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भई वाह! एक साल से नहीं मिल रहे थे 300 कारतूस, मामला खुला तो एक घंटे में मिल गया रिकॉर्ड
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कादरचौक। थाने के शस्त्रागार से गायब जिन 300 कारतूसों का पिछले एक साल से हिसाब नहीं हो पा रहा था वह बुधवार को एक घंटे में ही पूरे हो गए। एक साल के बाद तत्कालीन मुंशी सतीश यादव मालखाने और शस्त्रागार में रिकॉर्ड का मिलान कराने थाने पहुंचे थे। मिलाने होने के बाद स्टाफ ने रिकॉर्ड में हेरफेर की वजह भ्रम बताई।
कादरचौक थाने के मुंशी सतीश यादव का ट्रांसफर सितंबर 2018 में जीआरपी में हो गया था। ट्रांसफर होने के बाद सतीश यादव आधा-अधूरा चार्ज मौजूदा मुंशी अतर सिंह को देकर चले गए थे। इसके बाद शस्त्रागार में रिकॉर्ड का मिलान करने पर सामने आया था कि कुल 3,305 कारतूस में 745 कारतूस फायर कर दिए गए थे और कुल 2,560 कारतूस शेष थे। फायर किए गए 445 खोखे मिल गए थे जबकि तीन सौ नहीं मिल पाए थे। उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने के बाद कई बार नोटिस पहुंचने के बावजूद सतीश यादव थाने नहीं पहुंचे थे।
बुधवार को कारतूस गायब होने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से छापी तो सतीश यादव तत्काल थाने पहुंचे। उन्होंने दोबारा रिकॉर्ड का मिलान कराया तो उन्होंने दागे गए 745 कारतूसों के खोखों का मिलान करा दिया। सामने आया कि मौजूदा मुंशी अतर सिंह रिकार्ड और शस्त्रागार में उपलब्ध कारतूसों को लेकर भ्रमित थे। ऐसे में उसने फायर किए पुराने कारतूसों को रिकार्ड में नहीं जोड़ा था। एसओ इंद्रेश कुमार ने बताया कि मिलान हो गया है। शस्त्रागार में कारतूस पूरे हैं। भ्रम की वजह से यह स्थिति पैदा हुई थी।
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कादरचौक थाने के मुंशी सतीश यादव का ट्रांसफर सितंबर 2018 में जीआरपी में हो गया था। ट्रांसफर होने के बाद सतीश यादव आधा-अधूरा चार्ज मौजूदा मुंशी अतर सिंह को देकर चले गए थे। इसके बाद शस्त्रागार में रिकॉर्ड का मिलान करने पर सामने आया था कि कुल 3,305 कारतूस में 745 कारतूस फायर कर दिए गए थे और कुल 2,560 कारतूस शेष थे। फायर किए गए 445 खोखे मिल गए थे जबकि तीन सौ नहीं मिल पाए थे। उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने के बाद कई बार नोटिस पहुंचने के बावजूद सतीश यादव थाने नहीं पहुंचे थे।
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बुधवार को कारतूस गायब होने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से छापी तो सतीश यादव तत्काल थाने पहुंचे। उन्होंने दोबारा रिकॉर्ड का मिलान कराया तो उन्होंने दागे गए 745 कारतूसों के खोखों का मिलान करा दिया। सामने आया कि मौजूदा मुंशी अतर सिंह रिकार्ड और शस्त्रागार में उपलब्ध कारतूसों को लेकर भ्रमित थे। ऐसे में उसने फायर किए पुराने कारतूसों को रिकार्ड में नहीं जोड़ा था। एसओ इंद्रेश कुमार ने बताया कि मिलान हो गया है। शस्त्रागार में कारतूस पूरे हैं। भ्रम की वजह से यह स्थिति पैदा हुई थी।
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