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Budaun News: इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत में हुनर दिखा रहे जेल के बंदी
Tue, 10 Oct 2023 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 10 Oct 2023 01:13 AM IST
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बदायूं। बदायूं जेल के बंदी जरी-जरदोजी के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत में भी अपना हुनर दिखा रहे हैं। अब जेल प्रशासन को अपने उपकरणों की मरम्मत के लिए किसी मिस्त्री को तलाशना नहीं पड़ रहा है। जेल में ही बल्ब से लेकर पंखा और अन्य उपकरणों की मरम्मत कराई जा रही है। उन्हें केवल उपकरणों का सामान लाकर दे दिया जाता है। इसके बाद बंदी मरम्मत करके उपकरण को ठीक कर देते हैं।
जेल में कौशल विकास योजना के तहत 18 जुलाई से 18 सितंबर तक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण चला था। इसमें 54 बंदियों ने भाग लिया था। रोजाना दो घंटे उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत कार्य सिखाया जाता था। एक माह तक चले इस प्रशिक्षण में कई बंदियों ने महारत हासिल कर ली। वह बल्ब, पंखा, मिक्सी, प्रेस और अन्य उपकरणों की मरम्मत करना सीख गए। इसके बाद सभी बंदियों को प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र भी दिया गया था। तब से जेल में जो भी उपकरण खराब होता है तो जेल के बंदी ही उसकी मरम्मत कर देते हैं।
जेलर रणंजय सिंह ने बताया कि जेल के बंदी कई उपकरणों की मरम्मत कर रहे हैं। जेल की हर बैरक में सीएफएल बल्ब लगे हैं। आए दिन कोई न कोई बल्ब खराब हो जाता है। अब उस बल्ब को फेंका नहीं जाता। जेल में ही उसे ठीक करके दोबारा प्रयोग में लाया जाता है। केवल बंदियों को उसका सामान लाकर दे दिया जाता है। वैसे ही पंखे आदि की मरम्मत के लिए उन्हें तार दे दिया जाता है, जिससे वह पंखे की मोटर को दोबारा बनाकर सही कर देते हैं।
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जेल में कौशल विकास योजना के तहत 18 जुलाई से 18 सितंबर तक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण चला था। इसमें 54 बंदियों ने भाग लिया था। रोजाना दो घंटे उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत कार्य सिखाया जाता था। एक माह तक चले इस प्रशिक्षण में कई बंदियों ने महारत हासिल कर ली। वह बल्ब, पंखा, मिक्सी, प्रेस और अन्य उपकरणों की मरम्मत करना सीख गए। इसके बाद सभी बंदियों को प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र भी दिया गया था। तब से जेल में जो भी उपकरण खराब होता है तो जेल के बंदी ही उसकी मरम्मत कर देते हैं।
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जेलर रणंजय सिंह ने बताया कि जेल के बंदी कई उपकरणों की मरम्मत कर रहे हैं। जेल की हर बैरक में सीएफएल बल्ब लगे हैं। आए दिन कोई न कोई बल्ब खराब हो जाता है। अब उस बल्ब को फेंका नहीं जाता। जेल में ही उसे ठीक करके दोबारा प्रयोग में लाया जाता है। केवल बंदियों को उसका सामान लाकर दे दिया जाता है। वैसे ही पंखे आदि की मरम्मत के लिए उन्हें तार दे दिया जाता है, जिससे वह पंखे की मोटर को दोबारा बनाकर सही कर देते हैं।
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