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Budaun News: शुरू होते ही डेढ़ हफ्ते में बंद हो गया जनऔषधि केंद्र बंद
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उझानी में जन औषधि केंद्र पर लटका ताला। संवाद
- फोटो : घटना स्थल पर जांच करने पहुंचे एसपी, एएसपी व एसडीएम।
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खुला जनऔषधि केंद्र अब धूल फांक रहा है। तीन माह पहले इसकी शुरूआत हुई थी, जो डेढ़ हफ्ते बाद ही बंद हो गया था। इस दिनों इसके दरवाजे पर लंबी-लंबी घास उग आई है। योजना से मरीजों को जागरूक करने के लिए लगाए गए फ्लैक्स भी अब फट चुके हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब तीन महीना पहले जनऔषधि केंद्र खोला गया था। इससे मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदने से छुटकारा मिल गया था। मरीजों को महंगी दवा खरीदने के लिए मेडिकल स्टोरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा था। यहां उन्हें काफी कम रेट पर आवश्यक दवाएं मिलने लगी थीं, लेकिन कर्मचारी के ताला डालकर चले जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं। ताला पड़ा होने की वजह से मरीजों ने भी जनऔषधि केंद्र की ओर कदम रखने बंद कर दिए। इन दिनों दरवाजे पर धूल जमी पड़ी है। आसपास घास-फूंस उग आने से स्थानीय कर्मचारियों की भी नजर उस ओर नहीं जाती।
मरीजों में नगर निवासी चंद्रपाल ने बताया कि जरूरी नहीं कि डॉक्टर जो दवाएं लिखें, वह अस्पताल के वितरण केंद्र में मिल ही जाएं। बता दें कि अधिकतर मेडिकल स्टोर पर मरीजों को प्रिंट रेट पर ही दवाएं मुहैया कराई जाती हैं, जबकि जन औषधि केंद्र पर आने वाली जीवनरक्षक दवाओं के रेट मेडिकल स्टोर के मुकाबले काफी कम होते हैं। कुछेक दवाओं के रेट में तो करीब 90 फीसदी का भी अंतर बताया गया है।
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अफसर नहीं करते गौर, परेशानी झेलते हैं मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जन औषधि केंद्र के दरवाजे पर करीब डेढ़- दो महीना से ताला लटका होने के पीछे जरूर कोई खास वजह हो सकती है। बुखार की दवा लेने अस्पताल पहुंचे गद्दीटोला मोहल्ले के निवासी रहमुद्दी ने बताया कि पिछले दिनों बेटी का इलाज कराया तो दो दवाएं अस्पताल में नहीं मिलीं। जन औषधि केंद्र बंद था। मजबूरी में मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग के अफसर आंख मूंद लेने को क्यों मजबूर हैं, समझ में नहीं आता।
जन औषधि केंद्र पिछले कई दिन से बंद है। इसे लेकर पिछले सप्ताह केंद्र संचालक के बारे में जानकारी भी कराई गई, लेकिन वह फिर भी नहीं आया। वह अफसरों से बात करेंगे। केंद्र जल्द ही खुलवा दिया जाएगा। - डॉ. सर्वेश कुमार, चिकित्साधीक्षक
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब तीन महीना पहले जनऔषधि केंद्र खोला गया था। इससे मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदने से छुटकारा मिल गया था। मरीजों को महंगी दवा खरीदने के लिए मेडिकल स्टोरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा था। यहां उन्हें काफी कम रेट पर आवश्यक दवाएं मिलने लगी थीं, लेकिन कर्मचारी के ताला डालकर चले जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं। ताला पड़ा होने की वजह से मरीजों ने भी जनऔषधि केंद्र की ओर कदम रखने बंद कर दिए। इन दिनों दरवाजे पर धूल जमी पड़ी है। आसपास घास-फूंस उग आने से स्थानीय कर्मचारियों की भी नजर उस ओर नहीं जाती।
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मरीजों में नगर निवासी चंद्रपाल ने बताया कि जरूरी नहीं कि डॉक्टर जो दवाएं लिखें, वह अस्पताल के वितरण केंद्र में मिल ही जाएं। बता दें कि अधिकतर मेडिकल स्टोर पर मरीजों को प्रिंट रेट पर ही दवाएं मुहैया कराई जाती हैं, जबकि जन औषधि केंद्र पर आने वाली जीवनरक्षक दवाओं के रेट मेडिकल स्टोर के मुकाबले काफी कम होते हैं। कुछेक दवाओं के रेट में तो करीब 90 फीसदी का भी अंतर बताया गया है।
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अफसर नहीं करते गौर, परेशानी झेलते हैं मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जन औषधि केंद्र के दरवाजे पर करीब डेढ़- दो महीना से ताला लटका होने के पीछे जरूर कोई खास वजह हो सकती है। बुखार की दवा लेने अस्पताल पहुंचे गद्दीटोला मोहल्ले के निवासी रहमुद्दी ने बताया कि पिछले दिनों बेटी का इलाज कराया तो दो दवाएं अस्पताल में नहीं मिलीं। जन औषधि केंद्र बंद था। मजबूरी में मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग के अफसर आंख मूंद लेने को क्यों मजबूर हैं, समझ में नहीं आता।
जन औषधि केंद्र पिछले कई दिन से बंद है। इसे लेकर पिछले सप्ताह केंद्र संचालक के बारे में जानकारी भी कराई गई, लेकिन वह फिर भी नहीं आया। वह अफसरों से बात करेंगे। केंद्र जल्द ही खुलवा दिया जाएगा। - डॉ. सर्वेश कुमार, चिकित्साधीक्षक