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Budaun News: गंगा की मुख्य धारा के पास ककोड़ा मेला लगाने के लिए तलाशी जमीन
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ऐतिहासिक मेला ककोड़ा के स्थल चयन को पहुंचे एडीएम के साथ अधिकारी। संवाद
कादरचौक। रुहेलखंड का मिनी कुंभ कहे जाने वाले ऐतिहासिक ककोड़ा मेला में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल में स्नान कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने अभी से जमीन तलाशने की कवायद शुरू कर दी है। मेला स्थल के चयन को लेकर एडीएम ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। हालांकि, गंगा की मुख्य धारा की दूरी और जलस्तर की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण अभी अंतिम स्थल का चयन नहीं हो पाया है। अधिकारियों की टीम ने नाव से गंगा की मुख्य धारा और उपधारा का जायजा लिया। इसके साथ ही पैदल चलकर भी संभावित मेला स्थलों का निरीक्षण किया गया।
प्रशासन का प्रयास है कि इस बार ऐसा स्थान चयनित किया जाए, जहां श्रद्धालुओं को गंगा की मुख्य धारा में स्नान की सुविधा मिल सके। पिछले वर्ष ककोड़ा मेले के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और गंगा की मुख्य धारा के मेला स्थल से दूर चले जाने से श्रद्धालुओं को परेशानी हुई थी।
उपधारा में पानी कम होने और सूख जाने के कारण लोगों को गंदे और ठहरे हुए पानी में ही स्नान करना पड़ा था। इससे गंगा स्नान के लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखने को मिला था।
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निरीक्षण के दौरान एडीएम प्रशासन मानवेन्द्र सिंह, एएमए विनोद कुमार सिंह, इंजीनियर पवन कुमार गोयल, रामसिंह, सुधीर यादव, मधुरेश गुप्ता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
24 नवंबर को होगा मुख्य स्नान
इस बार ककोड़ा मेले का मुख्य स्नान 24 नवंबर को होगा, जबकि पिछले वर्ष मुख्य स्नान चार नवंबर को हुआ था। यानी इस बार मुख्य स्नान करीब 20 दिन बाद है। ऐसे में अधिकारियों को आशंका है कि नवंबर के अंत तक गंगा की उपधारा में पानी और कम हो जाएगा। यदि समय रहते सही स्थल का चयन नहीं किया गया तो इस बार भी पिछले वर्ष जैसी स्थिति बन सकती है।
तब पैंटून पुल से जोड़ा जाएगा मेला स्थल
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गंगा की मुख्य धारा के नजदीक मेला लगाने की संभावनाओं पर मंथन किया। इस योजना में मेला स्थल तक पहुंचने के लिए पैंटून पुल बनाना पड़ सकता है। यदि मुख्य धारा के पास मेला लगता है तो श्रद्धालुओं को स्वच्छ और बहते जल में स्नान का लाभ मिलेगा। फिलहाल अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। जल्द ही स्थल का चयन कर तैयारियां शुरू की जाएंगी।
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प्रशासन का प्रयास है कि इस बार ऐसा स्थान चयनित किया जाए, जहां श्रद्धालुओं को गंगा की मुख्य धारा में स्नान की सुविधा मिल सके। पिछले वर्ष ककोड़ा मेले के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और गंगा की मुख्य धारा के मेला स्थल से दूर चले जाने से श्रद्धालुओं को परेशानी हुई थी।
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उपधारा में पानी कम होने और सूख जाने के कारण लोगों को गंदे और ठहरे हुए पानी में ही स्नान करना पड़ा था। इससे गंगा स्नान के लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखने को मिला था।
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निरीक्षण के दौरान एडीएम प्रशासन मानवेन्द्र सिंह, एएमए विनोद कुमार सिंह, इंजीनियर पवन कुमार गोयल, रामसिंह, सुधीर यादव, मधुरेश गुप्ता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
24 नवंबर को होगा मुख्य स्नान
इस बार ककोड़ा मेले का मुख्य स्नान 24 नवंबर को होगा, जबकि पिछले वर्ष मुख्य स्नान चार नवंबर को हुआ था। यानी इस बार मुख्य स्नान करीब 20 दिन बाद है। ऐसे में अधिकारियों को आशंका है कि नवंबर के अंत तक गंगा की उपधारा में पानी और कम हो जाएगा। यदि समय रहते सही स्थल का चयन नहीं किया गया तो इस बार भी पिछले वर्ष जैसी स्थिति बन सकती है।
तब पैंटून पुल से जोड़ा जाएगा मेला स्थल
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गंगा की मुख्य धारा के नजदीक मेला लगाने की संभावनाओं पर मंथन किया। इस योजना में मेला स्थल तक पहुंचने के लिए पैंटून पुल बनाना पड़ सकता है। यदि मुख्य धारा के पास मेला लगता है तो श्रद्धालुओं को स्वच्छ और बहते जल में स्नान का लाभ मिलेगा। फिलहाल अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। जल्द ही स्थल का चयन कर तैयारियां शुरू की जाएंगी।