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Budaun News: महिला कैदियों से बातचीत कर सुनीं समस्याएं
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जेल का निरीक्षण करती जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुमन तिवारी। स्रोत- प्रशासन
- फोटो : संवाद
बदायूं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुमन तिवारी ने बृहस्पतिवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बंदियों की समस्याएं सुनते हुए उन्होंने कारागार प्रशासन को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए और विधिक सहायता को लेकर बंदियों को जागरूक भी किया।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने विशेष रूप से उन बंदियों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया, जो अपनी निर्धारित सजा की आधी अवधि से अधिक समय कारागार में बिता चुके हैं। उन्होंने ऐसे बंदियों की सूची तैयार कर उनकी रिहाई के संबंध में की गई कार्यवाही का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कारागार की पाकशाला, बैरकों एवं अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं और यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता, अधिवक्ता व जमानतदार की सुविधा समय पर मिल रही है या नहीं। साथ ही नियमित रूप से दवाओं की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली।
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महिला बैरक के निरीक्षण के दौरान सचिव ने महिला कैदियों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान यह सामने आया कि 19 महिला कैदियों के साथ उनके 4 छोटे बच्चे भी रह रहे हैं। इस पर उन्होंने बच्चों के लिए दूध की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
जिला कारागार चिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु कुमार से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली गई। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि महिला बंदियों के लिए अलग से चिकित्सालय की व्यवस्था नहीं है और उन्हें महिला बैरक में ही उपचार उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर सचिव ने आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि प्री-लिटिगेशन स्तर पर अधिक से अधिक वादों का निस्तारण कराया जाए, जिससे आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिल सके। इस मौके पर अधीक्षक जिला कारागार राजेन्द्र कुमार समेत अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
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निरीक्षण के दौरान सचिव ने विशेष रूप से उन बंदियों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया, जो अपनी निर्धारित सजा की आधी अवधि से अधिक समय कारागार में बिता चुके हैं। उन्होंने ऐसे बंदियों की सूची तैयार कर उनकी रिहाई के संबंध में की गई कार्यवाही का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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कारागार की पाकशाला, बैरकों एवं अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं और यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता, अधिवक्ता व जमानतदार की सुविधा समय पर मिल रही है या नहीं। साथ ही नियमित रूप से दवाओं की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली।
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महिला बैरक के निरीक्षण के दौरान सचिव ने महिला कैदियों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान यह सामने आया कि 19 महिला कैदियों के साथ उनके 4 छोटे बच्चे भी रह रहे हैं। इस पर उन्होंने बच्चों के लिए दूध की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
जिला कारागार चिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु कुमार से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली गई। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि महिला बंदियों के लिए अलग से चिकित्सालय की व्यवस्था नहीं है और उन्हें महिला बैरक में ही उपचार उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर सचिव ने आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि प्री-लिटिगेशन स्तर पर अधिक से अधिक वादों का निस्तारण कराया जाए, जिससे आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिल सके। इस मौके पर अधीक्षक जिला कारागार राजेन्द्र कुमार समेत अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।