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Budaun News: धूमधाम से निकाला भगवान महावीर स्वामी का रथ, झांकियों ने मन मोहा
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उझानी में भगवान महावीर की रथयात्रा में झूमते अनुयायी। संवाद
उझानी। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के समापन पर सोमवार को भगवान महावीर स्वामी की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। भगवान महावीर के रथ के साथ शामिल झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
साहूकारा मोहल्ला स्थित जैन मंदिर परिसर में 10 दिन तक चले पर्व में धर्म के दशलक्षण उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौंच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन, ब्रह्मचर्य धर्म की पूजन क्रिया पूरी होने के बाद शोभायात्रा से पहले पूजन किया गया। कछला रोड बाजार के रास्ते घंटाघर चौराहे और स्टेशन रोड होकर शोभायात्रा पुरानी अनाज मंडी पहुंची।
शोभायात्रा में 12 से अधिक झांकियां दिखीं। वृंदावन के कलाकारों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। बैंडबाजों पर भगवान महावीर के प्रति आस्था से सराबोर भजनों पर महिलाओं ने नृत्य भी किया। पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष पूनम अग्रवाल, भाजपा नगर अध्यक्ष सचिन अग्रवाल और संदीप सक्सेना ने रथयात्रा का स्वागत किया। रथयात्रा मंदिर लौटकर धार्मिक कार्यक्रम के रूप में विसर्जित हुई।
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समापन पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। व्यवस्थाओं में अध्यक्ष अनूप जैन, अरुण जैन, अर्जित जैन, जयदीप जैन, पम्मो जैन आदि का सहयोग रहा।
श्रीजी के रथ पर अंकित जैन बने सौधर्म इंद्र
रथयात्रा से पहले जैन समाज के प्रमुख लोगों को विशेष सौभाग्य प्रदान किया गया। अंकित जैन श्रीजी के रथ पर सौधर्म इंद्र की भूमिका में नजर आए। प्रशांत जैन कुबेर इंद्र और सारथी की भूमिका संचित जैन ने निभाई। मंगल कलश का सौभाग्य हिमांशी जैन पत्नी अंकित जैन ने पाया। बच्चों में अयांश, परिणय, पहल, भगवान के इंद्र बने। अध्यक्ष अनूप जैन ने बताया कि श्रीजी के रथ पर सवार होने का सौभाग्य बोली के आधार पर प्रदान किया जाता है। इसके लिए दशलक्षण पर्व की सभी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
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साहूकारा मोहल्ला स्थित जैन मंदिर परिसर में 10 दिन तक चले पर्व में धर्म के दशलक्षण उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौंच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन, ब्रह्मचर्य धर्म की पूजन क्रिया पूरी होने के बाद शोभायात्रा से पहले पूजन किया गया। कछला रोड बाजार के रास्ते घंटाघर चौराहे और स्टेशन रोड होकर शोभायात्रा पुरानी अनाज मंडी पहुंची।
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शोभायात्रा में 12 से अधिक झांकियां दिखीं। वृंदावन के कलाकारों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। बैंडबाजों पर भगवान महावीर के प्रति आस्था से सराबोर भजनों पर महिलाओं ने नृत्य भी किया। पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष पूनम अग्रवाल, भाजपा नगर अध्यक्ष सचिन अग्रवाल और संदीप सक्सेना ने रथयात्रा का स्वागत किया। रथयात्रा मंदिर लौटकर धार्मिक कार्यक्रम के रूप में विसर्जित हुई।
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समापन पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। व्यवस्थाओं में अध्यक्ष अनूप जैन, अरुण जैन, अर्जित जैन, जयदीप जैन, पम्मो जैन आदि का सहयोग रहा।
श्रीजी के रथ पर अंकित जैन बने सौधर्म इंद्र
रथयात्रा से पहले जैन समाज के प्रमुख लोगों को विशेष सौभाग्य प्रदान किया गया। अंकित जैन श्रीजी के रथ पर सौधर्म इंद्र की भूमिका में नजर आए। प्रशांत जैन कुबेर इंद्र और सारथी की भूमिका संचित जैन ने निभाई। मंगल कलश का सौभाग्य हिमांशी जैन पत्नी अंकित जैन ने पाया। बच्चों में अयांश, परिणय, पहल, भगवान के इंद्र बने। अध्यक्ष अनूप जैन ने बताया कि श्रीजी के रथ पर सवार होने का सौभाग्य बोली के आधार पर प्रदान किया जाता है। इसके लिए दशलक्षण पर्व की सभी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।