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सरसों और आलू की फसल पर फिर संकट, ..गेहूं के अच्छे दिन शुरू
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उझानी (बदायूं)। मंगलवार तड़के से बूंदाबांदी शुरू हो जाने से सब्जी फसलों समेत सरसों पर अमंगल की आशंका बढ़ गई है। पूरे दिन हालांकि न तो तेज हवा चली और न ही आसमान से मोटी बूंदे गिरीं, लेकिन मौसम के मिजाज ने उत्पादकों की परेशानी इसलिए बढ़ा दी है कि अगर बारिश के दौरान हवा के झोंके चले तो खासकर सरसों तो खेतों में ही बिछ जाएगी। पिछले महीने की तरह एक बार फिर से बूंदाबांदी ने गेहूं की फसल के लिए अच्छे दिनों का आगाज कर दिया है। गेहूं को तो नमी का माहौल चाहिए।
गेहूं की फसल इन दिनों बढ़वार की ओर है। कहीं दूसरी तो किसी इलाके में तीसरी सिंचाई के करीब गेहूं के लिए जिस तरह का तापमान चाहिए, वह मौसम के बदले मिजाज की वजह से मिल भी रहा है। उत्पादकों की मानें तो बुआई के बाद कल्ले फूटने के समय बारिश ने गेहूं की फसल में संजीवनी का काम कर दिया था। इसके बाद भी रुक - रुक कर दो बार बूंदाबांदी हो गई। सोमवार देर रात और मंगलवार सुबह में बूंदाबांदी से गेहूं की फसल पर हरियाली नजर आई। दिक्कत में सरसों समेत सब्जी फसलें हैं। अगेती आलू की खुदाई का काम चल रहा है तो सरसों की फलियों में दाना पकने की ओर बढ़ रहा है। किसानों में गद्दीटोला मोहल्ले के वैसर अली ने बताया कि तेज बारिश या फिर ओलाव़ृष्टि होने से सबसे ज्यादा नुकसान ही सरसों को होगा। आलू की फसल में पानी भरा तो कंद सड़ने के कगार पर पहुंच जाएगा। सब्जी फसलों में फूल गोभी, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, मटर आदि में कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। यही सोचकर कड़ाके की ठंड में सब्जी उत्पादकों के चेहरे पर पसीना छूटने लग गया है।
उझानी। बारिश के दिनों में सब्जी फसलों पर नुकसान की आशंका के बीच एक बार फिर से आलू समेत हरी सब्जियों पर महंगाई की मार बरकरार बनी हुई है। नया आलू फुटकर में 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। टमाटर 25 तो मटर 40 रुपया प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि गोभी ज्यादा महंगी नहीं है, लेकिन सब्जी कारोबारियों की मानें तो बारिश होने की स्थिति में सब्जियों के फुटकर रेट में वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता।
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बूंदाबांदी से फिलहाल किसी भी फसल में कोई नुकसान नहीं है। बारिश तेज होने या फिर ओले गिरने की स्थिति में सब्जी फसलें प्रभावित होंगी। सरसों को ज्यादा नुकसान होगा। गेहूं की फसल तो पहले से भी अच्छी नजर आ रही है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र।
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गेहूं की फसल इन दिनों बढ़वार की ओर है। कहीं दूसरी तो किसी इलाके में तीसरी सिंचाई के करीब गेहूं के लिए जिस तरह का तापमान चाहिए, वह मौसम के बदले मिजाज की वजह से मिल भी रहा है। उत्पादकों की मानें तो बुआई के बाद कल्ले फूटने के समय बारिश ने गेहूं की फसल में संजीवनी का काम कर दिया था। इसके बाद भी रुक - रुक कर दो बार बूंदाबांदी हो गई। सोमवार देर रात और मंगलवार सुबह में बूंदाबांदी से गेहूं की फसल पर हरियाली नजर आई। दिक्कत में सरसों समेत सब्जी फसलें हैं। अगेती आलू की खुदाई का काम चल रहा है तो सरसों की फलियों में दाना पकने की ओर बढ़ रहा है। किसानों में गद्दीटोला मोहल्ले के वैसर अली ने बताया कि तेज बारिश या फिर ओलाव़ृष्टि होने से सबसे ज्यादा नुकसान ही सरसों को होगा। आलू की फसल में पानी भरा तो कंद सड़ने के कगार पर पहुंच जाएगा। सब्जी फसलों में फूल गोभी, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, मटर आदि में कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। यही सोचकर कड़ाके की ठंड में सब्जी उत्पादकों के चेहरे पर पसीना छूटने लग गया है।
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उझानी। बारिश के दिनों में सब्जी फसलों पर नुकसान की आशंका के बीच एक बार फिर से आलू समेत हरी सब्जियों पर महंगाई की मार बरकरार बनी हुई है। नया आलू फुटकर में 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। टमाटर 25 तो मटर 40 रुपया प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि गोभी ज्यादा महंगी नहीं है, लेकिन सब्जी कारोबारियों की मानें तो बारिश होने की स्थिति में सब्जियों के फुटकर रेट में वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता।
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बूंदाबांदी से फिलहाल किसी भी फसल में कोई नुकसान नहीं है। बारिश तेज होने या फिर ओले गिरने की स्थिति में सब्जी फसलें प्रभावित होंगी। सरसों को ज्यादा नुकसान होगा। गेहूं की फसल तो पहले से भी अच्छी नजर आ रही है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र।