UP News: 2019 में सबसे अधिक यहां मिले थे मरीज, अब फिर डराने लगा मलेरिया, 15 दिन में मिले 400 संक्रमित
बदायूं जिले में वर्ष 2019 में मलेरिया के 20,339 मरीज मिले थे। मलेरिया संक्रमण के मामले में उस समय बदायूं जिला एशिया में पहले स्थान पर पहुंच गया था। इस बार फिर मलेरिया डराने लगा है। 15 दिन में ही 400 मरीज मिल चुके हैं।
विस्तार
बदायूं जिले में मौसम बदलने के साथ ही मलेरिया एक बार फिर से डराने लगा है। 15 दिन में चार सौ मरीज सामने आने से स्वास्थ्य विभाग भी हैरान है। इसको देखकर लग रहा है कि मलेरिया पिछले वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। पिछले साल मलेरिया के कुल 3200 मरीज मिले थे। इस साल मलेरिया के जनवरी से 15 अगस्त तक 720 मरीज सामने आ चुके हैं।
बारिश के बाद मलेरिया फैलने लगता है। अगस्त में हुईं जांचों में 400 मलेरिया के मरीज सामने आए हैं। शासन ने मलेरिया विभाग को जिले की जनसंख्या के सापेक्ष दस प्रतिशत यानी चार लाख लोगों की जांच करने का लक्ष्य दिया है। जिले की जनसंख्या करीब 40 लाख है। विभाग जनवरी से अब तक विभाग 1.60 लाख लोगों की मलेरिया की जांच कर चुका है। इसमें अब तक 720 मरीज मलेरिया के सामने आए हैं।
2019 में मिले थे रिकॉर्ड मरीज
बता दें कि 2019 में मलेरिया का जिले में ऐसा प्रकोप था कि स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूल गए थे। तब जिले में 20,339 मलेरिया के मरीज मिले थे। मलेरिया संक्रमण के मामले में उस समय बदायूं जिला एशिया में पहले स्थान पर पहुंच गया था।
2021 से मलेरिया विभाग ने जांचें दो गुनी कीं, लेकिन मरीज कम होते चले गए। 2023 में विभाग ने 3.72 लाख लोगों की जांचें कीं, जिसमें 3200 मलेरिया के मरीज मिले। इस साल मलेरिया विभाग एक-एक दिन में 20-20 टीमें लगाकर बुखार पीड़ितों की जांच करा रहा है। इन्हीं जांच में एक से 15 अगस्त तक मलेरिया के 400 मरीज सामने आए हैं।
मलेरिया संक्रमित को यह दी जा रही दवा
मलेरिया संक्रमित होने के बाद सरकारी अस्पताल से 14 दिन की दवा दी जाती है। मरीज को घर जाकर आशा चेक करती है कि मरीज दवा सही तरीके से खा रहा है या नहीं। मरीज को समय पर 14 दिन तक दवा खाने की सलाह भी दी जा रही है। बुखार पीड़ित को पीसीएम टेबलेट, क्लोरोक्वीन, प्राइमाक्वीन टेबलेट खानी होती है, जो सरकारी अस्पताल से मुफ्त में दी जा रही है।
मलेरिया अधिकारी डॉ. योगेश कुमार सारस्वत ने बताया कि मलेरिया के मरीजों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें शिविर लगाकर जांच कर रहीं हैं। आशा बहुओं को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वह भी बुखार आने पर मलेरिया की किट से जांच कर सकें। इससे गांव में बुखार की जांचों में वृद्धि हो सकेगी। जिन लोगों को मलेरिया निकल रहा है उन्हें दवा दी जा रही है।