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सिफारिश लेकर पहुंचे विधायक को डीएम और एडीएम ने पढ़ाया शासनादेश का पाठ
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बदायूं। योगी सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में सरकार समेत जनप्रतिनिधि अपने कार्यकाल की उपलब्धियां जनता तक पहुंचा रहे हैं। तीन साल के कार्यकाल में भले ही सड़क, सुरक्षा, महिलाओं के साथ अपराध आदि मुद्दों पर जनता को आश्वासन और वायदों से ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो पाया हो, लेकिन जनप्रतिनिधि इन तीन सालों में विकास की गंगा बहने की बात करने से नहीं चूक रहे। यह बात अलग है कि जनप्रतिनिधि विकास कार्यों से ज्यादा ठेकेदारों की सिफारिश करने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। इसका उदाहरण बुधवार को देखने को मिला, जब जिले के एक युवा विधायक डीएम के यहां एक ठेकेदार की सिफारिश में पहुंच गए कि दस लाख से ज्यादा का टेंडर मैनुअल कर दिया जाए। डीएम ने एडीएम प्रशासन को चर्चा के लिए बुलाया लेकिन एडीएम ने साफ कह दिया कि वह शासन की मंशा के अनुरूप ही कार्य करेंगी।
दोपहर के वक्त डीएम कुमार प्रशांत के कार्यालय में एक विधायक पहुंचे। दरअसल, विधायक यहां कुछ ठेकेदारों की सिफारिश में आए थे कि कुछ टेंडर मैनुअल करा दिए जाएं जबकि शासन के आदेश हैं कि पारदर्शिता लाने के यह जरूरी है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाए। विधायक ने इस मुद्दे पर डीएम से बात की तो डीएम ने भी उन्हें शासनादेशों का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने फरियाद जारी रखी। इस पर डीएम ने एडीएम प्रशासन ऋतु पूनिया को बुला लिया और उन्हें मामले से अवगत कराया। इस पर एडीएम ने साफ कह दिया कि शासन के साफ आदेश हैं कि कार्य में पारदर्शिता के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके लिए वह एक पखवाड़े पूर्व सभी नगर पालिकाओं और पंचायतों को पत्र भी जारी कर चुकी हैं कि निर्धारित धनराशि के ऊपर के टेंडर ईं-टेंडरिंग से ही करवाए जाएं। हालांकि विधायक ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने शासनदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट मना कर दिया। जिस पर कुछ देर बैठने के बाद विधायक बैरंग लौट गए।
ईं-टेंडरिंग का मतलब है कि कहीं पर कोई भी व्यक्ति शर्तों को पूरा करके ठेका ले सकता है। इससे सभी चीजें पारदर्शी बनी रहती हैं। शासनादेश भी यही है और उससे ऊपर कुछ भी नहीं है। शासन की मंशा के विपरीत कोई काम नहीं होगा।
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- ऋतु पूनिया, एडीएम प्रशासन
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दोपहर के वक्त डीएम कुमार प्रशांत के कार्यालय में एक विधायक पहुंचे। दरअसल, विधायक यहां कुछ ठेकेदारों की सिफारिश में आए थे कि कुछ टेंडर मैनुअल करा दिए जाएं जबकि शासन के आदेश हैं कि पारदर्शिता लाने के यह जरूरी है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाए। विधायक ने इस मुद्दे पर डीएम से बात की तो डीएम ने भी उन्हें शासनादेशों का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने फरियाद जारी रखी। इस पर डीएम ने एडीएम प्रशासन ऋतु पूनिया को बुला लिया और उन्हें मामले से अवगत कराया। इस पर एडीएम ने साफ कह दिया कि शासन के साफ आदेश हैं कि कार्य में पारदर्शिता के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके लिए वह एक पखवाड़े पूर्व सभी नगर पालिकाओं और पंचायतों को पत्र भी जारी कर चुकी हैं कि निर्धारित धनराशि के ऊपर के टेंडर ईं-टेंडरिंग से ही करवाए जाएं। हालांकि विधायक ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने शासनदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट मना कर दिया। जिस पर कुछ देर बैठने के बाद विधायक बैरंग लौट गए।
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ईं-टेंडरिंग का मतलब है कि कहीं पर कोई भी व्यक्ति शर्तों को पूरा करके ठेका ले सकता है। इससे सभी चीजें पारदर्शी बनी रहती हैं। शासनादेश भी यही है और उससे ऊपर कुछ भी नहीं है। शासन की मंशा के विपरीत कोई काम नहीं होगा।
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- ऋतु पूनिया, एडीएम प्रशासन