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नहीं होगी मिड-डे मील की समस्या, एसएमसी के खातों में पहुंचने लगी कनवर्जन कास्ट
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बदायूं। परिषदीय विद्यालयों की विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के खातों में ‘कनवर्जन कास्ट’ नहीं पहुंचने की वजह से कई विद्यालयों ने मिड-डे मील बनाने से इन्कार कर दिया था, साथ ही कुछेक विद्यालयों ने मिड-डे मील बनाना ही बंद भी कर दिया था। उन्होंने इस बारे में बीएसए को अवगत कराया था, जिसके बाद में विभाग में हरकत हुई तो बीएसए ने जिला समन्वयक मिड-डे मील को कनवर्जन कास्ट भेजने के निर्देश दिए। अब एसएमसी के खातों में रुपये पहुंचने लगे हैं, इसलिए अब मिड डे मील फिर से बनने लगेगा।
प्रदेश सरकार की तरफ से प्राथमिक विद्यालयों में एक सितंबर 2004 से मिड-डे मील योजना को संचालित किया गया था, जिसका रिस्पांस ठीक मिलने पर एक अक्तूबर 2007 उच्च प्राथमिक विद्यालय में इस योजना को लागू किया गया। वर्तमान में जिले में 1815 प्राथमिक और 738 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में योजना संचालित की जा रही है। इन विद्यालयों में मिड-डे मील बनाने के लिए 4273 रसोईयों की तैनाती की गई है। इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्कूल को मिड-डे मील बनाने के लिए एसएमसी के खातों में कनवर्जन कास्ट दी जाती है। लेकिन तीन-चार माह से अधिकांश स्कूलों में कनवर्जन कास्ट खातों में नहीं पहुंच रही थी, जिसकी वजह से स्कूल प्रबंधन ने मिड डे मील योजना को संचालित रखने में असमर्थता जताते हुए बंद करने की बात की, तो कुछेक विद्यालयों ने योजना को पूरी तरह से बंद कर दिया। इसकी जानकारी जब बीएसए को हुई, तो उन्होंने मिड डे मील जिला समन्वयक हिना खान से जानकारी ली, तो उन्होंने बताया था पहले बजट नहीं था, जिसकी वजह कुछ जगहों पर दिक्कत हुई है। अब शासन से बजट मिल गया है, जो खातों में भेजा जा रहा है। तीन जनवरी से जब स्कूल खुलेंगे तो अधिकांश विद्यालयों के खातों में धनराशि पहुंच चुकी होगी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अधिकांश विद्यालयों में मिड डे मील फिर से शुरू हो जाएगा।
हां, कुछ विद्यालयों ने लिखकर दिया था कि कनवर्जन कास्ट नहीं मिल पाने की वजह से वे अब मिड डे मील नहीं चला पाएंगे। उन विद्यालयों समेत अन्य विद्यालयों में कनवर्जन कास्ट भेजी जा रही है। जब तक विद्यालय खुलेंगे, तब तक सभी खातों में धनराशि पहुंच जाएगी। उसके बाद में विद्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद में जो विद्यालय मिड डे मील नहीं बनाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-हिना खान, जिला समन्वयक मिड डे मील
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प्रदेश सरकार की तरफ से प्राथमिक विद्यालयों में एक सितंबर 2004 से मिड-डे मील योजना को संचालित किया गया था, जिसका रिस्पांस ठीक मिलने पर एक अक्तूबर 2007 उच्च प्राथमिक विद्यालय में इस योजना को लागू किया गया। वर्तमान में जिले में 1815 प्राथमिक और 738 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में योजना संचालित की जा रही है। इन विद्यालयों में मिड-डे मील बनाने के लिए 4273 रसोईयों की तैनाती की गई है। इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्कूल को मिड-डे मील बनाने के लिए एसएमसी के खातों में कनवर्जन कास्ट दी जाती है। लेकिन तीन-चार माह से अधिकांश स्कूलों में कनवर्जन कास्ट खातों में नहीं पहुंच रही थी, जिसकी वजह से स्कूल प्रबंधन ने मिड डे मील योजना को संचालित रखने में असमर्थता जताते हुए बंद करने की बात की, तो कुछेक विद्यालयों ने योजना को पूरी तरह से बंद कर दिया। इसकी जानकारी जब बीएसए को हुई, तो उन्होंने मिड डे मील जिला समन्वयक हिना खान से जानकारी ली, तो उन्होंने बताया था पहले बजट नहीं था, जिसकी वजह कुछ जगहों पर दिक्कत हुई है। अब शासन से बजट मिल गया है, जो खातों में भेजा जा रहा है। तीन जनवरी से जब स्कूल खुलेंगे तो अधिकांश विद्यालयों के खातों में धनराशि पहुंच चुकी होगी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अधिकांश विद्यालयों में मिड डे मील फिर से शुरू हो जाएगा।
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हां, कुछ विद्यालयों ने लिखकर दिया था कि कनवर्जन कास्ट नहीं मिल पाने की वजह से वे अब मिड डे मील नहीं चला पाएंगे। उन विद्यालयों समेत अन्य विद्यालयों में कनवर्जन कास्ट भेजी जा रही है। जब तक विद्यालय खुलेंगे, तब तक सभी खातों में धनराशि पहुंच जाएगी। उसके बाद में विद्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद में जो विद्यालय मिड डे मील नहीं बनाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-हिना खान, जिला समन्वयक मिड डे मील