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फर्जी प्रमाणपत्र : नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक 17 को दिल्ली तलब
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बदायूं। दिल्ली में नौकरी के लिए लगाए गए दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच में जिले के स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों की भूमिका को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। मामले की जांच कर रही इंटेलीजेंस टीम ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक से पूछताछ की थी। अब दोनों को 17 सितंबर को दिल्ली तलब किया गया है।
दिल्ली में नौकरी के दौरान लगाए गए कुछ दिव्यांगता प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें आंखों से संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। इनमें कुछ जिले से जारी किए गए बताए जा रहे हैं। प्रमाणपत्रों की जांच के सिलसिले में इंटेलीजेंस की टीम सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंची थी। टीम अपने साथ संबंधित प्रमाणपत्र और अभिलेख भी लाई थी। उन्हीं अभिलेखों के आधार पर टीम ने दिव्यांग बोर्ड कमेटी से बात की थी। हालांकि इस दौरान टीम का पूरा फोकस नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक पर था। अधिकांश समय टीम ने पटल सहायक से बात की।
पूछताछ के बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक को 17 सितंबर को दिल्ली बुलाया गया है। दोनों से वहां संबंधित प्रमाणपत्रों और अभिलेखों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जाएगी।
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दिनभर स्वास्थ्य विभाग में होती रहीं चर्चाएं
इंटेलीजेंस टीम के सीएमओ कार्यालय पहुंचने के बाद सोमवार को दिनभर स्वास्थ्य विभाग में इस मामले को लेकर चर्चाएं होती रहीं। वहीं, मंगलवार को दोनों कर्मचारियों को दिल्ली तलब किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया। अब दिल्ली में होने वाली पूछताछ और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने में किसकी क्या भूमिका रही।
फर्जी प्रमाणपत्र के संबंध में टीम जांच करने आई थी। टीम का सभी ने पूरा सहयोग किया। टीम अगर जांच के लिए किसी को बुलाती है, तो उसको जाना होगा। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
मेडिकल बोर्ड से डॉक्टर को हटाया, बाबू के काम पर रोक
बदायूं। फर्जी प्रमाणपत्रों के बनने के मामले में मेडिकल बोर्ड से एक डॉक्टर पीयूष मोहन अग्रवाल को हटा दिया। साथ ही संबंधित बाबू के काम कराने पर रोक लगा दी हैं। मंगलवार को सीएमओ ने मेडिकल बोर्ड से नेत्र रोग विशेषज्ञ को पैनल से निकाल दिया है। बाबू शेर सिंह के काम पर रोक लगा दी है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि कमेटी से डॉक्टर को हटा दिया गया है। जल्द ही दूसरे डॉक्टर को चयन किया जाएगा।
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दिल्ली में नौकरी के दौरान लगाए गए कुछ दिव्यांगता प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें आंखों से संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। इनमें कुछ जिले से जारी किए गए बताए जा रहे हैं। प्रमाणपत्रों की जांच के सिलसिले में इंटेलीजेंस की टीम सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंची थी। टीम अपने साथ संबंधित प्रमाणपत्र और अभिलेख भी लाई थी। उन्हीं अभिलेखों के आधार पर टीम ने दिव्यांग बोर्ड कमेटी से बात की थी। हालांकि इस दौरान टीम का पूरा फोकस नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक पर था। अधिकांश समय टीम ने पटल सहायक से बात की।
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पूछताछ के बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ और पटल सहायक को 17 सितंबर को दिल्ली बुलाया गया है। दोनों से वहां संबंधित प्रमाणपत्रों और अभिलेखों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जाएगी।
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दिनभर स्वास्थ्य विभाग में होती रहीं चर्चाएं
इंटेलीजेंस टीम के सीएमओ कार्यालय पहुंचने के बाद सोमवार को दिनभर स्वास्थ्य विभाग में इस मामले को लेकर चर्चाएं होती रहीं। वहीं, मंगलवार को दोनों कर्मचारियों को दिल्ली तलब किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया। अब दिल्ली में होने वाली पूछताछ और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने में किसकी क्या भूमिका रही।
फर्जी प्रमाणपत्र के संबंध में टीम जांच करने आई थी। टीम का सभी ने पूरा सहयोग किया। टीम अगर जांच के लिए किसी को बुलाती है, तो उसको जाना होगा। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
मेडिकल बोर्ड से डॉक्टर को हटाया, बाबू के काम पर रोक
बदायूं। फर्जी प्रमाणपत्रों के बनने के मामले में मेडिकल बोर्ड से एक डॉक्टर पीयूष मोहन अग्रवाल को हटा दिया। साथ ही संबंधित बाबू के काम कराने पर रोक लगा दी हैं। मंगलवार को सीएमओ ने मेडिकल बोर्ड से नेत्र रोग विशेषज्ञ को पैनल से निकाल दिया है। बाबू शेर सिंह के काम पर रोक लगा दी है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि कमेटी से डॉक्टर को हटा दिया गया है। जल्द ही दूसरे डॉक्टर को चयन किया जाएगा।