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Budaun News: जुगेंद्र कहकर गए थे सुबह जल्दी लौटकर आएंगे
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सुपरवाइजर जुगेंद्र के वदहवास परिजन। संवाद
उझानी। कुड़ानरसिंहपुर गांव के पास मेंथा फैक्टरी में तीन सुरक्षा गार्डों का शव मिलने के बाद से सुपरवाइजर जुगेंद्र यादव के परिजन बदहवास हैं। पत्नी ने बताया कि वह नाइट ड्यूटी के लिए घर से सोमवार शाम छह बजे निकले थे। वह चार बच्चों के खेवनहार थे।
मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बसावनपुर निवासी रामबहादुर यादव के चार बेटों में सबसे बड़े जुगेंद्र यादव एक सुरक्षा कंपनी से जुड़े थे। मेहनती और ड्यूटी के प्रति सजग होने की वजह से कंपनी ने उन्हें सुपरवाइजर का दायित्व सौंप दिया था। छोटे भाई देवेंद्र ने बताया कि जुगेंद्र ड्यूटी के लिए सोमवार शाम छह बजे घर से निकले।
जाते समय पत्नी शोभा से कह गए थे कि मंगलवार सुबह में जल्दी लौट आऊंगा। जुगेंद्र की चार संतान में दो बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटियां बड़ी हैं। बेटों में बड़े की उम्र पांच तो छोटा तीन साल का है। जुगेंद्र का शव मिलने की सूचना के बाद बुजुर्ग पिता रामबहादुर ग्रामीण के साथ यहां आए तो बेटे की हालत देख गश खाकर गिर पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा कि ईश्वर ने मेरी अर्थी का एक कांधा छीन लिया। तीन बेटे मेरी अर्थी को कैसे उठाएंगे। मासूम बच्चों का खेवनहार भी छीन लिया गया है।
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अपने तीनों भाइयों में सबसे छोटे थे वीरभान
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव मुड़सेना खुर्द निवासी वीरभान यादव की ड्यूटी पिछले कुछ महीना पहले फैक्टरी में लगाई गई थी। उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से लगाया गया था। तीन भाइयों में सबसे छोटे वीरभान के दो बच्चे हैं। बेटी नौ और बेटी सात साल की है। पत्नी सुधा इस घटना के बाद से बदहवास है। पिता श्रीपाल भी परेशान हैं। वीरभान का शव पोस्टमॉर्टम के बाद मुड़सेना पहुंचा तो कोहराम मच गया।
विवेक का शव देख पत्नी पूनम की हालत बिगड़ी
कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव पसेई निवासी रजिस्टर सिंह यादव के दो बेटों में बड़े विवेक यादव शुरू से ही होनहार थे। सरकारी नौकरी के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन किस्मत का साथ नहीं मिला। दो साल पहले ही उन्होंने सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली। परिवार में माता- पिता के अलावा छोटा भाई नन्हे है। उनकी दो संतान में एक बेटा और बेटी है। विवेक का शव घर पहुंचा तो बिलखते समय पत्नी पूनम की हालत बिगड़ गई। उन्हें दवा भी दिलानी पड़ गई।
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मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बसावनपुर निवासी रामबहादुर यादव के चार बेटों में सबसे बड़े जुगेंद्र यादव एक सुरक्षा कंपनी से जुड़े थे। मेहनती और ड्यूटी के प्रति सजग होने की वजह से कंपनी ने उन्हें सुपरवाइजर का दायित्व सौंप दिया था। छोटे भाई देवेंद्र ने बताया कि जुगेंद्र ड्यूटी के लिए सोमवार शाम छह बजे घर से निकले।
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जाते समय पत्नी शोभा से कह गए थे कि मंगलवार सुबह में जल्दी लौट आऊंगा। जुगेंद्र की चार संतान में दो बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटियां बड़ी हैं। बेटों में बड़े की उम्र पांच तो छोटा तीन साल का है। जुगेंद्र का शव मिलने की सूचना के बाद बुजुर्ग पिता रामबहादुर ग्रामीण के साथ यहां आए तो बेटे की हालत देख गश खाकर गिर पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा कि ईश्वर ने मेरी अर्थी का एक कांधा छीन लिया। तीन बेटे मेरी अर्थी को कैसे उठाएंगे। मासूम बच्चों का खेवनहार भी छीन लिया गया है।
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अपने तीनों भाइयों में सबसे छोटे थे वीरभान
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव मुड़सेना खुर्द निवासी वीरभान यादव की ड्यूटी पिछले कुछ महीना पहले फैक्टरी में लगाई गई थी। उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से लगाया गया था। तीन भाइयों में सबसे छोटे वीरभान के दो बच्चे हैं। बेटी नौ और बेटी सात साल की है। पत्नी सुधा इस घटना के बाद से बदहवास है। पिता श्रीपाल भी परेशान हैं। वीरभान का शव पोस्टमॉर्टम के बाद मुड़सेना पहुंचा तो कोहराम मच गया।
विवेक का शव देख पत्नी पूनम की हालत बिगड़ी
कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव पसेई निवासी रजिस्टर सिंह यादव के दो बेटों में बड़े विवेक यादव शुरू से ही होनहार थे। सरकारी नौकरी के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन किस्मत का साथ नहीं मिला। दो साल पहले ही उन्होंने सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली। परिवार में माता- पिता के अलावा छोटा भाई नन्हे है। उनकी दो संतान में एक बेटा और बेटी है। विवेक का शव घर पहुंचा तो बिलखते समय पत्नी पूनम की हालत बिगड़ गई। उन्हें दवा भी दिलानी पड़ गई।