अफसरों की चाकरी से सफाई अभियान का बेड़ागर्क
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केंद्र और प्रदेश सरकार ने जिस प्रशासनिक मशीनरी पर स्वच्छ भारत मिशन का जिम्मा सौंपा है, अगर वहीं इस अभियान की सफलता में रोड़ा बन जाएं, तो क्या उम्मीद की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश का हर गांव गंदगी से मुक्त हो और एक भी व्यक्ति खुले में शौच को न जाए। लेकिन जिले के आला अफसरों ने गांवों में तैनात करीब 300 सफाई कर्मियों को अपनी चाकरी में लगा दिया है। ऐसे में गांवों से गंदगी कैसे साफ होगी, समझा जा सकता है। गांवों में तैनात सफाई कर्मियों को गांव के गली-मुहल्लों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई का जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए ग्राम निधि खाते से उन्हें सफाई उपकरण भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन अधिकतर कर्मचारी सफाई कार्य से बचने को अफसरों और नेताओं की शरण में चले गए हैं। इनमें कर्मचारी, अफसरों के चालक, कंप्यूटर आपरेटर, अर्दली, रसोइए आदि के काम निपटाने लगे, जबकि नौकरी पाने के लिए वह खुद गंदे नालों में सफाई के लिए कूद गए थे। ग्राम प्रधान तहसील दिवस, जिलाधिकारी दरबार सहित विभिन्न स्थानों पर शिकायत कर उनके यहां तैनात सफाई कर्मियों को भेजने की मांग करते रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। कुछ सफाई कर्मचारियों ने तो अपने स्थान पर दिहाड़ी में अन्य सफाई कर्मचारियों को लगा दिया है और खुद मौज कर रहे हैं। गांवों के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों का यही हाल है। शौचालय में गंदगी से लेकर पूरा परिसर कूड़े से पटा पड़ा है। स्कूलों में बच्चे आए दिन बीमार हो रहे हैं। कुछ गांवों में बच्चों की गंदगी और बुखार की वजह से मौत भी हो चुकी हैं। वहीं जिले में करीब 220 गांव गैरआबाद हैं, लेकिन इन गांवों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती है। खास बात यह है कि जब गांव में लोग रहते ही नहीं हैं तो यहां सफाई कर्मचारी क्यों तैनात कर दिया। यह सवाल खुद अनसुलझा हुआ है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती की बात गलत है।