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साहित्य साधना में जुटीं ममता, पचास पुस्तकें लिख डालीं

Thu, 18 Nov 2021 01:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 01:02 AM IST
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Mamta engaged in literary practice, wrote fifty books
डॉ. ममता नौगरैया। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। शहर निवासी डॉ. ममता नौगरैया लंबे समय से साहित्य सृजन में लगी हैं। उनकी पचास से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वहीं काव्यपाठ के क्षेत्र में भी वह नाम कमा रहीं हैं।
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मध्यप्रदेश के सतना की मूल निवासी डॉ. ममता नौगरैया शहर निवासी वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुरेश चंद्र नौगरैया की पत्नी हैं। वह हिंदी साहित्य जगत में खासा मुकाम बना चुकी हैं। वह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के परिवार की नजदीकी रिश्तेदार हैं। गद्य और पद्य में उनके आलेख और रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं। उनकी पचास से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। उन्हें महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान, सोशल मीडिया मैत्री सम्मान (नेपाल), भूटान साहित्य सम्मान समेत करीब डेढ़ सौ से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। कल बचाओ-जल बचाओ मुहिम के तहत वह विशेष काम कर चुकी हैं।
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वह प्रकृति मंथन, समकालीन महिला साहित्य संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। डॉ. नौगरैया बताती हैं कि उनकी ससुराल झांसी में है तो वहां की परंपरा व रीतिरिवाज से पूरी तरह जुड़ी हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने बुदेलखंड का इतिहास नाम से पुस्तक लिखी की है जो छपने के लिए प्रेस में है। उसमें बुदेलखंड की संस्कृति व इतिहास से संबंधित जानकारी दी गई है। वहां के लोकगीत व मिजाज उनकी पुस्तक की खासियत होंगे। बताती हैं कि उनकी रचना में किस तरह एक बुंदेलखंड की महिला पति को उलाहना देती है-
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आज भयो मोरे मन की, सुनो मेरे सैंया, सासु न आवे, हमरो का बिगाड़े, चरुआ चढ़ाई बच जाइयो, तुम उठके चूल्हा जलइयो, हम चरुआ धर देवें।
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