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मिड-डे मील का हिसाब लेगी यूनिसेफ
बदायूं।
Updated Wed, 24 Dec 2014 08:45 PM IST
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परिषदीय विद्यालयों में बंटने वाले मिड-डे मील के वितरण और उसकी कंवर्जन कास्ट पर अब यूनिसेफ नजर रखेगी। जिससे मिड-डे मील योजना में खेल न हो सके। हर स्कूल के लिए कितना भोजन बना, कितना खिलाया, कितना बचा। इसका पूरा विवरण देना होगा। इसके लिए खासतौर से इंस्पेक्शन रजिस्टर में पूरा ब्योरा भरवाया जाएगा। जिसमें बिंदुवार रिपोर्ट लिखी जाएगी।
परिषदीय स्कूलों में करीब नौ साल पहले मध्याह्न भोजन योजना शुरू हुई थी। करोड़ों की इस योजना में जिम्मेदार लगातार बंदरबांट करते आ रहे हैं। कंवर्जन कास्ट पूरी लेने के बावजूद स्कूलों में आधा अधूरा खाना बनता है। अक्सर घटिया खाना बच्चों को परोस दिया जाता है। अब यह लापरवाही और खेल ज्यादा दिन नहीं चल सकेगा। क्योंकि एमडीएम परिषद की योजना पर यूनिसेफ की पूरी नजर रहेगी।
यूनिसेफ स्कूलों में रजिस्टर बांटेगा। उसमें एमडीएम का कॉलम रखा गया है। बिंदुवार रिपोर्ट के साथ लेखा-जोखा भी इसमें दर्शाना होगा। हालांकि स्कूलों में रजिस्टर पहले भी भरे जाते थे, लेकिन इनकी मॉनीटिरिंग में विभागीय अधिकारी भी लापरवाही बरत जाते थे। शिक्षकों पर भी रजिस्टर और बच्चों के संख्या में हेराफेरी के आरोप लगते रहे हैं। नए रजिस्टर में एमडीएम खाद्यान्न और कंवर्जन कास्ट की चोरी रोकने का भी विकल्प शामिल किया गया है। यूनिसेफ के फूल मोहम्मद अंसारी बताते हैं कि इस रजिस्टर में तारीख, बच्चाें की संख्या के बाद इसका जोड़ का कॉलम बनाया गया है। इसमें गलती की गुंजाइश ही नहीं छोड़ी गई है। कटिंग की मनाही है। साथ ही अगर कोई भी स्कूल कॉलम खाली छोड़ता है, उसपर कार्रवाई भी की जाएगी।
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इन बिंदुओं पर होगा खास फोकस
प्रतिदिन के रिकार्ड में कितने बच्चों ने भोजन खाया, अब तक के छात्रों की संख्या, कितनों ने हाथ धोया, कंवर्जन कास्ट कितनी आई, कितनी खर्च हुई, कितनी कंवर्जन कास्ट बची, किन शिक्षक, रसोईया ने भोजन चखा, स्टॉक कितना आया और कितना बचा आदि बिंदुओं पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। इसमें प्रतिदिन प्रधानाध्यापक को हस्ताक्षर भी करने अनिवार्य होंगे।
यूनिसेफ के इंस्पेक्शन रजिस्टर में एमडीएम का रिकार्ड रखा जाएगा। इसमें पांच साल का रिकार्ड रखा जा सकता है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी भी नहीं की जा सकेगी। इसे स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन नए सत्र से ही यह पूर्ण रूप से लागू होगा। - शशि देवी शर्मा, एडी बेसिक
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परिषदीय स्कूलों में करीब नौ साल पहले मध्याह्न भोजन योजना शुरू हुई थी। करोड़ों की इस योजना में जिम्मेदार लगातार बंदरबांट करते आ रहे हैं। कंवर्जन कास्ट पूरी लेने के बावजूद स्कूलों में आधा अधूरा खाना बनता है। अक्सर घटिया खाना बच्चों को परोस दिया जाता है। अब यह लापरवाही और खेल ज्यादा दिन नहीं चल सकेगा। क्योंकि एमडीएम परिषद की योजना पर यूनिसेफ की पूरी नजर रहेगी।
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यूनिसेफ स्कूलों में रजिस्टर बांटेगा। उसमें एमडीएम का कॉलम रखा गया है। बिंदुवार रिपोर्ट के साथ लेखा-जोखा भी इसमें दर्शाना होगा। हालांकि स्कूलों में रजिस्टर पहले भी भरे जाते थे, लेकिन इनकी मॉनीटिरिंग में विभागीय अधिकारी भी लापरवाही बरत जाते थे। शिक्षकों पर भी रजिस्टर और बच्चों के संख्या में हेराफेरी के आरोप लगते रहे हैं। नए रजिस्टर में एमडीएम खाद्यान्न और कंवर्जन कास्ट की चोरी रोकने का भी विकल्प शामिल किया गया है। यूनिसेफ के फूल मोहम्मद अंसारी बताते हैं कि इस रजिस्टर में तारीख, बच्चाें की संख्या के बाद इसका जोड़ का कॉलम बनाया गया है। इसमें गलती की गुंजाइश ही नहीं छोड़ी गई है। कटिंग की मनाही है। साथ ही अगर कोई भी स्कूल कॉलम खाली छोड़ता है, उसपर कार्रवाई भी की जाएगी।
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इन बिंदुओं पर होगा खास फोकस
प्रतिदिन के रिकार्ड में कितने बच्चों ने भोजन खाया, अब तक के छात्रों की संख्या, कितनों ने हाथ धोया, कंवर्जन कास्ट कितनी आई, कितनी खर्च हुई, कितनी कंवर्जन कास्ट बची, किन शिक्षक, रसोईया ने भोजन चखा, स्टॉक कितना आया और कितना बचा आदि बिंदुओं पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। इसमें प्रतिदिन प्रधानाध्यापक को हस्ताक्षर भी करने अनिवार्य होंगे।
यूनिसेफ के इंस्पेक्शन रजिस्टर में एमडीएम का रिकार्ड रखा जाएगा। इसमें पांच साल का रिकार्ड रखा जा सकता है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी भी नहीं की जा सकेगी। इसे स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन नए सत्र से ही यह पूर्ण रूप से लागू होगा। - शशि देवी शर्मा, एडी बेसिक