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Budaun News: एक इत्तेफाक है कि निदा-तंजील के निकाह और रुखसत की तारीख 18

Thu, 19 Jun 2025 12:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 12:46 AM IST
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It is a coincidence that the date of marriage and departure of Nida and Tanzil was 18
गांव चमरपुरा में शवों के पहुचे पर शोक में डूबे लोग।स्रोत वी​​​​​​​डियोग्रैब
बदायूं। यह इत्तेफाक ही है कि हमूपुर चमरपुरा के तंजील व निदा के निकाह और रुखसत की तारीख 18 है। सात जन्मों तक एक दूजे के साथ जीने-मारने की रस्म निभाने वाले निदा व तंजील का जीवन महज सात महीनों में ही आग की लपटों में काफूर हो गया। इस तारीख ने जहां तंजील और निदा को एक-दूजे से मिलाया। वहीं, अब इसी तारीख को दोनों एक साथ ही सुपुर्द-ए-खाक किए गए।
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सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव हमूपुर चमरपुरा निवासी हाजी तनवीर हुसैन ने सबसे बड़े बेटे तंजील का निकाह 18 नवंबर 2024 को निदा के साथ बड़ी धूमधाम से किया था। निदा के पिता ने तंजील को दहेज में नई कार दी थी। तंजील पत्नी के साथ दिल्ली में ही रहकर एक एसी कंपनी में नौकरी करते थे। वहीं, उसके परिवार के लोग भी दिल्ली में रहकर रंगाई पुताई समेत अलग-अलग रोजगार करते है। बुधवार को एक साथ पांच मौतों की खबर गांव पहुंची तो परिजनों में चीत्कार मच गया। हर कोई तंजील और उसके बहनोई जुबैर के घर की ओर दौड़ पड़ा। लोगों ने बताया कि तंजील और निदा के निकाह के अभी सात महीने ही बीते है। जबकि दोनों की जिंदगी के आखिरी लम्हें भी 18 जून को ही समाप्त हो गए। इस हादसे ने गांव के लोगों को झकझोर दिया है। हर किसी की जुबां पर बस यहीं शब्द हैं, अल्लाह तूने यह क्या किया।
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एक साथ कफन में लिपटें पहुंचे पांच शव, चीत्कार से दहल उठा चमरपुरा और खैरपुर वल्ली

फोटो-19
संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। महज 500 मीटर की दूरी बसे हमूपुरा चमरपुरा और खैरपुल्ली गांव के लोग बुधवार सुबह एक साथ पांच लोगों की मौत से दहल उठे। दोनों गांव में मातम पसर गया। रिश्तेदारों और मृतकों के घरों में चीत्कार मच गई। शाम एक साथ गांव पहुंचे पांच शवों को देख लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। परिवार के लोग शवों से लिपटकर रोने बिलखने लगे।
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कतार में रखे पांच शवों का मंजर देख हर किसी की आंखे नम हो गई। देर शाम परिवार के लोगों ने सभी पांचों शवों का गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए खाक किया। उसमें कई गांव के लोग शामिल हुए। तंजील के गांव हमूपुर चरमपुरा और उसके बहनोई जुबैर के गांव खैलपुर वल्ली में महज 500 मीटर की दूरी हैं। तंजील की ससुराल करीब सात किलोमीटर दूर है।

जुबैर के परिवार के सभी सदस्य उसके साथ दिल्ली में ही रहते थे। जबकि तंजील की मां अफसाना को छोड़कर अन्य सदस्य भी दिल्ली में रहते है, लेकिन तंजील के चाचा की शादी होने के कारण परिवार के लोग गांव आए हुए थे। इधर, अधिकांश रिश्तेदार व परिजन भी शादी में शामिल होने के बाद अपने-अपने घर लौट गए थे। जबकि तंजील और उसके बहन-बहनोई बुधवार तड़के दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। भीषण गर्मी में तंजील के बहनें बेसुध हो गई। शवों को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ गया।
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