{"_id":"571646524f1c1bbc488b45a6","slug":"moment-of-poor-rations-kotedar-and-mafia","type":"story","status":"publish","title_hn":"गरीबों के राशन से पल रहे कोटेदार और माफिया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गरीबों के राशन से पल रहे कोटेदार और माफिया
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2016 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उपभोक्ताओं को राशनकार्ड फीडिंग के बाद भी नहीं मिल रहा लाभ
ऑनलाइन फीडिंग के बाद पर्ची हासिल करने वाले भी अनाज से वंचित
सस्ते में राशन मुहैया कराए जाने की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अड़ी तादाद में राशन उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोटेदारों की मनमानी और विभाग की मजबूरी में फंसे उपभोक्ता ऑनलाइन फीडिंग और राशन कार्ड के लिए पर्ची हासिल करने को चकरघिन्नी बने हुए हैं। कागजों पर उनका सस्ता राशन लगातार वितरित हो रहा है। कोटेदार सस्ता अनाज हड़पकर डकार भी नहीं ले रहे। इसके लिए प्रशासन की ढुलमुल नीति भी जिम्मेदार बनी हुई है।
अप्रैल में आवंटित अनाज की स्थिति
बदायूं। इस बार अप्रैल के खाद्यान आवंटन में प्रचलित अंत्योदय योजना के 45221 राशन कार्डों के लिए 15 किग्रा गेहूं, 20 किग्रा चावल के हिसाब से 678.315 मीट्रिक टन गेहूं, 904.420 मीट्रिक टन चावल दिया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित लोगों को 3.500 किग्रा गेहूं और 1.500 किग्रा क्रमश: दो रुपये और तीन रुपये प्रति किग्रा की कीमत पर देने को आवंटन किया गया। इसके लिए 6182.2285 मीट्रिक टन गेहूं और 2649.5265 मीट्रिक टन चावल का आवंटन किया गया है।
जिले में कार्ड धारक और कोटेदारों की स्थिति
बदायूं। जिले के 15 ब्लाक क्षेत्रों में 1038 ग्राम पंचायतें हैं। 13 नगर पंचायतें, छह नगर पालिकाएं हैं। इनमें 201 नगर क्षेत्र में और 1179 ग्रामीण क्षेत्र में राशन की दुकानें हैं। अंत्योदय के राशन कार्ड 45221 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 3,70,000 राशन कार्ड धारक हैं। 1,60,000 सामान्य राशन कार्ड हैं। सभी के लिए अप्रैल तक का उठान हो गया है।
विज्ञापन
कोटेदार कर रहें हैं उपभोक्ताओं के हक से खेल
बदायूं। यहां कोटेदारों का खेल यह है कि जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्ड हैं, उन उपभोक्ताओं को कहा जाता है कि वह ऑनलाइन फीडिंग करा लें। फीडिंग के बाद रसीद ले लें। इस रसीद से कार्ड की प्रतिलिपि मिलती है। प्रधान, कोटेदार के पास और कोटेदार, प्रधान के पास भेज उपभोक्ता का भटका रहा है। अलावा इसके हर गांव में एनएफएसए के तहत 30 से 50 प्रतिशत तक फर्जी राशन कार्ड बनाए गए हैं। ऑनलाइन हुए बहुत कम उपभोक्ताओं को ही राशन मिल पा रहा है।
मजरा गंगवरार एनएफएसए की मजाक का नमूना
बदायूं। कादरचौक ब्लाक के गांव मजरा गंगवरार की राशन कार्ड की लिस्ट में आधे-आधे उपभोक्ता गांव और गांव से बाहर के हैं। इस गांव में मुस्लिम नहीं हैं फिर भी मुस्लिमों के नाम राशन कार्ड की लिस्ट में हैं। प्रधान राजेश्वर सिंह ने बताया कि आपूर्ति विभाग ने राशन कार्डों की फीडिंग कराई थी, उसमें इतनी गलतियां हैं कि तमाम लोग इसी बहाने राशन लेने से वंचित हो रहे हैं। ऐसा यह अकेला गांव नहीं है, जिले के हर गांव में ऐसा ही हाल है। नेताओं के संरक्षण में होने के कारण कोटेदारों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। मजरा गंगवरार के राजेश्वर सिंह कश्यप उर्फ राजू प्रधान का कहना है कि वह यह मामला ऊपर तक पहुंचाएंगे। कहा, अब तक तमाम शिकायतें की गईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
-----
