांकि यह कब्जा लिखापढ़ी में हुआ लेकिन यह सब आपसी दुश्मनी बढ़ाने के लिए काफी था। परिवारवालों का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
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फौज से ले लिया था वीआरएस, नेताओं से बना लिए संबंध
आर्येंद्र पाल सिंह वर्ष 1997 में सेना में भर्ती हुए थे। भाई अजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 के दिसंबर माह में भाई ने सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और गांव आकर खेतीबाड़ी देखने लगे। वह संपन्न काश्तकार थे। इसके साथ ही वह राजनीति से जुड़े और भाजपा के जनप्रतिनिधियों से करीबी बना ली। बाद में पार्टी के सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़कर मंडल अध्यक्ष बन गए। सांसद संघमित्रा से लेकर सभी विधायकों व पार्टी नेताओं के साथ आर्येंद्र की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।
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पंद्रह साल पहले प्रधान की हत्या कर गाड़ी से घसीटा था शव
- तब आरोपियों को आकाओं ने बचा लिया, मृतक की पत्नी बोली- अब सजा मिलेगी तो चैन पड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
इस्लामनगर (बदायूं)। गाड़ी से कुचलकर हत्या करने वाले आरोपी कानून को हथेली पर रखकर चलते हैं। वह पहले अपने प्रत्याशी के मुकाबले जीतने वाले प्रधान की इसी तरह हत्या कर चुके हैं। तब शव को तीन किमी तक गाड़ी में बांधकर घसीटा गया था। उस मामले में तब रिपोर्ट हुई तब राजनीतिक आकाओं ने कोई कार्रवाई नहीं होने दी तो उनके हौसले बुलंद हो गए और उसी तरीके से इस घटना को अंजाम दे दिया।
इस बात की जानकारी देते हुए मृतक प्रधान की पत्नी कुसुमा देवी का कहना है कि भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती, अब आरोपियों को सजा मिलेगी तो उन्हें भी सुकून होगा।
यहां बता दें कि वर्ष 2005 में चिचैटा गांव के मदनलाल प्रधान का चुनाव जीते थे। वह आर्येंद्र पाल सिंह पक्ष के थे। इससे आरोपी सुभाष और उसके भाई रामभान को बहुत बुरा लगा था। उन्हें मदनलाल का प्रधान बनना हजम नहीं हो रहा था। इससे वह उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगे। मदनलाल को प्रधान बने मात्र चार माह हुए थे। 11 नवंबर 2005 को आरोपी उन्हें रास्ते से हटाने में कामयाब हो गए। उस दिन मदनलाल साइकिल लेकर इस्लामनगर से गांव लौट रहे थे। रास्ते में उनकी डीसीएम से कुचलकर हत्या कर दी गई। उनके शव को डीसीएम से जंजीर बांधकर करीब तीन किलोमीटर तक घसीटा गया था। उस समय प्रदेश में सपा सरकार थी। बताते हैं कि जिले के एक बड़े नेता का हाथ आरोपी पक्ष पर था। ग्राम प्रधान की हत्या में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पांच दिन बाद इसका खुलासा हुआ तो पुलिस ने सुभाष और उसके भाई रामभान के खिलाफ हत्या का मामला तरमीम कर दिया। यह मामला काफी चर्चा में रहा। आरोपियों के नेताओं से संबंधों के दम पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और कुछ दिन बाद मामला रफादफा कर दिया गया।
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रिटायर्ड फौजी का एक हाथ भी कटा मिला
इस्लामनगर (बदायूं)। रिटायर्ड फौजी की हत्या के मामले में बड़े भाई अजेंद्र पाल सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने पहले उनके भाई को गाड़ी से कुचला था। बाद में धारदार हथियार से हमला किया। फिर उन्होंने भाई के एक हाथ को भी काट दिया। जब तक परिवार वाले मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे।
अजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि आरोपियों ने इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। जैसे ही आर्येंद्र पाल सिंह गांव से इस्लामनगर को निकले कि आरोपी भी उनके पीछे लग गए। रास्ते में कंधरपुर और लभारी के बीच उन्होंने सुनसान सड़क देखकर पहले उन्हें वाहन से टक्कर मारी। जैसे ही वह सड़क पर गिर गए, तभी उन्हें कुचल दिया। बाद में कार से उतरकर आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोपियों ने उनका सीधा हाथ भी काट दिया। घटना के बाद जब पुलिस पहुंची तो आरोपियों के दरवाजे पर ताला लगा मिला। शुक्रवार दोपहर बाद रिटायर्ड फौजी और गौरव के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फौजी के शरीर पर एक्सीडेंटल और धारदार हथियार से कटने के जख्म मिले हैं।
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पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में हुए अंतिम संस्कार
इस्लामनगर के चिचैटा गांव में शुक्रवार देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान इस्लामनगर, उघैती, फैजगंज बेहटा पुलिस मौजूद रही। गांव में पीएसी को भी तैनात किया गया है। रिटायर्ड फौजी के अंतिम संस्कार के दौरान सीओ बिल्सी अनिरुद्ध सिंह भी पहुंच गए थे। उन्होंने गांव में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। संवाद

इसी गाड़ी से मारी गई टक्कर। संवाद- फोटो : BADAUN