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कादरचौक का राजकीय इंटर कॉलेज चल रहा रामभरोसे

Sat, 11 Jul 2015 12:07 AM IST
कादरचौक।
कादरचौक। Updated Sat, 11 Jul 2015 12:07 AM IST
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Kadrchauk running the Government Inter College Rambrose
ब्लाक क्षेत्र का इकलौता राजकीय इंटर कॉलेज शिक्षा के नाम पर मात्र औपचारिकता भर ही बनकर रह गया है। यहां न सुविधाएं हैं और न पूरा स्टाफ, बस जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। गौर करने वाली बात है कि सात वर्ष में भी स्कूल भवन तैयार नहीं किया जा सका। अधिकारियों ने इसके लिए किसी की जवाबदेही भी तय नहीं की है।
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बताते चलें कि वर्ष 2006-07 में स्कूल भवन के लिए 90 लाख रुपये की स्वीकृति मिली, जिसमें से 69 लाख रुपया मिला, जिसे पैकफेड के माध्यम से भवन निर्माण कि लिए दिया गया। भवन की गुणवत्ता खराब मिलने पर मार्च माह में एडीएम द्वारा निरीक्षण में भवन को फेल कर दिया गया। उसके बाद भी दो बार मरम्मत कराने पर भी भवन की छत और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। घटिया सामग्री से बने भवन को विभाग ने हैंडओवर ही नहीं लिया। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन तैयार न होने के कारण बच्चे टीन शेड में बैठने को मजबूर हैं।
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कक्षा 12 तक चलने वाले इस विद्यालय में छात्र-छात्राओं की अच्छी संख्या के बावजूद छात्राओं के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी के नाम पर को सिर्फ दो छोटे नल ही लगे हैं। किसी भी संस्था या जनप्रतिनिधि की ओर से हैंडपंप नहीं लगवाया गया। बच्चे सर्दी, गर्मी, बरसात मे बिना फ र्नीचर के जमीन पर बैठकर ही शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
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यह है स्टाफ  का हाल                                                                  
कॉलेज मे मात्र तीन अध्यापक है। इसमें केमिस्टी, उर्दू सामाजिक विषय के ही अध्यापक हैं। एक पर कार्यवाहक प्रधानाचार्य का भी दायित्व है। कोई लिपिक न चपरासी है। बच्चों से ही चपरासी का कार्य लिया जा रहा है। शिक्षक-अभिभावक संघ की मीटिंग कर कार्यवाहक प्रधानाचार्य नेत्रपाल सिंह ने शिक्षा के सुधार के लिए प्राइवेट तौर पर शिक्षकों को रखने का सुझाव रखा, जिनके वेतन के लिए पीटीए के माध्यम से धन एकत्र किया जाएगा। इसके लिए कक्षा नौ से 60 रुपये प्रतिमाह बच्चे से शुल्क लिया जाएगा। इस पर सहमति जताई जा रही है।

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अब 1.86 करोड़ से हो रहा नए भवन का निर्माण
कार्यवाहक प्रधानाचार्य नेत्रपाल सिंह ने बताया कि भवन की हालत ठीक न होने के कारण बच्चों को वहां नहीं बैठाया जा सकता। इसी कारण हैंडओवर भी नहीं लिया गया है। केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक विभाग से एक करोड़ 86 लाख के लगभग मिले धन से नवीन भवन का निर्माण चल रहा है, जो लगभग इसी सत्र मे पूरा हो जाएगा। उस भवन का निर्माण होने पर ही बच्चों को छत मिल पाएगी।
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