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तपती दोपहरी में भी दिखा पूरा जोश
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2016 12:37 AM IST
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खुशी
- फोटो : अमर उजाला
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रिजल्ट घोषित होने के बाद तपती सड़कों पर कर रहे थे हिप-हिप हुर्रे
तेज धूप और गर्मी में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्तीर्ण हुए स्टूडेंट्स का जोश देखते ही बन रहा था। तपती सड़कों पर परिणाम घोषित होने के बाद खुशी से झूम रहे थे।
यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षाफल घोषित हो गया। परीक्षाफल जानने को सुबह से ही बच्चों में बेहद उत्सुकता थी। सो वह दोपहर 12.30 बजे का इंतजार करने लगे। जैसे ही बोर्ड ने नेट पर परीक्षाफल अपलोड किया, तैसे ही स्टूडेंट्स अपना परिणाम जानने को निकल पड़े। इस बार कैफे के साथ ही मोबाइल के जरिए बच्चों ने अपना परिणाम जाना। प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट से ज्यादा इस बात का पता लगाने में अधिक दिखाई दिए कि जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में किसने टॉप किया है।
स्टूडेंट्स ग्रुप बनाकर रिजल्ट देखने को निकले थे। छात्राएं भी पीछे नहीं थीं। जैसे ही उन्हें पता चला कि वह सफल हो गए हैं तो वह जश्न मनाने लगे। एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। खुशी से कूदते- नाचते नजर आ रहे थे। छात्राओं ने सेल्फी भी ली।
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सीबीएसई पैटर्न को अपनाया तो स्टूडेंट्स की हुई बल्ले-बल्ले
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यूपी बोर्ड भी किसी अन्य बोर्ड से पीछे नहीं रहना चाहता। शायद इसीलिए उसने सीबीएसई और आईसीएसई पैटर्न को अपनाया। सो परिणाम अब हर किसी के सामने है। बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चे भी 90 फीसदी से ज्यादा अंक पा रहे हैं। अब ये कम ही सुनने को मिलता है की कोई स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा में असफल रहा है।
एक समय था जब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में स्टूडेंट्स को 60-65 फीसदी अंक पाना मुश्किल हो जाता था। 80 के दशक तक कुछ ऐसे ही स्थिति यह बोर्ड की रही। वजह थी कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बड़ी सख्ती से होता था और अंक भी कम दिए जाते थे। इसका फायदा सीबीएसई और आईसीएसई को ज्यादा मिल रहा था। यह दोनों बोर्ड अपने स्टूडेंट्स की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कम से कम 75 फीसदी अंक को मानकर करते थे। लिहाजा, यूपी बोर्ड के स्कूलों में अच्छे बच्चों की संख्या भी निरंतर कम होने लगी। तब बोर्ड के अधिकारियों ने इस बात पर मंथन किया था कि क्यों न वो भी सीबीएसई और आईसीएसई के पैटर्न को अपनाकर हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराए। उसने इस पैटर्न को अपनाया। अब रिजल्ट सबके सामने है। बदायूं जिले में इस साल शामिल हुए 62 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं में से हजारों ने 75 फीसदी से अधिक अंक पाए हैं।
तेज धूप और गर्मी में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्तीर्ण हुए स्टूडेंट्स का जोश देखते ही बन रहा था। तपती सड़कों पर परिणाम घोषित होने के बाद खुशी से झूम रहे थे।
यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षाफल घोषित हो गया। परीक्षाफल जानने को सुबह से ही बच्चों में बेहद उत्सुकता थी। सो वह दोपहर 12.30 बजे का इंतजार करने लगे। जैसे ही बोर्ड ने नेट पर परीक्षाफल अपलोड किया, तैसे ही स्टूडेंट्स अपना परिणाम जानने को निकल पड़े। इस बार कैफे के साथ ही मोबाइल के जरिए बच्चों ने अपना परिणाम जाना। प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट से ज्यादा इस बात का पता लगाने में अधिक दिखाई दिए कि जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में किसने टॉप किया है।
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स्टूडेंट्स ग्रुप बनाकर रिजल्ट देखने को निकले थे। छात्राएं भी पीछे नहीं थीं। जैसे ही उन्हें पता चला कि वह सफल हो गए हैं तो वह जश्न मनाने लगे। एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। खुशी से कूदते- नाचते नजर आ रहे थे। छात्राओं ने सेल्फी भी ली।
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सीबीएसई पैटर्न को अपनाया तो स्टूडेंट्स की हुई बल्ले-बल्ले
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यूपी बोर्ड भी किसी अन्य बोर्ड से पीछे नहीं रहना चाहता। शायद इसीलिए उसने सीबीएसई और आईसीएसई पैटर्न को अपनाया। सो परिणाम अब हर किसी के सामने है। बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चे भी 90 फीसदी से ज्यादा अंक पा रहे हैं। अब ये कम ही सुनने को मिलता है की कोई स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा में असफल रहा है।
एक समय था जब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में स्टूडेंट्स को 60-65 फीसदी अंक पाना मुश्किल हो जाता था। 80 के दशक तक कुछ ऐसे ही स्थिति यह बोर्ड की रही। वजह थी कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बड़ी सख्ती से होता था और अंक भी कम दिए जाते थे। इसका फायदा सीबीएसई और आईसीएसई को ज्यादा मिल रहा था। यह दोनों बोर्ड अपने स्टूडेंट्स की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कम से कम 75 फीसदी अंक को मानकर करते थे। लिहाजा, यूपी बोर्ड के स्कूलों में अच्छे बच्चों की संख्या भी निरंतर कम होने लगी। तब बोर्ड के अधिकारियों ने इस बात पर मंथन किया था कि क्यों न वो भी सीबीएसई और आईसीएसई के पैटर्न को अपनाकर हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराए। उसने इस पैटर्न को अपनाया। अब रिजल्ट सबके सामने है। बदायूं जिले में इस साल शामिल हुए 62 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं में से हजारों ने 75 फीसदी से अधिक अंक पाए हैं।