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Budaun News: अनुसूचित जाति के लोगों में बनाई पैठ... भीड़ ने बढ़ाया बाबा का रुतबा

Thu, 04 Jul 2024 05:12 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Thu, 04 Jul 2024 05:12 AM IST
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Made inroads among Scheduled Caste people... Crowd increased Baba's status
बदायूं। साकार विश्व हरि और भोले बाबा के नाम से सत्संग कर मशहूर हुए सूरजपाल के नेटवर्क में अनुसूचित जाति के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी मुख्य भूमिका में रहते हैं। ये लोग किराए की बस या अन्य वाहनों से लोगों को साथ लेकर जाते हैं। गरीबों का किराया ये कर्मचारी आपस में चंदा करके दे देते हैं। इस तरह बाबा के नेटवर्क से जुड़े लोग अलग-अलग शहरों और गांवों से भीड़ जुटाते हैं। यही भीड़ बाबा का रुतबा बढ़ाती है। बाबा भी अनुसूचित जाति के हैं इसलिए उनकी जाति के लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया।
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भोले बाबा का अतीत करीब से जानने वाले सत्संगी बताते हैं सत्संग के दौरान ही युवाओं की फौज को सेवादार के रूप में तैयार किया गया। जिले से भी बड़ी संख्या में लोग सेवादार बने। इन लोगों को संकल्प दिलाया गया कि महीने में एक बार वे सत्संग के दौरान समय देंगे। सेवादार तैयार हुए तो फिर एटा, अलीगढ़, संभल, बदायूं, मुरादाबाद समेत कई जनपदों में सत्संग के छोटे-बड़े आयोजन हुए। दूसरे राज्यों में राजस्थान पर फोकस रहा। इन सत्संगों में जिले के इस्लामनगर, उझानी, उघैती, अलापुर, उसहैत समेत कई कस्बों और गांवों के अनुयायी शामिल हुए हैं।
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मानव सेवा समिति बनाकर सेवादार किए भर्ती
जहां अनुसूचित जाति की आबादी अधिक है, वहां पर मानव सेवा समिति के नाम से संगठन खड़े किए गए। जिले से लेकर गांव और नगर स्तर तक सेवादारों के नेटवर्क को इसी समिति के पदाधिकारियों ने विस्तार दिया। सेवादारों की वर्दी सिलवाई गई। अब बाबा जहां भी सत्संग करते थे वहीं पर अगली तिथि पता चल जाती थी और लोग अगले सत्संग में जाने की तैयारी कर लेते थे। इसी बहाने उनका पर्यटन हो जाता था और मामूली किराये पर घूम कर लौट जाते थे। साथ ही रोजमर्रा की समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रवचन सुनने को मिलता था।
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