जो शिकायतें आती हैं, उनका तुरंत निस्तारण किया जाता है। एनएफएसए अभी लागू हुआ है। कुछ समस्याएं हैं, जो समस्याएं उनके पास आती हैं उनका निदान किया जाता है। इस तरह काफी सुधार हो चुका है और सुधार हो रहा है। कुछ समय में व्यवस्था पूरी तरह से सुदृढ हो जाएगी।
-सत्यदेव, जिला पूर्ति अधिकारी
ऑनलाइन फीडिंग के बाद पर्ची हासिल करने वाले भी अनाज से वंचित
सस्ते में राशन मुहैया कराए जाने की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अड़ी तादाद में राशन उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोटेदारों की मनमानी और विभाग की मजबूरी में फंसे उपभोक्ता ऑनलाइन फीडिंग और राशन कार्ड के लिए पर्ची हासिल करने को चकरघिन्नी बने हुए हैं। कागजों पर उनका सस्ता राशन लगातार वितरित हो रहा है। कोटेदार सस्ता अनाज हड़पकर डकार भी नहीं ले रहे। इसके लिए प्रशासन की ढुलमुल नीति भी जिम्मेदार बनी हुई है।
अप्रैल में आवंटित अनाज की स्थिति
बदायूं। इस बार अप्रैल के खाद्यान आवंटन में प्रचलित अंत्योदय योजना के 45221 राशन कार्डों के लिए 15 किग्रा गेहूं, 20 किग्रा चावल के हिसाब से 678.315 मीट्रिक टन गेहूं, 904.420 मीट्रिक टन चावल दिया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित लोगों को 3.500 किग्रा गेहूं और 1.500 किग्रा क्रमश: दो रुपये और तीन रुपये प्रति किग्रा की कीमत पर देने को आवंटन किया गया। इसके लिए 6182.2285 मीट्रिक टन गेहूं और 2649.5265 मीट्रिक टन चावल का आवंटन किया गया है।
विज्ञापन
जिले में कार्ड धारक और कोटेदारों की स्थिति
बदायूं। जिले के 15 ब्लाक क्षेत्रों में 1038 ग्राम पंचायतें हैं। 13 नगर पंचायतें, छह नगर पालिकाएं हैं। इनमें 201 नगर क्षेत्र में और 1179 ग्रामीण क्षेत्र में राशन की दुकानें हैं। अंत्योदय के राशन कार्ड 45221 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 3,70,000 राशन कार्ड धारक हैं। 1,60,000 सामान्य राशन कार्ड हैं। सभी के लिए अप्रैल तक का उठान हो गया है।
विज्ञापन
कोटेदार कर रहें हैं उपभोक्ताओं के हक से खेल
बदायूं। यहां कोटेदारों का खेल यह है कि जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्ड हैं, उन उपभोक्ताओं को कहा जाता है कि वह ऑनलाइन फीडिंग करा लें। फीडिंग के बाद रसीद ले लें। इस रसीद से कार्ड की प्रतिलिपि मिलती है। प्रधान, कोटेदार के पास और कोटेदार, प्रधान के पास भेज उपभोक्ता का भटका रहा है। अलावा इसके हर गांव में एनएफएसए के तहत 30 से 50 प्रतिशत तक फर्जी राशन कार्ड बनाए गए हैं। ऑनलाइन हुए बहुत कम उपभोक्ताओं को ही राशन मिल पा रहा है।
मजरा गंगवरार एनएफएसए की मजाक का नमूना
बदायूं। कादरचौक ब्लाक के गांव मजरा गंगवरार की राशन कार्ड की लिस्ट में आधे-आधे उपभोक्ता गांव और गांव से बाहर के हैं। इस गांव में मुस्लिम नहीं हैं फिर भी मुस्लिमों के नाम राशन कार्ड की लिस्ट में हैं। प्रधान राजेश्वर सिंह ने बताया कि आपूर्ति विभाग ने राशन कार्डों की फीडिंग कराई थी, उसमें इतनी गलतियां हैं कि तमाम लोग इसी बहाने राशन लेने से वंचित हो रहे हैं। ऐसा यह अकेला गांव नहीं है, जिले के हर गांव में ऐसा ही हाल है। नेताओं के संरक्षण में होने के कारण कोटेदारों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। मजरा गंगवरार के राजेश्वर सिंह कश्यप उर्फ राजू प्रधान का कहना है कि वह यह मामला ऊपर तक पहुंचाएंगे। कहा, अब तक तमाम शिकायतें की गईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
-----
जो शिकायतें आती हैं, उनका तुरंत निस्तारण किया जाता है। एनएफएसए अभी लागू हुआ है। कुछ समस्याएं हैं, जो समस्याएं उनके पास आती हैं उनका निदान किया जाता है। इस तरह काफी सुधार हो चुका है और सुधार हो रहा है। कुछ समय में व्यवस्था पूरी तरह से सुदृढ हो जाएगी।
-सत्यदेव, जिला पूर्ति अधिकारी