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पुलिस के खिलाफ भड़के जिला अस्पताल कर्मी, काम बंद करके धरने पर बैठे, नारेबाजी
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बदायूं। जिले में 13 लोग कोरोना संक्रमित मिलने के बाद लॉकडाउन का पालन कराने को लेकर अफसरों ने सख्ती बढ़ा दी है। बावजूद इसके कुछ लोग बेवजह सड़कों पर घूम रहे हैं। ऐसे लोगों की वजह से सख्ती का खामियाजा उन लोगों को झेलना पड़ा रहा है जो किसी न किसी तरह कोरोना के खिलाफ जंग में शामिल हैं। गुरुवार को पुलिस ने एक स्टॉफ नर्स की स्कूटी का चालान कर दिया। इसका पता लगने पर स्वास्थ्य कर्मी भड़क गए और काम बंद करके पुलिस के खिलाफ जिला अस्पताल में धरने पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसका पता लगने पर प्रशासन में खलबली मच गई। स्वास्थ्य कर्मियों का धरना खत्म कराने के लिए डीएम को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। डीएम ने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ है। आगे किसी कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
जिला अस्पताल में तैनात स्टॉफ नर्स लक्ष्मी गुरुवार सुबह पौने आठ बजे अपने पति के साथ स्कूटी से ड्यूटी पहुंची। स्टॉफ नर्स लक्ष्मी के मुताबिक उन्हें छोड़ने के बाद उनके पति जिला अस्पताल से स्कूटी पर घर लौट रहे थे। रास्ते में ओवरब्रिज से आगे पहुंचने पर उन्हें पुलिस ने उन्हें रोक लिया और स्कूटी का चालान कर दिया। उन्होंने पुलिस को जिला अस्पताल स्वास्थ्य कर्मी पत्नी को छोड़कर आने के बात बताई, लेकिन उनकी बातों पर पुलिस कर्मियों ने विश्वास नहीं किया। आरोप है कि पूरी बात बताने के बावजूद मौके पर मौजूद दरोगा ने स्टॉफ नर्स की स्कूटी का चालान कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी पत्नी लक्ष्मी को दी। लक्ष्मी ने साथी कर्मचारियों को बताया तो मामला तूल पकड़ गया। जिला अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाते हुए काम बंद कर दिया। कुछ ही देर में सभी कर्मचारी इकट्ठे होकर जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि दो दिन पहले पुलिस ने लालपुल पर लैब टेक्नीशियन दिनेश की बाइक का चालान कर दिया था। इसके अलावा जिला अस्पताल के कर्मचारियों को रोजाना परेशान किया जा रहा है।
जिला अस्पताल कर्मियों के धरने पर बैठने का पता लगने पर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम कुमार प्रशांत ने फोन पर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल से बात की। डीएम ने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कोई परेशानी नहीं होगी। डीएम की बात सीएमएस ने कर्मचारियों को बताई। डीएम के आश्वासन पर कुछ देर बाद ही कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर दिया और काम पर लौट गए।
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लॉकडाउन चल रहा है तो पुलिस को लोगों को चेक करेगी। इसमें बुरा मानने वाली बात नहीं है। पुलिस के खिलाफ कुछ गलतफहमी हुई थी, जिससे कर्मचारी कुछ देर के लिए एकत्र हो गए थे। बाद में उन्हें समझा दिया गया। कर्मचारियों के नए सिरे से पास बनवाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को दिक्कत नहीं आए। - डॉ. सुकुमार अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में तैनात स्टॉफ नर्स लक्ष्मी गुरुवार सुबह पौने आठ बजे अपने पति के साथ स्कूटी से ड्यूटी पहुंची। स्टॉफ नर्स लक्ष्मी के मुताबिक उन्हें छोड़ने के बाद उनके पति जिला अस्पताल से स्कूटी पर घर लौट रहे थे। रास्ते में ओवरब्रिज से आगे पहुंचने पर उन्हें पुलिस ने उन्हें रोक लिया और स्कूटी का चालान कर दिया। उन्होंने पुलिस को जिला अस्पताल स्वास्थ्य कर्मी पत्नी को छोड़कर आने के बात बताई, लेकिन उनकी बातों पर पुलिस कर्मियों ने विश्वास नहीं किया। आरोप है कि पूरी बात बताने के बावजूद मौके पर मौजूद दरोगा ने स्टॉफ नर्स की स्कूटी का चालान कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी पत्नी लक्ष्मी को दी। लक्ष्मी ने साथी कर्मचारियों को बताया तो मामला तूल पकड़ गया। जिला अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाते हुए काम बंद कर दिया। कुछ ही देर में सभी कर्मचारी इकट्ठे होकर जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि दो दिन पहले पुलिस ने लालपुल पर लैब टेक्नीशियन दिनेश की बाइक का चालान कर दिया था। इसके अलावा जिला अस्पताल के कर्मचारियों को रोजाना परेशान किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल कर्मियों के धरने पर बैठने का पता लगने पर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम कुमार प्रशांत ने फोन पर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल से बात की। डीएम ने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कोई परेशानी नहीं होगी। डीएम की बात सीएमएस ने कर्मचारियों को बताई। डीएम के आश्वासन पर कुछ देर बाद ही कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर दिया और काम पर लौट गए।
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लॉकडाउन चल रहा है तो पुलिस को लोगों को चेक करेगी। इसमें बुरा मानने वाली बात नहीं है। पुलिस के खिलाफ कुछ गलतफहमी हुई थी, जिससे कर्मचारी कुछ देर के लिए एकत्र हो गए थे। बाद में उन्हें समझा दिया गया। कर्मचारियों के नए सिरे से पास बनवाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को दिक्कत नहीं आए। - डॉ. सुकुमार अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल